अगर आदेश पसंद नहीं तो इसका यह मतलब नहीं कि वह इलॉजिकल है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के इस सुझाव को खारिज कर दिया कि उसकी याचिका पर किसी अन्य पीठ द्वारा सुनवाई की जानी चाहिए। सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने सोमवार को कहा कि दिए गए प्रत्येक आदेश में कुछ न कुछ ‘तर्क’ (Logic) होता है और महज अपनी पसंद का निर्णय नहीं होने का मतलब यह … Read more

Landlord Tenant Case: मकान का किराया न देना क्राइम है या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया फैसला

Non Payment Of House Rent – किराएदार (Tenant) के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा-403 (बेईमानी से संपत्ति का उपयोग करना) व 415 (धोखा देना) की धाराओं में केस दर्ज हुआ था। वहीं इस मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट Allahabad High Court ने याचिकाकर्ता की अर्जी पर राहत देने से मना किया था और … Read more

दिल्ली उच्च न्यायलय ने निचली अदालत के निर्णय को बरकरार रखा कहा: चेक बाउंस मामले में गंभीर परिणाम भुगतने होंगे-

निचली अदालत (Lower Court) के फैसले को बरकरार रखते हुए चेक बाउंस से जुड़े एक मामले में दिल्ली हाई कोर्ट (Delhi High Court) ने सख्त आदेश दिया है। न्यायमूर्ति रजनीश भटनागर (Hon’ble Justice Rajnish Batnagar) की पीठ ने कहा कि यदि नोटिस जारी करने और अवसर देने के बावजूद भुगतान नहीं किया गया तो गंभीर … Read more

Supreme Court Collegium: देश के छह उच्च न्यायालयों में 14 जज और 6 अतिरिक्त जजों की नियुक्ति-

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सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम Supreme Court Collegium की सिफारिशों में से केंद्र सरकार Government of India ने देश के छह उच्च न्यायालयों में 14 जज और छह अतिरिक्त जजों की नियुक्ति की है. सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम Supreme Court Collegium ने तेलंगाना को सबसे ज्यादा 10 जज मिले हैं जबकि दिल्ली हाईकोर्ट को 2 और इलाहाबाद हाईकोर्ट … Read more

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि: जमानती अपराधों के मामलों में नहीं दी जा सकती है अग्रिम जमानत-

कोर्ट ने कहा कि याची पर गैर-जमानती अपराध करने का आरोप होना चाहिए, जो पहले से मौजूद तथ्यों से उपजा हुआ हो। याचिकाकर्ता के मन में उचित आशंका या विश्वास होना चाहिए कि उसे इस तरह के आरोप के आधार पर गिरफ्तार किया जाएगा। इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने फैसला सुनाया कि जमानती अपराध के मामलों … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा: अदालतों को किसी मामले के सभी मुद्दों पर न्यायिक निर्णय देना चाहिए न कि सिर्फ एक मुद्दे पर-

सर्वोच्च न्यायलय ने मंगलवार एक मामले कि सुनवाई करते हुए निचली अदालतों को आगाह किया कि मामलों का फैसला करने में शॉर्टकट की मानसिकता से बचें। जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ ने कहा कि निचली अदालतो द्वारा कुछ सवाल अनुत्तरित छोड़ने के बदले मुकदमे के हर पहलू पर पूरी तरह विचार … Read more

सुप्रीम कोर्ट: कोर्ट द्वारा आरोपी के बरी होने का ये अर्थ नहीं कि नियोक्ता आप पर अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं कर सकता-

शीर्ष अदालत ने 29 नवंबर, 2017 को कर्नाटक उच्च न्यायलय की कलबुर्गी पीठ के एक फैसले के खिलाफ कर्नाटक सरकार द्वारा अपील को स्वीकार करते हुए यह टिप्पणी की। कर्नाटक उच्च न्यायलय ने बीजापुर जिले के एक ग्राम लेखाकार उमेश की अनिवार्य सेवानिवृत्ति के फैसले को रद्द कर दिया था। उस पर रिश्वत लेने का … Read more

एक गलत आदेश देने मात्रा से न्यायिक अधिकारी पर अनुशासनात्मक कार्यवाही नहीं, केवल संदेह “कदाचार” का गठन नहीं कर सकता : सुप्रीम कोर्ट

राजस्थान उच्च न्यायालय ने घूसखोरी के मामले में एक अभियुक्त को जमानत मंजूर करने के लिए एक न्यायिक अधिकारी (Judicial officer) को नौकरी से बर्खास्त कर दिया था। शीर्ष न्यायालय (Supreme Court) ने अपने फैसले में कहा कि महज संदेह के आधार पर कदाचार स्थापित नहीं किया जा सकता। इसके साथ ही इसने राजस्थान हाई … Read more

काम करने के दौरान तनाव के कारण हुई मौत पर एम्लॉयर को मुआयजा देना ही पड़ेगा: बॉम्बे हाईकोर्ट

Bombay High Court बॉम्बे उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक नियोक्ता (Employer) को एक ट्रक ड्राइवर के परिजनों को Compensation मुआवजा देने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि काम करने के दौरान तनाव के कारण अंततः ट्रक ड्राइवर की मृत्यु हो गई। न्यायमूर्ति एनजे जमादार ने कहा कि मृतक ड्राइवर को पड़े दिल … Read more

महिला के अंडरपैंट पर पुरुष अंग को रगड़ना भी रेप के समान, हाई कोर्ट ने दिया फैसला-

मेघालय हाई कोर्ट (Meghalaya High Court) की बेंच ने कहा कि अंडरपैंट पहनी महिला के प्राइवेट पार्ट के ऊपर पुरुष के अंग की कोई भी हरकत उसे सजा दिलाने के लिए काफी है। खासकर महिला के प्राइवेट पार्ट पर कुछ भी रगड़ना आईपीसी की धारा 375 (बी) के तहत पेनिट्रेशन के समान माना जाएगा। भले … Read more