SBI Cards निष्क्रिय क्रेडिट कार्ड कटौती फैसला
हरियाणा जिला उपभोक्ता आयोग ने निष्क्रिय क्रेडिट कार्ड से की गई अनधिकृत कटौतियों के मामले में SBI Cards और SBI को सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक आचरण का दोषी ठहराते हुए ₹1.26 लाख की वापसी और ₹11,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।
निष्क्रिय क्रेडिट कार्ड से पैसे काटने पर SBI Cards को राहत नहीं
हरियाणा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और SBI Cards and Payment Services Ltd. को सेवा में कमी (Deficiency in Service) तथा अनुचित व्यापारिक आचरण (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराते हुए एक उपभोक्ता को ₹1.26 लाख वापस करने और ₹11,000 मुआवजा देने का आदेश दिया है।
आयोग ने कहा कि बैंक का उद्देश्य बकाया राशि पूरी तरह वसूलने के बजाय केवल न्यूनतम राशि काटकर शेष रकम पर हर महीने ब्याज कमाना था, जिसे उसने बैंक का “छिपा हुआ एजेंडा (Hidden Agenda)” बताया।
आयोग ने मानसिक पीड़ा और मुकदमेबाजी खर्च भी दिलाया
आयोग की पीठ, जिसमें अध्यक्ष राजबीर सिंह तथा सदस्य जसविंदर सिंह और सुमन राणा शामिल थे, ने उपभोक्ता को मानसिक पीड़ा और वाद व्यय के लिए अतिरिक्त ₹11,000 देने का भी निर्देश दिया।
15 जुलाई के आदेश में आयोग ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि विपक्षी पक्षों ने जानबूझकर कार्डधारक के बचत खाते में पर्याप्त राशि होने के बावजूद पूरा बकाया नहीं काटा, बल्कि केवल न्यूनतम राशि काटकर शेष राशि पर मासिक ब्याज वसूलकर लाभ कमाने का प्रयास किया। आयोग के अनुसार यह आचरण उचित नहीं है और इसे सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापारिक आचरण माना जाएगा।
ग्राहकों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना बैंकों की जिम्मेदारी
आयोग ने कहा कि देश की वित्तीय संस्थाओं के रूप में बैंकों का दायित्व है कि वे क्रेडिट कार्ड सुविधा लेने वाले प्रत्येक ग्राहक का समुचित रिकॉर्ड रखें। हालांकि, इस मामले में SBI और SBI Cards ऐसा करने में विफल रहे।
आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बचत खाता SBI द्वारा संचालित था, जबकि क्रेडिट कार्ड का संचालन SBI Cards करती थी और उसी के निर्देश पर बचत खाते से राशि काटी जाती थी। चूंकि दोनों संस्थाएं SBI समूह का हिस्सा हैं, इसलिए वे अनधिकृत कटौतियों की जिम्मेदारी से बच नहीं सकतीं।
निष्क्रिय क्रेडिट कार्ड से लगातार होती रही कटौती
यमुनानगर निवासी रूपिंदर सिंह का SBI में बचत खाता था और उन्हें Credit Protection Plan (CPP) के तहत SBI का एक क्रेडिट कार्ड जारी किया गया था।
शिकायतकर्ता का कहना था कि उन्होंने न तो कभी इस क्रेडिट कार्ड को सक्रिय (Activate) किया और न ही इसे Google Pay, Paytm या किसी अन्य ऑनलाइन भुगतान प्लेटफॉर्म से जोड़ा।
इसके बावजूद फरवरी 2022 से उनके बचत खाते से क्रेडिट कार्ड बकाया के नाम पर लगातार रकम काटी जाने लगी। उन्होंने बैंक से इन लेन-देन की जांच करने का अनुरोध किया, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। बैंक खाते के विवरण के अनुसार, निष्क्रिय क्रेडिट कार्ड होने के बावजूद हर महीने बड़ी राशि खाते से डेबिट की जाती रही।
मुंबई में हुए दो संदिग्ध ट्रांजैक्शन का खुलासा
अगस्त 2022 में शिकायतकर्ता को बकाया राशि की सूचना मिली। तब उन्हें पता चला कि 29 अप्रैल 2022 को मुंबई में उनके क्रेडिट कार्ड से कथित रूप से ₹40,849.60 और ₹18,777.50 के दो लेन-देन दर्ज किए गए थे।
उन्होंने इन दोनों ट्रांजैक्शनों को पूरी तरह अनधिकृत बताते हुए बैंक पर जांच न करने का आरोप लगाया और उपभोक्ता आयोग का दरवाजा खटखटाया। शिकायत में सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण का आरोप लगाया गया।
SBI और SBI Cards ने क्या दलील दी?
