वोक्सवैगन कार विवाद: केरल उपभोक्ता आयोग ने डीलर को मुफ्त मरम्मत या कार की कीमत चुकाने का दिया आदेश

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आयोग ने निर्माण दोष साबित न होने पर वोक्सवैगन ग्रुप सेल्स इंडिया को राहत दी

केरल राज्य उपभोक्ता आयोग ने वोक्सवैगन के अधिकृत डीलर और वर्कशॉप को सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का दोषी ठहराते हुए ग्राहक की कार मुफ्त में ठीक करने या उसकी पूरी कीमत लौटाने का आदेश बरकरार रखा। हालांकि, आयोग ने निर्माण दोष साबित न होने पर वोक्सवैगन ग्रुप सेल्स इंडिया को राहत दी।


केरल उपभोक्ता आयोग का महत्वपूर्ण फैसला

केरल राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने एक महत्वपूर्ण फैसले में वोक्सवैगन के अधिकृत डीलर और उसकी वर्कशॉप को सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) का दोषी ठहराते हुए जिला आयोग के आदेश को बरकरार रखा।

आयोग ने निर्देश दिया कि डीलर और वर्कशॉप या तो ग्राहक की कार को बिना किसी शुल्क के पूरी तरह सड़क पर चलने योग्य (Roadworthy Condition) बनाकर वापस करें या फिर वाहन की पूरी कीमत का भुगतान करें।


वोक्सवैगन कंपनी को मिली राहत

आयोग के अध्यक्ष बी. सुधींद्र कुमार तथा सदस्य अजीत कुमार डी और राधाकृष्णन के. आर. की पीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि मामले में वाहन में किसी निर्माण दोष (Manufacturing Defect) का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला।

इसी आधार पर आयोग ने Volkswagen Group Sales India Pvt. Ltd. को राहत प्रदान करते हुए कहा कि कंपनी को निर्माण दोष के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता।


आयोग ने क्या कहा?

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि जिला उपभोक्ता आयोग ने अधिकृत डीलर और वर्कशॉप के खिलाफ सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का निष्कर्ष सही रूप से निकाला था।

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इसलिए जिला आयोग द्वारा वाहन की मुफ्त मरम्मत करने अथवा वाहन की कीमत अदा करने का निर्देश यथावत रखा जाता है।


क्या था पूरा मामला?

शिकायतकर्ता ने 15 सितंबर 2011 को Phoenix Cars India Pvt. Ltd., जो वोक्सवैगन का अधिकृत डीलर है, से एक वोक्सवैगन कार खरीदी थी।

शिकायत के अनुसार, 26 नवंबर 2015 की रात लगभग 10 बजे वह अपने परिवार के साथ एक विवाह समारोह से लौट रहे थे, तभी कार के इंजन से अचानक असामान्य आवाज आने लगी।

स्थिति को देखते हुए उन्होंने तुरंत वाहन सड़क किनारे रोक दिया और इसकी सूचना वोक्सवैगन कंपनी को दी।


टोइंग और भारी मरम्मत खर्च की मांग

अगले दिन कार को वर्कशॉप तक टो करके ले जाया गया, जिसके लिए शिकायतकर्ता ने 6,000 रुपये का भुगतान किया।

शिकायतकर्ता का आरोप था कि बार-बार जानकारी मांगने के बावजूद डीलर ने केवल ई-मेल के माध्यम से लगभग 3.75 लाख रुपये का मरम्मत अनुमान (Estimate) भेज दिया।

हालांकि, यह नहीं बताया गया कि इंजन में खराबी का वास्तविक कारण क्या था।


खराब ईंधन को बताया गया कारण

आयोग ने नोट किया कि डीलर ने इंजन की खराबी का कारण निम्न गुणवत्ता वाले ईंधन (Poor Quality Fuel) को बताया था।

लेकिन डीलर इस दावे को किसी निर्णायक तकनीकी साक्ष्य से साबित नहीं कर सका कि वास्तव में इंजन की खराबी खराब ईंधन के कारण ही हुई थी।


ग्राहक ने लगाया सेवा में कमी का आरोप

वाहन में आई खराबी का स्पष्ट कारण न बताए जाने और भारी मरम्मत राशि की मांग किए जाने के बाद शिकायतकर्ता ने वोक्सवैगन कंपनी तथा उसके अधिकृत डीलर के खिलाफ उपभोक्ता आयोग में शिकायत दायर की।

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शिकायत में सेवा में कमी और अनुचित व्यापारिक व्यवहार का आरोप लगाया गया।


निर्माण दोष साबित नहीं हुआ

हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है जिससे यह साबित हो सके कि वाहन में निर्माण दोष था।

इसी कारण आयोग ने वोक्सवैगन ग्रुप सेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ जिला आयोग द्वारा दिए गए निष्कर्षों में हस्तक्षेप करते हुए कंपनी को राहत प्रदान की, जबकि अधिकृत डीलर और वर्कशॉप के विरुद्ध पारित आदेश को बरकरार रखा।


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