टोल प्लाजा ने ₹65 की जगह वसूले ₹130, हरियाणा कंज्यूमर कमीशन ने लगाया ₹6,800 का भुगतान

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टोल प्लाजा को ₹1,300 वापस करने के साथ-साथ ₹5,500 मुआवजा और मुकदमे की लागत के रूप में देने का निर्देश

पानीपत जिला उपभोक्ता आयोग ने डबल टोल वसूली के मामले में टोल प्लाजा और निर्माण कंपनी को ₹1,300 लौटाने तथा ₹5,500 मुआवजा और मुकदमे की लागत देने का आदेश दिया। आयोग ने इसे सेवा में स्पष्ट कमी माना।

₹65 के टोल की जगह ₹130 की वसूली

हरियाणा के पानीपत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने एक वाहन चालक से कथित तौर पर दोगुना टोल वसूलने के मामले में टोल प्लाजा और उससे जुड़ी निर्माण कंपनी को उपभोक्ता को कुल ₹6,800 का भुगतान करने का आदेश दिया है।

आयोग ने टोल प्लाजा को ₹1,300 वापस करने के साथ-साथ ₹5,500 मुआवजा और मुकदमे की लागत के रूप में देने का निर्देश दिया।

आयोग की अध्यक्ष आर.के. डोगरा तथा सदस्य रेखा चौधरी और विनीत कौशिक की पीठ ने 29 सितंबर को आदेश पारित करते हुए कहा कि एक ही टोल राशि को नकद लेने के साथ-साथ Paytm वॉलेट से भी काट लेना सेवा में स्पष्ट कमी है।

पांच मिनट के भीतर दो बार काटी गई रकम

मामला जून 2023 का है। शिकायतकर्ता अपने परिवार के साथ वाहन से गोहाना की ओर जा रहा था। टोल प्लाजा पर कर्मचारी ने कथित तौर पर उसे बताया कि उसके Paytm वॉलेट में पर्याप्त बैलेंस नहीं है।

शिकायतकर्ता ने पर्याप्त बैलेंस होने की बात कही, लेकिन इसके बावजूद उससे ₹130 वसूले गए, जिसमें ₹65 का टोल और ₹65 की कथित पेनल्टी शामिल थी।

इसके करीब पांच मिनट बाद शिकायतकर्ता को Paytm से संदेश मिला कि उसके वॉलेट से भी ₹65 काट लिए गए हैं।

इस तरह उसके अनुसार, एक ही टोल के लिए कुल ₹195 की राशि चली गई।

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रिफंड मांगने पर नहीं लौटाई रकम

शिकायतकर्ता ने टोल प्लाजा के कर्मचारियों से अतिरिक्त ₹65 वापस करने की मांग की। आरोप है कि उसकी मांग स्वीकार नहीं की गई और उसके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का भी इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद उसने टोल प्लाजा को कानूनी नोटिस भेजा, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। इसके बाद उसने टोल प्लाजा और निर्माण कंपनी के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दाखिल की।

शिकायत में सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापार व्यवहार (Unfair Trade Practice) का आरोप लगाया गया।

टोल कंपनी ने क्या सफाई दी?

विपक्षी पक्ष ने शिकायतकर्ता के आरोपों से इनकार किया। उनका कहना था कि वाहन का FASTag ठीक से काम नहीं कर रहा था और स्कैनिंग के बाद बैलेंस दिखाई नहीं दे रहा था।

उनके अनुसार, शिकायतकर्ता ने स्थिति को सत्यापित करने के बाद टोल का भुगतान किया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि शिकायत दाखिल करने से पहले शिकायतकर्ता ने उनसे रिफंड के लिए संपर्क नहीं किया था।

Paytm स्क्रीनशॉट और टोल रसीद से साबित हुई गलत कटौती

आयोग ने शिकायतकर्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों पर भरोसा किया। इनमें Paytm भुगतान का स्क्रीनशॉट और टोल रसीद शामिल थी।

आयोग ने पाया कि दस्तावेजों से यह स्थापित होता है कि ₹65 की राशि पांच मिनट के अंतराल में दो बार काटी गई।

आयोग ने माना कि जब गलत तरीके से राशि काट ली गई थी, तो उसे वापस करना संबंधित पक्षों का दायित्व था। रिफंड से इनकार करना सेवा में कमी के दायरे में आता है।

विपक्षी पक्ष पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर सका

आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता ने अपने मामले को “ठोस और विश्वसनीय साक्ष्य” (cogent and convincing evidence) के माध्यम से साबित किया है।

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इसके विपरीत, विपक्षी पक्ष को कई अवसर दिए जाने के बावजूद वह अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य पेश नहीं कर सका।

आयोग ने कहा कि शिकायत और उसके साथ प्रस्तुत दस्तावेजों का खंडन विपक्षी पक्ष की ओर से नहीं किया जा सका।

आयोग का महत्वपूर्ण निष्कर्ष

आयोग ने स्पष्ट किया कि जब भुगतान रिकॉर्ड यह स्थापित करते हैं कि एक ही टोल की राशि दो बार काटी गई है, तो उपभोक्ता उस अतिरिक्त राशि की वापसी और उचित राहत की मांग कर सकता है।

साथ ही, टोल ऑपरेटर की ओर से गलत तरीके से काटी गई रकम को समय पर वापस नहीं करना सेवा में कमी माना जा सकता है।

मामले का सार

बिंदुविवरण
आयोगपानीपत जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग
अध्यक्षआर.के. डोगरा
सदस्यरेखा चौधरी, विनीत कौशिक
घटनाजून 2023
नियमित टोल₹65
अतिरिक्त कटौती₹65
कुल भुगतान का आदेश₹6,800
वापसी₹1,300
मुआवजा व लागत₹5,500
आधारसेवा में कमी और गलत टोल कटौती

यह आदेश बताता है कि FASTag/डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड, टोल रसीद और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य किसी उपभोक्ता शिकायत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। यदि दस्तावेजों से अतिरिक्त या दोहरी कटौती प्रमाणित होती है और सेवा प्रदाता उसका संतोषजनक खंडन नहीं कर पाता, तो उपभोक्ता आयोग राहत प्रदान कर सकता है।

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