दिल्ली हाई कोर्ट सख्त: न्यायपालिका और मंत्रियों के लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल होने की ‘फर्जी खबर’ हटाने का आदेश, सोशल मीडिया अकाउंट्स की मांगी जानकारी

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न्यायाधीशों और केंद्रीय मंत्रियों के लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल होने संबंधी कथित फर्जी खबरों को हटाने का निर्देश

दिल्ली हाई कोर्ट ने बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीशों और केंद्रीय मंत्रियों के लंदन बैडमिंटन टूर्नामेंट में शामिल होने संबंधी कथित फर्जी खबरों को हटाने का निर्देश दिया। कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स से संबंधित अकाउंट्स का विवरण देने और MeitY को कार्रवाई पर विचार करने को कहा।

नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने शुक्रवार को बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) की उस याचिका पर आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर प्रसारित उन पोस्टों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी, जिनमें दावा किया गया था कि संवैधानिक अदालतों के न्यायाधीश, केंद्रीय मंत्री और कार्यपालिका के सदस्य लंदन में आयोजित एक बैडमिंटन टूर्नामेंट में एक साथ शामिल हुए थे।

जस्टिस तेजस करिया की एकल पीठ ने अंतरिम तौर पर सोशल मीडिया इंटरमीडियरीज और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को विवादित सामग्री हटाने का निर्देश दिया। अदालत ने संबंधित पोस्ट अपलोड और प्रसारित करने वाले अकाउंट्स की सब्सक्राइबर जानकारी उपलब्ध कराने का भी आदेश दिया तथा इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को कानून के अनुसार मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने को कहा।

BAI का आरोप: न्यायपालिका की छवि खराब करने की कोशिश

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप और अधिवक्ता रजत नायर पेश हुए, जबकि केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता तथा केंद्रीय सरकारी स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित उपस्थित हुए।

BAI ने अदालत को बताया कि सोशल मीडिया पर एक दुष्प्रचार अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें दावा किया गया कि करीब 75 न्यायाधीश, जिनमें वरिष्ठ न्यायाधीश भी शामिल हैं, और केंद्रीय मंत्री सरकारी खर्च पर लंदन में आयोजित बैडमिंटन टूर्नामेंट में भाग लेने गए थे। याचिका में कहा गया कि ये आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और न्यायपालिका की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से लगाए गए हैं।

दिल्ली के टूर्नामेंट की तस्वीरें लंदन की बताकर फैलाई गईं

याचिका के अनुसार, विवाद 7 जून 2026 को लंदन में आयोजित द्वितीय इंटरनेशनल बार एंड बेंच बैडमिंटन चैम्पियनशिप से जुड़ा है।

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BAI ने कहा कि 29 नवंबर 2025 को नई दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित ऑल इंडिया जजेज बैडमिंटन चैम्पियनशिप की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर गलत तरीके से लंदन कार्यक्रम की तस्वीरें बताकर प्रसारित किया गया।

याचिका में कहा गया कि PIB फैक्ट चेक यूनिट द्वारा इन दावों को गलत साबित किए जाने के बावजूद यह सामग्री विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगातार साझा की जा रही है।

केंद्र सरकार का स्पष्टीकरण

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता द्वारा दिया गया बयान रिकॉर्ड पर रखा गया। इसमें स्पष्ट किया गया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित वे तस्वीरें, जिनमें भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू बैडमिंटन खेलते दिखाई दे रहे हैं, भ्रामक हैं।

सरकार के अनुसार, ये तस्वीरें 29 नवंबर 2025 को दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित राष्ट्रीय स्तर की बार एंड बेंच बैडमिंटन प्रतियोगिता की हैं, जिसमें विभिन्न हाई कोर्टों के न्यायाधीश और अधिवक्ता शामिल हुए थे। उद्घाटन दिवस पर मुख्य न्यायाधीश, अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू ने एक औपचारिक मैत्री मैच खेला था।

CJI विक्रम नाथ ने लंदन में किसी खेल आयोजन में हिस्सा नहीं लिया

केंद्र ने स्पष्ट किया कि मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने लंदन में किसी बैडमिंटन टूर्नामेंट या खेल आयोजन में भाग नहीं लिया। उनका दौरा आधिकारिक था, जिसके दौरान उन्होंने इंग्लैंड एवं वेल्स के मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की, आधिकारिक कार्यक्रमों में भाग लिया और मध्यस्थता कानून (Arbitration Law) से संबंधित कार्यक्रमों को संबोधित किया।

सरकार ने यह भी कहा कि केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और किरेन रिजिजू उस अवधि में लंदन गए ही नहीं थे। 75 न्यायाधीशों के साथ कानून मंत्री के लंदन जाने का दावा “पूरी तरह झूठा” बताया गया।

केवल दो न्यायाधीश निजी यात्रा पर गए थे

सरकार के अनुसार, इलाहाबाद हाई कोर्ट के केवल दो न्यायाधीश निजी क्षमता में लंदन गए थे। केंद्र ने कहा कि दिल्ली में हुए एक खेल आयोजन की तस्वीरों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट, मुख्य न्यायाधीश और विभिन्न हाई कोर्टों के न्यायाधीशों की छवि खराब करने के लिए फर्जी खबर फैलाई जा रही है।

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IT Act के तहत कार्रवाई की मांग

याचिका में केंद्र सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 तथा उससे संबंधित नियमों के तहत कथित फर्जी खबरों के स्रोत की पहचान करने और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने का निर्देश देने की मांग की गई है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अपूर्व कुरुप ने मामले का तत्काल उल्लेख करते हुए कहा कि तथ्य-जांच और आधिकारिक स्पष्टीकरण के बावजूद यह झूठा नैरेटिव सोशल मीडिया पर तेजी से फैल रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी अदालत को बताया कि कई प्लेटफॉर्म्स पर यह फर्जी सामग्री प्रसारित हो रही है और तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।

सभी पक्षों को सुनने के बाद हाई कोर्ट ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया और विवादित सामग्री हटाने, संबंधित अकाउंट्स की जानकारी उपलब्ध कराने तथा MeitY को मामले की जांच कर उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

मामला : Badminton Association of India v. Union of India & Ors., दिल्ली हाई कोर्ट (2026)

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