GST धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) अतुल गुप्ता को जमानत
कड़कड़डूमा कोर्ट ने GST धोखाधड़ी मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट अतुल गुप्ता को जमानत दे दी। अदालत ने कहा कि 2020 से लंबित जांच के बीच आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
दिल्ली की कड़कड़डूमा अदालत ने GST धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) अतुल गुप्ता को जमानत प्रदान की है। अदालत ने कहा कि मामले की जांच वर्ष 2020 से जारी है और जांच एजेंसी की ओर से आगे की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता भी नहीं बताई गई है। ऐसे में आरोपी को न्यायिक हिरासत में बनाए रखने का कोई औचित्य नहीं है।
मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) Mohit Sharma ने 29 मई के आदेश में यह राहत प्रदान की। अतुल गुप्ता को 12 मई 2026 को गिरफ्तार किया गया था।
2020 से जारी है जांच
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले की जांच पिछले छह वर्षों से जारी है। इस अवधि में जांच एजेंसी को पर्याप्त अवसर मिल चुका है और वर्तमान स्थिति में आरोपी की आगे की हिरासत आवश्यक नहीं दिखाई देती।
कोर्ट ने कहा:
“यह देखते हुए कि जांच वर्ष 2020 से जारी है, जांच अधिकारी द्वारा आगे की कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता भी नहीं बताई गई है। ऐसे में आरोपी को न्यायिक हिरासत में रखने से कोई उद्देश्य पूरा नहीं होगा।”
संतोषजनक जवाब न देना हिरासत का आधार नहीं
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने तर्क दिया कि आरोपी ने जांच में पूरा सहयोग नहीं किया और कई प्रश्नों के भ्रामक उत्तर दिए।
हालांकि अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि जांच अधिकारी आरोपी के उत्तरों से संतुष्ट नहीं है, तो केवल यही तथ्य उसे न्यायिक हिरासत में रखने का आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट ने कहा कि हिरासत का निर्णय जांच की वास्तविक आवश्यकता और कानूनी मानकों के आधार पर होना चाहिए, न कि केवल जांच अधिकारी की असंतुष्टि पर।
25 हजार रुपये के मुचलके पर जमानत
अदालत ने अतुल गुप्ता को 25,000 रुपये के निजी मुचलके और समान राशि के एक जमानती पर जमानत देने का आदेश दिया।
इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि आरोपी जांच में सहयोग करेगा और कानून के अनुसार निर्धारित सभी शर्तों का पालन करेगा।
बचाव पक्ष ने क्या दलील दी?
अतुल गुप्ता की ओर से अधिवक्ता Amit Kumar ने अदालत को बताया कि उनके मुवक्किल 2015 से चार्टर्ड अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत हैं और उनकी आयु 45 वर्ष है।
बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि कथित घटना वर्ष 2015 की है, जबकि प्राथमिकी (FIR) 2020 में दर्ज की गई थी। इसके बावजूद आरोपी लगातार जांच में शामिल होता रहा है और उसने जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया है।
वकील ने यह भी कहा कि आरोपी से कोई बरामदगी नहीं हुई है और न ही वह किसी कथित फर्जी खाते या लेन-देन का लाभार्थी है।
अभियोजन पक्ष ने किया विरोध
दूसरी ओर, लोक अभियोजक और जांच अधिकारी ने जमानत याचिका का कड़ा विरोध किया। उनका कहना था कि मामला गंभीर आर्थिक अपराध से संबंधित है और जांच अभी महत्वपूर्ण चरण में है।
अभियोजन पक्ष के अनुसार अभी वित्तीय विश्लेषण, दस्तावेजों की बरामदगी, डिजिटल रिकॉर्ड की जांच तथा लाभार्थी कंपनियों और व्यक्तियों की पहचान जैसी प्रक्रियाएं बाकी हैं।
सबूतों से छेड़छाड़ की आशंका जताई
अतिरिक्त लोक अभियोजक (APP) ने अदालत को बताया कि यदि आरोपी को रिहा किया जाता है तो वह अपने CA फर्म और उससे जुड़े व्यक्तियों को प्रभावित कर सकता है। साथ ही सबूतों से छेड़छाड़ की भी आशंका व्यक्त की गई।
हालांकि अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड और जांच की प्रगति को देखते हुए माना कि इन आशंकाओं के आधार पर आरोपी को अनिश्चितकाल तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
आर्थिक अपराधों में जमानत पर महत्वपूर्ण टिप्पणी
यह आदेश आर्थिक अपराधों से जुड़े मामलों में जमानत के सिद्धांतों को लेकर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने संकेत दिया कि लंबी अवधि तक जांच लंबित रहने और कस्टोडियल पूछताछ की आवश्यकता न होने की स्थिति में आरोपी की स्वतंत्रता को अनावश्यक रूप से सीमित नहीं किया जा सकता।
फिलहाल मामले की जांच जारी है और अदालत ने स्पष्ट किया है कि जमानत दिए जाने का अर्थ आरोपों से मुक्ति नहीं है। मामले के गुण-दोष पर अंतिम निर्णय ट्रायल के दौरान ही होगा।
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