ट्रेन रूट बदलने पर मुआवजा
हैदराबाद जिला उपभोक्ता आयोग ने ट्रेन का रूट बदलने की सूचना न देने और 16 घंटे की देरी के कारण रेलवे को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए यात्री को ₹35,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।
हैदराबाद उपभोक्ता आयोग ने दक्षिणी रेलवे को सेवा में कमी का दोषी ठहराया
हैदराबाद स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने ट्रेन का मार्ग बदलने की पूर्व सूचना न देने के कारण एक व्यवसायी की महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठक और वापसी की फ्लाइट छूटने के मामले में दक्षिणी रेलवे (Southern Railway) को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराया है। आयोग ने रेलवे को ₹35,000 मुआवजा देने का आदेश दिया।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला व्यवसायी रामकृष्ण टी. द्वारा दायर उपभोक्ता शिकायत से जुड़ा है। उन्होंने चेन्नई से नई दिल्ली जाने के लिए तमिलनाडु सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12621) में प्रीमियम तत्काल योजना के तहत ₹1,428.15 का टिकट बुक कराया था।
उन्हें 30 सितंबर 2024 को नई दिल्ली में एक कंपनी के प्रबंध निदेशक (MD) के साथ महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठक में शामिल होना था।
स्टेशन पहुंचने पर पता चला कि ट्रेन का रूट बदल गया
शिकायतकर्ता के अनुसार, 28 सितंबर 2024 को चेन्नई सेंट्रल स्टेशन पहुंचने पर उन्हें पहली बार पता चला कि ट्रेन का मार्ग बदल दिया गया है। स्टेशन के डिस्प्ले बोर्ड पर “Route Diverted” लिखा था, लेकिन उन्हें इस बदलाव की पहले से कोई सूचना या एसएमएस प्राप्त नहीं हुआ था।
16 घंटे की देरी से मीटिंग और फ्लाइट दोनों छूट गईं
निर्धारित समय के अनुसार ट्रेन को 30 सितंबर की सुबह 6:30 बजे नई दिल्ली पहुंचना था, लेकिन वह उसी दिन रात 10:30 बजे, यानी लगभग 16 घंटे की देरी से पहुंची।
इस कारण शिकायतकर्ता—
- महत्वपूर्ण व्यावसायिक बैठक में शामिल नहीं हो सके।
- उनकी वापसी की फ्लाइट भी छूट गई।
- उन्हें अगले दिन के लिए अधिक कीमत पर नया हवाई टिकट खरीदना पड़ा।
रेलवे ने क्या दलील दी?
दक्षिणी रेलवे ने आयोग के समक्ष कहा कि दक्षिण मध्य रेलवे द्वारा सिग्नल प्रणाली के उन्नयन (Pre-Non Interlocking और Non-Interlocking कार्य) के कारण ट्रेन का मार्ग बदलना आवश्यक हो गया था।
रेलवे की ओर से पेश संभागीय वाणिज्य प्रबंधक ने बताया कि 5 सितंबर 2024 को अधिसूचना जारी कर कई ट्रेनों के मार्ग परिवर्तन की जानकारी दी गई थी और केवल उन यात्रियों को एसएमएस भेजा गया था, जिन्हें विजयवाड़ा, खम्मम, वारंगल, बल्हारशाह और नागपुर जैसे डायवर्जन रूट वाले स्टेशनों से यात्रा करनी थी।
चूंकि शिकायतकर्ता चेन्नई से यात्रा कर रहे थे, इसलिए उन्हें कोई संदेश नहीं भेजा गया।
आयोग ने रेलवे की दलील खारिज की
आयोग ने पाया कि 5 सितंबर की अधिसूचना में स्पष्ट निर्देश था कि प्रभावित ट्रेनों के सभी यात्रियों को एसएमएस के माध्यम से सूचना दी जाए।
आयोग ने कहा कि रेलवे के पास अधिसूचना जारी होने और यात्रा की तारीख के बीच पर्याप्त समय था। इसके बावजूद शिकायतकर्ता को सूचना नहीं देना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी है।
आयोग ने अपने आदेश में कहा—
“यात्री या शिकायतकर्ता को ट्रेन के मार्ग परिवर्तन की जानकारी न देना विपक्षी पक्षों की ओर से सेवा में कमी के अलावा कुछ नहीं है।”
व्यापारिक नुकसान का दावा साबित नहीं हो सका
आयोग ने माना कि शिकायतकर्ता को मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन उसने यह भी कहा कि वह अपने कथित व्यापारिक नुकसान के समर्थन में कोई दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके।
इसलिए आयोग ने व्यापारिक लाभ की हानि का दावा स्वीकार नहीं किया।
रेलवे को ₹35,000 देने का आदेश
आयोग ने दक्षिणी रेलवे को निर्देश दिया कि वह—
- ₹25,000 मुआवजा दे।
- ₹10,000 वाद व्यय (Litigation Cost) अदा करे।
यह राशि 45 दिनों के भीतर भुगतान करनी होगी। यदि निर्धारित समय में भुगतान नहीं किया गया, तो शिकायत दर्ज होने की तारीख से भुगतान तक 6% वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
आयोग का महत्वपूर्ण संदेश
यह फैसला स्पष्ट करता है कि यदि रेलवे को पहले से ट्रेन का मार्ग बदलने या लंबी देरी की जानकारी हो, तो सभी प्रभावित यात्रियों को समय पर सूचना देना उसकी जिम्मेदारी है। ऐसा न करना उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत सेवा में कमी माना जाएगा और यात्री मुआवजे के हकदार हो सकते हैं।
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