सुप्रीम कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला: NI Act, Sec 138 में किसी व्यक्ति को चेक बाउंसिंग के अपराध में केवल इसलिए दोषी नहीं ठहराया जा सकता है क्योंकि वह उस फर्म का पार्टनर या गांरटर था-

138 ni act

चेक बाउंस Cheque Bouncing के मामलों में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट Supreme Court ने सुनवाई करते हुए एक महत्वपूर्ण फैसला Landmark Judgment सुनाया कि आपराधिक दायित्व नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट NI Act की धारा 138 किसी व्यक्ति पर सिर्फ इसलिए नहीं लगाया जा सकता है क्योंकि वह एक फर्म में भागीदार है जिसने ऋण लिया था … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: NI Act की Sec 138 उन मामलों में भी लागू होती है जहां चेक आहरण के बाद और प्रस्तुति से पहले ऋण लिया जाता है-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कर्ज लेने के बाद जारी किया गया पोस्ट डेटेड चेक ‘कर्ज’ की परिभाषा के दायरे में आएगा। केवल चेक Cheque को एक प्रतिभूति Security के रूप में लेबल करने मात्र से कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण या देयता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए एक इंस्ट्रूमेंट … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने बिटकॉइन घोटाले के 20 हजार करोड़ रुपये के आरोपी को फटकार लगाते हुए ईडी के साथ जानकारी साझा करने को कहा-

“सुप्रीम कोर्ट की गरिमा को बनाए रखना होगा। हम कोई तीस हजारी कोर्ट नहीं हैं।” ज्ञात हो की वर्ष 2018 में यह 2 हजार करोड़ का गेन बिटकॉइन घोटाला मामला अब 20 हजार करोड़ रुपये का हो चुका है। इसमें आरोपी अमित भारद्वाज के भाई अजय भारद्वाज ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों को रद्द करने … Read more

दिल्ली उच्च न्यायलय ने निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा कहा: चेक बाउंस मामले में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे-

निचली अदालत (Lower Court) के फैसले को बरकरार रखते हुए चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने सख्त आदेश दिया है। न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर (Hon’ble Justice Rajnish Batnagar) की पीठ ने कहा कि यदि नोटिस जारी करने और अवसर देने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया तो गंभीर … Read more

हाईकोर्ट: तथ्य छिपाकर अपील दाखिल करने पर वकील पर लगाया रुपया एक लाख का जुर्माना-

Madhya Pradesh High Court मध्यप्रदेश उच्च न्यायलय ने तथ्य छिपाकर अपील दायर करने पर टीकमगढ़ निवासी अधिवक्ता निर्मल लोहिया पर रूपये एक लाख का जुर्माना लगाया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति रवि मलिमठ एवं न्यायमूर्ति पुरुषेन्द्र कौरव की खंडपीठ ने मध्य प्रदेश राज्य बार कौंसिल को अधिवक्ता के खिलाफ व्यावसायिक कदाचरण की कार्रवाई करने के निर्देश दिए। … Read more

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि: जमानती अपराधों के मामलों में नहीं दी जा सकती है अग्रिम जमानत-

कोर्ट ने कहा कि याची पर गैर-जमानती अपराध करने का आरोप होना चाहिए, जो पहले से मौजूद तथ्यों से उपजा हुआ हो। याचिकाकर्ता के मन में उचित आशंका या विश्वास होना चाहिए कि उसे इस तरह के आरोप के आधार पर गिरफ्तार किया जाएगा। इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने फैसला सुनाया कि जमानती अपराध के मामलों … Read more

इलाहाबाद हाई कोर्ट: बिना सुनवाई GST निर्धारित कर ब्याज सहित पेनाल्टी वसूलना, नैसर्गिक न्याय का उल्लघंन, लगाया 10 हजार का हर्जाना-

Allahabad High Court इलाहाबाद हाईकोर्ट ने Goods and Service Tax के तहत टैक्स निर्धारण Tax Assessment और पेनाल्टी Penality लगाने से पहले सुनवाई का मौका न देने को नैसर्गिक न्याय का उल्लघंन माना है। साथ ही ब्याज सहित टैक्स और पेनाल्टी वसूली आदेश की रद्द कर दिया। कोर्ट ने वाणिज्य विभाग Commertial Tax, बरेली को … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अदालतों को किसी मामले के सभी मुद्दों पर न्यायिक निर्णय देना चाहिए न कि सिर्फ एक मुद्दे पर-

सर्वोच्च न्यायलय ने मंगलवार एक मामले कि सुनवाई करते हुए निचली अदालतों को आगाह किया कि मामलों का फैसला करने में शॉर्टकट की मानसिकता से बचें। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि निचली अदालतो द्वारा कुछ सवाल अनुत्तरित छोड़ने के बदले मुकदमे के हर पहलू पर पूरी तरह विचार … Read more

7800 करोड़ रोटोमैक ग्लोबल कंपनी बैंक घोटाले के मुख्य आरोपी राहुल कोठारी को हाईकोर्ट ने दी जमानत-

हाईकोर्ट

रोटोमैक ग्लोबल कंपनी द्वारा किये गए बैंक घोटालों के मुख्य आरोपी रोटोमैक ग्लोबल कंपनी कानपुर (Rotomac Global Company Kanpur) के मालिक राहुल कोठारी (Rahul Kothari) को इलाहाबाद उच्च न्यायलय से मिली बड़ी राहत मिली है. जस्टिस ओम प्रकाश सप्तम की एकल पीठ ने आदेश दिया है- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनकी सशर्त अंतरिम जमानत को मंजूर … Read more

उच्चतम बोली लगाने वाले को अपने पक्ष में नीलामी संपन्न कराने का कोई निहित अधिकार नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

न्यायालय मौलिक अधिकारों के संरक्षक होने के नाते जहां मनमानी, तर्कहीनता, अतार्किकता, दुर्भावना और पूर्वाग्रह, यदि कोई हो, हस्तक्षेप करने के लिए बाध्य हैं, लेकिन साथ ही, न्यायालयों को बहुत संयम के साथ न्यायिक समीक्षा की शक्ति का प्रयोग करना चाहिए विशेष रूप से संविदात्मक और वाणिज्यिक मामलों में। Supreme Court of India सर्वोच्च न्यायलय … Read more