फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला
हरियाणा के सोनीपत की फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान को नाबालिग खिलाड़ी के यौन उत्पीड़न मामले में POCSO एक्ट के तहत 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई।
POCSO केस में राष्ट्रीय तीरंदाजी कोच दोषी, सोनीपत कोर्ट ने सुनाई 5 साल की सजा
फास्ट ट्रैक कोर्ट का बड़ा फैसला
हरियाणा के सोनीपत स्थित फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट ने राष्ट्रीय स्तर के तीरंदाजी कोच कुलदीप वेदवान को नाबालिग महिला खिलाड़ी के यौन उत्पीड़न मामले में दोषी ठहराते हुए पांच साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है।
अदालत ने आरोपी को ‘यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम’ (POCSO Act) की धाराओं के तहत दोषी माना और उस पर 15 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
यह फैसला अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश नरेंद्र सिंह की अदालत ने 20 मई 2026 को सुनाया। इससे पहले अदालत ने 15 मई को आरोपी को दोषी करार दिया था, जिसके बाद उसे हिरासत में ले लिया गया था।
2023 के ट्रायल कैंप के दौरान हुआ था कथित उत्पीड़न
अभियोजन पक्ष के अनुसार, यह मामला अप्रैल 2023 में सोनीपत में आयोजित एक युवा तीरंदाजी चैंपियनशिप के ट्रायल से जुड़ा है।
पीड़िता, जो एक जूनियर राष्ट्रीय स्तर की तीरंदाज थी, भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) केंद्र में आयोजित ट्रायल में भाग लेने के लिए सोनीपत गई थी। वह उस समय ‘श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड कटरा स्टेडियम’ में प्रशिक्षण ले रही थी, जहां कुलदीप वेदवान कोचिंग गतिविधियों से जुड़ा हुआ था।
होटल के कमरे में घुसने का आरोप
पीड़िता ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि 7 अप्रैल 2023 की सुबह लगभग 4 बजे आरोपी उसके होटल के कमरे में घुस गया और उसके साथ अश्लील हरकतें करने लगा।
शिकायत के मुताबिक, उसने करीब 15 से 20 मिनट तक आरोपी का विरोध किया और किसी तरह वहां से निकलकर महिला खिलाड़ियों के दूसरे कमरे में जाकर शरण ली।
पीड़िता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद आरोपी ने उससे माफी मांगी और कहा कि यदि उसने यह बात किसी को बताई तो उसका करियर बर्बाद हो जाएगा।
‘बड़ी खिलाड़ी बनाने’ का दिया था लालच
शिकायत में यह भी कहा गया कि आरोपी बाद में लगातार उस पर दबाव डालता रहा कि वह उसके कमरे में रुके।
पीड़िता के अनुसार, कुलदीप वेदवान ने उसे यह कहकर लालच दिया था कि यदि वह उसका साथ देगी तो वह उसे “बड़ी खिलाड़ी” बना देगा।
अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि आरोपी की ओर से खिलाड़ी पर मानसिक दबाव बनाने और पेशेगत भविष्य का हवाला देकर चुप रहने के लिए मजबूर करने की कोशिश की गई।
परिवार को बताई घटना, फिर दर्ज हुई शिकायत
ट्रायल के बाद पीड़िता का चयन सिंगापुर में आयोजित होने वाले एशिया कप के लिए हो गया था।
बाद में उसने यह घटना अपने परिवार को बताई, जिसके बाद श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड में शिकायत दर्ज कराई गई। बताया गया कि एक आंतरिक जांच समिति ने परिवार को पुलिस में मामला दर्ज कराने की सलाह दी।
इसके बाद सोनीपत पुलिस ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 354A और POCSO Act की धाराओं 10 एवं 12 के तहत एफआईआर दर्ज की।
मामले की जांच एक महिला पुलिस अधिकारी द्वारा की गई और बाद में ट्रायल फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट में चला।
कोर्ट ने किन धाराओं में सुनाई सजा?
विशेष लोक अभियोजक विजेंद्र सिंह खत्री ने बताया कि अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आरोपी को दोषी पाया।
कोर्ट ने:
- POCSO Act की धारा 10 के तहत 5 साल का कठोर कारावास
- धारा 12 के तहत 3 साल का कठोर कारावास
की सजा सुनाई।
हालांकि अदालत ने निर्देश दिया कि दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।
पूर्व राष्ट्रीय तीरंदाज रहा है आरोपी
कुलदीप वेदवान स्वयं एक पूर्व राष्ट्रीय स्तर का तीरंदाज रह चुका है। भारतीय सेना की नौकरी छोड़ने के बाद उसने कोचिंग शुरू की थी।
पिछले कुछ वर्षों में उसने उत्तर प्रदेश, पुडुचेरी और जम्मू-कश्मीर में कई तीरंदाजी अकादमियां स्थापित की थीं। वह श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में पैरा-तीरंदाजी खिलाड़ियों को प्रशिक्षण देने से भी जुड़ा रहा।
खेल संस्थानों में सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
इस फैसले ने खेल प्रशिक्षण संस्थानों में नाबालिग खिलाड़ियों की सुरक्षा और कोचों की जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि POCSO कानून के तहत ऐसे मामलों में त्वरित सुनवाई और सख्त सजा खिलाड़ियों के लिए सुरक्षित खेल वातावरण सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश देती है।
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