SBI ने कहा कि क्रेडिट कार्ड और उससे जुड़े सभी लेन-देन की जिम्मेदारी SBI Cards and Payment Services Ltd. की है, जो एक अलग कानूनी इकाई है।
बैंक का तर्क था कि क्रेडिट कार्ड का उपयोग केवल PIN जनरेट करने के बाद ही संभव है, इसलिए शिकायतकर्ता या उनकी जानकारी के बिना कोई लेन-देन नहीं हो सकता। SBI ने किसी भी प्रकार की लापरवाही से इनकार करते हुए शिकायत खारिज करने की मांग की।
दूसरी ओर SBI Cards ने कहा कि शिकायतकर्ता ने नियम एवं शर्तें स्वीकार करते हुए क्रेडिट कार्ड लिया था और बकाया भुगतान के लिए ऑटो-डेबिट (Auto-Debit) मंडेट भी चुना था।
कंपनी के अनुसार विवादित दोनों लेन-देन कार्ड के CVV और शिकायतकर्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP के माध्यम से प्रमाणित किए गए थे। कंपनी ने यह भी दावा किया कि शिकायतकर्ता ने कार्ड का कई बार उपयोग किया था, लेकिन भुगतान नहीं किया, जिसके कारण उनके बचत खाते से नियमित ऑटो-डेबिट किया गया।
कार्ड सक्रिय होने का कोई सबूत पेश नहीं कर सके बैंक
आयोग ने पाया कि SBI और SBI Cards यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके कि शिकायतकर्ता ने कभी कार्ड सक्रिय किया था, PIN बनाया था या कार्ड का उपयोग किया था।
हालांकि बैंक ने OTP प्रमाणीकरण और ऑटो-डेबिट मंडेट का दावा किया, लेकिन इसके समर्थन में कोई रिकॉर्ड, दस्तावेज या डिजिटल साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया गया। आयोग ने कहा कि केवल मौखिक दावों के आधार पर ऐसे लेन-देन को सही नहीं माना जा सकता।
विवादित लेन-देन के रिकॉर्ड भी नहीं दिखा सके
आयोग ने यह भी पाया कि विपक्षी पक्ष विवादित ₹40,849.60 और ₹18,777.50 के लेन-देन से संबंधित कोई क्रेडिट कार्ड स्टेटमेंट या अन्य खाता रिकॉर्ड भी प्रस्तुत नहीं कर सके।
इसके अलावा आयोग ने यह सवाल भी उठाया कि यदि शिकायतकर्ता के खाते में पर्याप्त धनराशि उपलब्ध थी, तो बैंक ने पूरा बकाया एक साथ काटने के बजाय हर महीने केवल आंशिक राशि ही क्यों काटी। आयोग के अनुसार इससे यह स्पष्ट होता है कि बैंक शेष राशि पर ब्याज कमाने का प्रयास कर रहा था।
फैसले से क्या संदेश मिला?
यह निर्णय स्पष्ट करता है कि बैंक केवल दावों के आधार पर विवादित क्रेडिट कार्ड लेन-देन को सही नहीं ठहरा सकते। वित्तीय संस्थानों पर ग्राहकों के रिकॉर्ड सुरक्षित रखने, धोखाधड़ी संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष जांच करने और ऑटो-डेबिट जैसी प्रक्रियाओं का दस्तावेजी प्रमाण प्रस्तुत करने की कानूनी जिम्मेदारी है।
यदि बैंक आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत करने में विफल रहते हैं, तो इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक आचरण माना जा सकता है।
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