Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026: लोकसभा से पारित हुआ टैक्स संशोधन विधेयक, डिजिटल पेमेंट से इलेक्ट्रॉनिक्स और डायमंड ट्रेडिंग तक कई बड़े बदलाव

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  • लोकसभा से विधेयक पारित: Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 लोकसभा से पारित हुआ। इसे 4 अगस्त 2026 को पेश किया गया था।
  • Income-tax Ordinance को बदलेगा: विधेयक का उद्देश्य Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 को प्रतिस्थापित करना है।
  • डिजिटल पेमेंट नियमों में बदलाव: Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन कर डिजिटल भुगतान के पात्र माध्यमों को केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित करने का प्रस्ताव है।
  • फंड मैनेजमेंट को बढ़ावा: Eligible Investment Funds और Fund Managers से जुड़ी शर्तों को अधिक तर्कसंगत बनाने का प्रस्ताव है।
  • भारतीय भागीदारी की सीमा 5%: Eligible Investment Fund में भारतीय भागीदारी की सीमा फंड के कॉर्पस के 5% तक बनी रहेगी। कुछ अपवादों के साथ चार महीने का curing mechanism भी होगा।
  • इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर को टैक्स राहत: निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं से जुड़ी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग को टैक्स छूट 31 मार्च 2041 तक बढ़ाने का प्रस्ताव है।

लोकसभा ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill 2026 पारित किया। विधेयक में डिजिटल पेमेंट, फंड मैनेजमेंट, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डायमंड ट्रेडिंग और सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश से जुड़े टैक्स प्रावधानों में बदलाव प्रस्तावित हैं।


लोकसभा से Taxation and Other Laws Amendment Bill 2026 पारित

लोकसभा ने Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 को पारित कर दिया है। विधेयक का उद्देश्य कर व्यवस्था में अधिक निश्चितता प्रदान करना, फंड मैनेजमेंट गतिविधियों को बढ़ावा देना, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना, डायमंड ट्रेडिंग को सुविधाजनक बनाना, सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश को बढ़ावा देना और डिजिटल भुगतान से जुड़े नियमों को सरल बनाना है।

यह विधेयक 4 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था और इसका उद्देश्य Income-tax (Amendment) Ordinance, 2026 को प्रतिस्थापित करना है।


Payment and Settlement Systems Act, 2007 में प्रस्तावित बदलाव

विधेयक में Payment and Settlement Systems Act, 2007 की धारा 10A में संशोधन का प्रस्ताव है। इसके तहत आयकर कानून में निर्धारित इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों के संदर्भ को हटाकर ऐसे इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों को शामिल करने का प्रस्ताव है, जिन्हें केंद्र सरकार अधिसूचित करेगी।

इस बदलाव का उद्देश्य शुल्क-मुक्त डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आयकर कानून से अलग करना और केंद्र सरकार को समय-समय पर पात्र इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यम अधिसूचित करने की अधिक लचीलापन देना है।


Income-tax Act, 2025 की अनुसूची-I में बदलाव

विधेयक में Income-tax Act, 2025 की Schedule-I को प्रतिस्थापित करने का प्रस्ताव है। इसके साथ पात्र निवेश फंड और पात्र फंड मैनेजर से संबंधित शर्तों को अधिक तर्कसंगत बनाने की बात कही गई है।

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इसका उद्देश्य फंड मैनेजमेंट गतिविधियों को बढ़ावा देना और निवेश से जुड़े कर प्रावधानों में अधिक स्पष्टता एवं कर निश्चितता सुनिश्चित करना है।


Eligible Investment Fund में भारतीय भागीदारी की सीमा 5% रहेगी

विधेयक के तहत पात्र निवेश फंड में भारतीय भागीदारी की अनुमत सीमा फंड के कुल कॉर्पस के 5 प्रतिशत पर ही बनी रहेगी।

हालांकि, कुछ निर्धारित परिस्थितियों में अपवाद उपलब्ध होंगे। इसके अलावा, शर्तों में कमी या उल्लंघन को ठीक करने के लिए चार महीने का Cure Mechanism भी प्रस्तावित किया गया है।


इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को टैक्स राहत

विधेयक में निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं से संबंधित कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग व्यवस्थाओं को मिलने वाली कुछ कर छूटों को बढ़ाने का प्रस्ताव है। यह लाभ 31 मार्च 2041 को समाप्त होने वाले टैक्स वर्ष तक उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है।


मोबाइल फोन से लैपटॉप और सर्वर तक आएंगे “Specified Electronic Goods”

