दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO और रेप मामले की FIR की रद्द, नाबालिग पीड़िता की सहमति और पारिवारिक परिस्थितियों पर किया विचार

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कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा – कोर्ट

दिल्ली हाईकोर्ट ने POCSO, रेप और बाल विवाह निषेध कानून के तहत दर्ज FIR को रद्द कर दिया। अदालत ने पीड़िता के स्वैच्छिक नो-ऑब्जेक्शन, आरोपी से विवाह, नाबालिग बेटी के साथ साथ रहने और पारिवारिक संबंध बनाए रखने की इच्छा को ध्यान में रखा।

आरोपी से शादी और नाबालिग बेटी के साथ रह रही पीड़िता

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक विशेष मामले में POCSO Act, IPC की धारा 376 और बाल विवाह निषेध अधिनियम के तहत दर्ज FIR को रद्द कर दिया। अदालत ने यह आदेश उस परिस्थिति को देखते हुए दिया, जहां कथित नाबालिग पीड़िता ने आरोपी से विवाह कर लिया है और दोनों की एक नाबालिग बेटी भी है।

यह FIR दक्षिण दिल्ली जिले में वर्ष 2024 में दर्ज की गई थी। FIR दर्ज होने के समय पीड़िता नाबालिग थी।

पीड़िता ने केस आगे चलाने से किया इनकार

जस्टिस मधु जैन के समक्ष FIR रद्द करने की याचिका पर सुनवाई हुई। पीड़िता ने अपने हलफनामे में आरोपी के साथ विवाह और वर्तमान पारिवारिक स्थिति की पुष्टि की।

उसने अदालत को बताया कि वह आरोपी के साथ रह रही है, दोनों की एक नाबालिग बेटी है और वह अपने वैवाहिक जीवन में खुश है। उसने आगे की आपराधिक कार्यवाही जारी रखने पर नो-ऑब्जेक्शन जताया और मामले को आगे नहीं चलाना चाहती।

याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता अनिश मोहम्मद, इरफान, अखिल और अशोक पेश हुए।

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अदालत ने कहा- कार्यवाही जारी रखने से कोई उपयोगी उद्देश्य पूरा नहीं होगा

अदालत ने मामले की विशेष परिस्थितियों, पीड़िता के स्वैच्छिक बयान और नो-ऑब्जेक्शन को ध्यान में रखा। कोर्ट ने यह भी देखा कि दोनों पक्ष वर्तमान में अपनी नाबालिग बेटी के साथ एक परिवार के रूप में रह रहे हैं।

अदालत ने कहा कि पक्षकार अपने वैवाहिक और पारिवारिक संबंध को बनाए रखना चाहते हैं और अपनी नाबालिग बेटी के कल्याण को सुनिश्चित करना चाहते हैं। इन परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना किसी उपयोगी उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा।

किन धाराओं के तहत FIR हुई थी?

दिल्ली हाईकोर्ट ने 30 सितंबर को आदेश पारित करते हुए निम्न प्रावधानों के तहत दर्ज FIR और उससे जुड़ी सभी परिणामी कार्यवाहियों को रद्द कर दिया:

  • IPC की धारा 376 – बलात्कार
  • POCSO Act की धारा 6 – गंभीर लैंगिक अपराध से संबंधित प्रावधान
  • Prohibition of Child Marriage Act, 2006 की धाराएं 9/10 – बाल विवाह से संबंधित अपराध

अदालत ने ट्रायल कोर्ट के समक्ष लंबित कार्यवाही समेत FIR से उत्पन्न सभी परिणामी कार्यवाहियों को भी समाप्त कर दिया।

याचिकाकर्ताओं ने क्या दलील दी?

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत को बताया गया कि पक्षकारों ने अपने विवादों को आपसी सहमति से सुलझा लिया है और वर्तमान में पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे हैं।

यह भी कहा गया कि दोनों अपनी नाबालिग बेटी के साथ रह रहे हैं और पत्नी अब मामले में आगे कार्यवाही नहीं चाहती।

याचिकाकर्ताओं के अनुसार, पीड़िता ने अपनी इच्छा से एक हलफनामा/नो-ऑब्जेक्शन दाखिल किया है, जिसमें उसने FIR और उससे जुड़ी सभी कार्यवाहियों को रद्द किए जाने पर अपनी सहमति व्यक्त की है।

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हाईकोर्ट के आदेश की अहम बात

इस मामले में हाईकोर्ट ने FIR रद्द करते समय मुख्य रूप से मामले की विशिष्ट परिस्थितियों, पीड़िता के स्वैच्छिक बयान और वर्तमान पारिवारिक स्थिति को ध्यान में रखा। अदालत ने पक्षकारों के साथ रहने, वैवाहिक संबंध बनाए रखने की इच्छा और नाबालिग बेटी के कल्याण को भी अपने आदेश में महत्वपूर्ण माना।

हालांकि, आदेश को मामले की विशेष परिस्थितियों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

मामले की मुख्य बातें

पहलूविवरण
अदालतदिल्ली हाईकोर्ट
न्यायाधीशजस्टिस मधु जैन
FIRवर्ष 2024, दक्षिण जिला
पीड़िताFIR के समय नाबालिग
वर्तमान स्थितिआरोपी से विवाह, एक नाबालिग बेटी
प्रमुख धाराएंIPC 376, POCSO धारा 6, बाल विवाह निषेध अधिनियम की धारा 9/10
पीड़िता का रुखFIR जारी रखने पर नो-ऑब्जेक्शन
आदेशFIR और सभी परिणामी कार्यवाही रद्द

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