सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट का निर्णय पलट दी आरोपी को सजा, कहा कि मृत्यु पूर्व दिया बयान बिना किसी पुष्टि के सजा का आधार बन सकती है-

पीड़िता द्वारा मौत से पहले दिया गया बयान न सिर्फ मामले को सुलझाने में मददगार साबित होता है, बल्कि उस बयान के आधार पर अदालत अपराधी को सजा भी दे सकती है। ऐसे ही एक मामले में, शीर्ष कोर्ट Supreme Court ने इलाहाबाद उच्च न्यायलय Allahabad High Court के एक निर्णय को ख़ारिज कर दिया, … Read more

वर्चुअल मोड़ में उलझा न्याय तंत्र, हाई कोर्ट के अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर की हाइब्रिड मोड़ की मांग-

इलाहाबाद उच्च न्यायालय और खण्डपीठ लखनऊ के दर्जनों अधिवक्ताओं ने मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर हाईब्रिड मोड में सुनवाई व्यवस्था लागू करने की मांग की है। एक तरफ जहां हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के महासचिव के मार्फत मुख्य न्यायाधीश को भेजे गए पत्र में न्याय प्रशासन में व्याप्त कुप्रबंध पर सवाल खड़े किए गए हैं। … Read more

इलाहाबाद हाई कोर्ट: क्या गैर-संज्ञेय अपराधों में मजिस्ट्रेट चार्जशीट का संज्ञान ले सकता है? जानिए विस्तार से-

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने माना है कि Cr.P.C. सीआरपीसी की धारा 2 (डी) के मद्देनजर, जहां गैर-संज्ञेय अपराध शामिल हैं, मजिस्ट्रेट पुलिस द्वारा दायर आरोप पत्र का संज्ञान नहीं ले सकते, इसके बजाय इसे शिकायत के रूप में माना जाना चाहिए। न्यायमूर्ति सैयद आफताफ हुसैन रिजवी ने विमल दुबे और एक अन्य द्वारा Cr.P.C. धारा … Read more

इलाहाबाद हाई कोर्ट: जो व्यक्ति पुलिस जांच से पीड़ित है वह जांच की निगरानी के लिए मजिस्ट्रेट के पास जा सकता है- 

न्यायमूर्ति अंजनी कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक वर्मा की खंडपीठ एक आपराधिक मामले में निष्पक्ष जांच करने के लिए प्रतिवादी अधिकारियों को निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका पर फैसला सुना रही थी। Allahabad High Court इलाहाबाद हाई कोर्ट ने हाल ही में देखा है कि एक मजिस्ट्रेट के पास आपराधिक प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.) … Read more

इलाहाबाद हाईकोर्ट: संस्कृत के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार क्यों, अधिकारी मनमानी नहीं कर सकते-

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में संस्कृत भाषा और स्कूलों में संस्कृत अध्यापकों की भर्ती को लेकर बड़ी टिप्पणी की है। हाईकोर्ट ने कहा, ‘राज्य सरकार भारतीय सभ्यता की सबसे पुरानी भाषा संस्कृत के साथ सौतेली मां जैसा व्यवहार नहीं कर सकती।  कल्याणकारी राज्य जिस पर भाषा के संरक्षण का दायित्व है, … Read more

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व उपाध्यक्ष की रहस्य बनी गुमशुदगी, CCTV में भी नहीं दिखे; बेड पर बंद पड़ा मिला मोबाइल-

इलाहाबाद हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंगला प्रसाद तिवारी (60) छोटा बघाड़ा से संदिग्ध परिस्थितियों में अभी तक लापता हैं। परिजनों ने उनकी तलाश आस-पास सहित रिश्तेदारों के यहां की। मगर उनका कहीं कोई पता नहीं चल सका। आखिरकार थक-हारकर परिजनों ने कर्नलगंज थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई हैे। पड़ोसियों ने … Read more

इलाहाबाद हाईकोर्ट का निचली अदालतों को यह निर्देश कि – जमानत आदेशों में आवेदकों के आपराधिक इतिहास का पूरा विवरण दिया जाये

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Allahabad High Court इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सोमवार को निचली अदालतों को निर्देश दिया कि वे आवेदकों/अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, यदि कोई हो, का पूरा विवरण दें या यदि कोई आपराधिक इतिहास नहीं है तो इस तथ्य को रिकॉर्ड करें कि आवेदक/अपराधी का कोई नहीं आपराधिक इतिहास नहीं है। जस्टिस समित गोपाल की खंडपीठ ने … Read more

सुप्रीम कोर्ट : एक ही घटना के संबंध में एक ही आरोपी के खिलाफ एक ही पक्ष द्वारा कई शिकायतें अस्वीकार्य-

सर्वोच्च अदालत

Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि एक ही घटना के संबंध में एक ही आरोपी के खिलाफ एक ही पक्ष द्वारा कई शिकायतें अस्वीकार्य हैं। एक ही घटना के संबंध में एक ही पक्ष द्वारा कई शिकायतों की अनुमति देना, चाहे वह संज्ञेय हो या निजी शिकायत अपराध हो, आरोपी को कई आपराधिक … Read more

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तीन मौजूदा न्यायाधीश मंगलवार को COVID-19 Positive, गये होम आइसोलेशन में-

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Allahabad High Court इलाहाबाद उच्च न्यायालय के तीन मौजूदा न्यायाधीशों ने मंगलवार को COVID-19 के लिए सकारात्मक परीक्षण किया। सूत्रों के मुताबिक तीनों जजों ने अपने-अपने घरों में खुद को सेल्फ आइसोलेशन में रखा है। पूरे उत्तर प्रदेश में बढ़ते कोविड -19 मामलों को देखते हुए, इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 3 जनवरी, 2022 से मामलों … Read more

इलाहाबाद उच्च न्यायलय: बार अपने सदस्य के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें न्यायालयों के कामकाज में बाधा डालने का अधिकार नहीं है-

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक की पेंशन में 10% कटौती को रद्द किया, कहा – "यह कदाचार नहीं है"

कोर्ट ने आगे कहा, “बार के सदस्य किसी भी सदस्य या किसी अन्य के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए बैठक करने के लिए स्वतंत्र हैं, लेकिन उन्हें न्यायालयों के कामकाज में बाधा डालने का अधिकार नहीं है। इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने हाल ही में कहा कि बार के सदस्य किसी भी सदस्य या … Read more