प्रस्तावित बदलाव के तहत “Specified Electronic Goods” की परिभाषा का विस्तार किया गया है। इसमें मोबाइल फोन, लैपटॉप, टैबलेट, सर्वर, संबंधित सब-असेंबली, हियरएबल्स, वियरेबल्स और उनके एक्सेसरीज को शामिल करने का प्रस्ताव है।

इसका उद्देश्य भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन और उससे जुड़ी कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों को बढ़ावा देना है।


सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश पर FII को टैक्स छूट

विधेयक में Foreign Institutional Investors (FII) के लिए सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ पर कर छूट का प्रस्ताव किया गया है।

हालांकि, इस छूट का लाभ निर्धारित रिपोर्टिंग आवश्यकताओं के अधीन होगा।


BIS को भी Government Securities पर प्रस्तावित टैक्स छूट

इसी तरह की कर छूट Bank for International Settlements (BIS) के लिए भी प्रस्तावित की गई है। इसके तहत सरकारी प्रतिभूतियों से प्राप्त ब्याज आय और पूंजीगत लाभ को निर्धारित शर्तों के अधीन कर छूट दी जा सकेगी।


Rough Diamond की बिक्री से होने वाली आय पर नई टैक्स छूट

विधेयक में योग्य विदेशी कंपनियों द्वारा कच्चे हीरों (Rough Diamonds) की बिक्री से होने वाली आय के लिए नई कर छूट का प्रस्ताव किया गया है।

यह सुविधा उन विदेशी कंपनियों के लिए होगी जो डायमंड माइनिंग, ट्रेडिंग, ब्रोकिंग, एग्रीगेशन, टेंडर या ऑक्शन जैसी गतिविधियों में शामिल हैं।


विशेष क्षेत्रों में 2041 तक मिल सकेगी छूट

रफ डायमंड से संबंधित प्रस्तावित कर छूट केवल अधिसूचित विशेष क्षेत्रों में किए जाने वाले निर्धारित लेनदेन पर उपलब्ध होगी।

यह छूट 31 मार्च 2041 तक जारी रखने का प्रस्ताव है।

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इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को भी टैक्स राहत

विधेयक में उन विदेशी कंपनियों के लिए भी कर छूट का प्रस्ताव है जो इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को कस्टम्स बॉन्डेड वेयरहाउस में रखती हैं और बाद में इन कंपोनेंट्स की आपूर्ति निर्दिष्ट इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं का निर्माण करने वाले कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरर्स को करती हैं।

इस प्रावधान का उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग की सप्लाई चेन को मजबूत करना और भारत में उत्पादन गतिविधियों को प्रोत्साहित करना है। प्रस्तावित छूट 31 मार्च 2041 तक उपलब्ध रहेगी।


Finance Act, 2026 में भी संशोधन

विधेयक में Finance Act, 2026 में भी संशोधन प्रस्तावित किया गया है। इसके तहत नई टैक्स व्यवस्था अपनाने वाले कुछ निर्दिष्ट Special Purpose Vehicles (SPVs) पर लागू सरचार्ज को 10 प्रतिशत से बढ़ाकर 25 प्रतिशत करने का प्रस्ताव है।


Business Trust के यूनिट होल्डर्स को Dividend से जुड़ी राहत

विधेयक में कुछ निर्धारित परिस्थितियों में Business Trusts के Unit Holders को डिविडेंड से संबंधित राहत देने का भी प्रस्ताव किया गया है।

इस प्रावधान का उद्देश्य निर्धारित परिस्थितियों में यूनिट होल्डर्स पर पड़ने वाले कर प्रभाव को तर्कसंगत बनाना है।


विधेयक के प्रमुख उद्देश्य

Taxation and Other Laws (Amendment) Bill, 2026 के प्रस्तावित बदलावों को व्यापक रूप से देखें तो इनका उद्देश्य—

  • डिजिटल भुगतान व्यवस्था को अधिक लचीला बनाना;
  • फंड मैनेजमेंट और निवेश गतिविधियों को बढ़ावा देना;
  • इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को प्रोत्साहित करना;
  • इलेक्ट्रॉनिक्स सप्लाई चेन को मजबूत करना;
  • भारत में डायमंड ट्रेडिंग को बढ़ावा देना;
  • सरकारी प्रतिभूतियों में विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करना;
  • कर प्रावधानों में अधिक निश्चितता और स्पष्टता लाना; तथा
  • बिजनेस ट्रस्ट से जुड़े कुछ कर प्रावधानों को सरल बनाना है।

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