बांग्लादेश हाई कोर्ट ने हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को चार में से दो आपराधिक मामलों में जमानत दे दी है। अदालत ने शेष दो मामलों की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 16 अगस्त की तारीख तय की है।
ढाका। बांग्लादेश हाई कोर्ट ने रविवार को हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास को उनके खिलाफ दर्ज चार आपराधिक मामलों में से दो मामलों में जमानत दे दी। उनके वकील अपूर्व कुमार भट्टाचार्य ने इस फैसले की पुष्टि करते हुए बताया कि अदालत ने शेष दो मामलों में दायर जमानत याचिकाओं पर सुनवाई के लिए 16 अगस्त की तारीख निर्धारित की है।
जस्टिस के.एम. जाहिद सरवर और जस्टिस शेख अबू ताहेर की खंडपीठ ने यह आदेश पारित किया।
किन मामलों में मिली जमानत?
चिन्मय कृष्ण दास को जिन दो मामलों में जमानत मिली है, उनमें हत्या के प्रयास, तोड़फोड़, सरकारी कार्य में बाधा डालने और अन्य संबंधित आरोप शामिल हैं। हालांकि उनके खिलाफ दर्ज दो अन्य मामलों में राहत पर फैसला अभी बाकी है।
नवंबर 2024 में हुई थी गिरफ्तारी
पूर्व इस्कॉन (ISKCON) नेता और बांग्लादेश सम्मिलित सनातनी जागरण जोट के प्रवक्ता रहे चिन्मय कृष्ण दास को 25 नवंबर 2024 को ढाका हवाई अड्डे से गिरफ्तार किया गया था। उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करने का आरोप लगाया गया था।
गिरफ्तारी के बाद 27 नवंबर 2024 को चट्टोग्राम कोर्ट परिसर के बाहर उनके समर्थकों और कानून-व्यवस्था बलों के बीच हिंसक झड़पें हुई थीं, जिसके बाद उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए।
हिंदू समुदाय के अधिकारों की उठाते रहे हैं आवाज
चिन्मय कृष्ण दास बांग्लादेश में हिंदू (सनातनी) समुदाय के अधिकारों के प्रमुख समर्थकों में रहे हैं। उन्होंने अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाने, अल्पसंख्यकों पर अत्याचार के मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायाधिकरण गठित करने तथा अल्पसंख्यक मामलों के लिए अलग मंत्रालय स्थापित करने की मांग उठाई है।
उनकी गिरफ्तारी के बाद से बांग्लादेश का हिंदू समुदाय लगातार उनकी बिना शर्त रिहाई की मांग करता रहा है। अब हाई कोर्ट से दो मामलों में जमानत मिलने के बाद उनकी कानूनी लड़ाई में महत्वपूर्ण राहत मिली है, जबकि शेष मामलों पर अदालत का फैसला आना अभी बाकी है।
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