डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: RBI को 4 हफ्ते में SOP बनाने का आदेश, साइबर ठगी रोकने के लिए देशभर में नए निर्देश

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सुप्रीम कोर्ट ने डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर RBI को चार सप्ताह में म्यूल अकाउंट्स पर SOP बनाने का निर्देश दिया। राज्यों को साइबर फ्रॉड शिकायत निवारण प्रणाली लागू करने, e-Zero FIR अपनाने और जागरूकता अभियान चलाने का आदेश दिया।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, RBI को 4 हफ्ते में SOP बनाने का आदेश

डिजिटल अरेस्ट (Digital Arrest) और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, राज्यों और बैंकों को कई अहम निर्देश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को म्यूल अकाउंट्स (Mule Accounts) से निपटने के लिए चार सप्ताह के भीतर स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) तैयार करने का निर्देश दिया।

अदालत ने यह आदेश केंद्रीय गृह मंत्रालय के इंडियन साइबर क्राइम कोऑर्डिनेशन सेंटर (I4C) द्वारा दायर स्टेटस रिपोर्ट पर विचार करने के बाद पारित किया।

साइबर फ्रॉड शिकायत प्रणाली जल्द लागू करने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गृह मंत्रालय की 2 जनवरी की SOP के तहत विकसित Grievance Redressal Module और Money Restoration Module को जल्द से जल्द पूरी तरह लागू करने का निर्देश दिया।

ये दोनों मॉड्यूल National Cyber Crime Reporting Portal और Cyber RMS के माध्यम से साइबर ठगी के पीड़ितों की शिकायतों के त्वरित निस्तारण और ठगी गई राशि वापस दिलाने के लिए बनाए गए हैं।


डिजिटल अरेस्ट स्कैम पर जागरूकता अभियान चलाने का आदेश

पीठ ने राज्यों को निर्देश दिया कि वे डिजिटल अरेस्ट स्कैम, साइबर धोखाधड़ी और उपलब्ध शिकायत एवं राहत तंत्र के बारे में व्यापक जन-जागरूकता अभियान चलाएं ताकि लोग समय रहते सतर्क हो सकें।


हाई कोर्टों को भी भेजी जाएगी SOP

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित SOP की प्रति देश के सभी हाई कोर्टों के रजिस्ट्रार जनरल को उपलब्ध कराई जाए।

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रजिस्ट्रार जनरल को यह भी कहा गया कि वे बैंक खातों को फ्रीज किए जाने से जुड़े मामलों की सुनवाई कर रहे न्यायालयों और प्राधिकरणों को इन शिकायत निवारण व्यवस्थाओं की जानकारी दें, ताकि प्रभावित लोग पहले इन वैकल्पिक उपायों का लाभ उठा सकें। हालांकि, इससे उनके वैधानिक या संवैधानिक अधिकार प्रभावित नहीं होंगे।


चार सप्ताह में राज्य साइबर क्राइम समन्वय केंद्र स्थापित करने का निर्देश

जिन राज्यों ने अब तक State Cyber Crime Coordination Centre अधिसूचित नहीं किए हैं, उन्हें चार सप्ताह के भीतर ऐसा करने का निर्देश दिया गया है।

साथ ही, राज्यों को Indian Cyber Crime Coordination Centre (I4C) से परामर्श लेकर e-Zero FIR प्रणाली भी लागू करने के लिए कहा गया है।


बैंक खाते फ्रीज होने के मामलों का जल्द निपटारा करें

सुप्रीम कोर्ट ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के कारण फ्रीज किए गए बैंक खातों से जुड़े मामलों का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित किया जाए, ताकि निर्दोष खाताधारकों को अनावश्यक परेशानी न हो।


बैंक और टेक कंपनियों से तकनीकी समाधान विकसित करने को कहा

अदालत ने अंतर-विभागीय समिति (Inter-Departmental Committee) को निर्देश दिया कि वह बैंकों और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के साथ मिलकर ऐसे तकनीकी उपाय विकसित करे, जिनसे—

  • डिजिटल अरेस्ट स्कैम को रोका जा सके,
  • ठगी गई रकम की शीघ्र रिकवरी हो,
  • जांच एजेंसियों को प्रभावी सहयोग मिले,
  • और सभी संस्थाएं कानूनी दायित्वों का पालन करें।

ऑडियो-वीडियो कॉल पर समय आधारित प्रतिबंध लगाने के प्रस्ताव पर विचार

सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY), दूरसंचार विभाग (DoT) और I4C को सोशल मीडिया एवं अन्य डिजिटल इंटरमीडियरी के साथ मिलकर इस प्रस्ताव की भी जांच करने को कहा कि क्या ऑडियो और वीडियो कॉल सेवाओं पर समय आधारित प्रतिबंध (Time-based Restrictions) लागू किए जा सकते हैं, ताकि साइबर ठगी की घटनाओं पर अंकुश लगाया जा सके।

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16 सितंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर तय की है।

अदालत ने तब तक एक समेकित (Consolidated) स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें—

  • राज्यवार और बैंकवार दर्ज एवं निस्तारित शिकायतों का विवरण,
  • जारी और पूर्ण किए गए Money Restoration Orders,
  • तथा पीड़ितों को वापस दिलाई गई धनराशि का पूरा ब्यौरा शामिल होगा।

डिजिटल अरेस्ट स्कैम क्या है?

डिजिटल अरेस्ट स्कैम में ठग खुद को पुलिस, CBI, ED, RBI, कोर्ट या अन्य सरकारी एजेंसियों का अधिकारी बताकर लोगों को डराते हैं। वे दावा करते हैं कि पीड़ित किसी अपराध में शामिल है और उसे “डिजिटल अरेस्ट” किया जा रहा है। इसके बाद गिरफ्तारी या कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर बड़ी रकम वसूल ली जाती है। ऐसे मामलों में वरिष्ठ नागरिक अक्सर सबसे अधिक निशाना बनते हैं।


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