बिना अनुमति किसान की 48,450 किलो गाजर बेचने पर कोल्ड स्टोरेज पर ₹31.54 लाख का जुर्माना, मध्य प्रदेश उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला

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किसान की अनुमति के बिना 48,450 किलो गाजर बेचकर कोल्ड स्टोरेज ने उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन किया

मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता आयोग ने एक कोल्ड स्टोरेज को सेवा में कमी का दोषी ठहराते हुए किसान को ₹31.54 लाख देने का आदेश दिया। आयोग ने माना कि किसान की अनुमति के बिना 48,450 किलो गाजर बेचकर कोल्ड स्टोरेज ने उपभोक्ता अधिकारों का उल्लंघन किया।

मध्य प्रदेश राज्य उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग (State Consumer Disputes Redressal Commission) ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कोल्ड स्टोरेज संचालक को सेवा में कमी (Deficiency in Service) का दोषी ठहराते हुए एक किसान को ₹31.54 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया है। आयोग ने माना कि कोल्ड स्टोरेज ने किसान की सहमति के बिना उसकी 48,450 किलोग्राम गाजर बेच दी और उससे प्राप्त राशि का लाभ स्वयं उठा लिया।

यह आदेश आयोग की अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुनीता यादव और सदस्य मोनिका मलिक की पीठ ने 25 जून 2026 को पारित किया।

किसान ने लगाए थे गंभीर आरोप

शिकायतकर्ता किसान ने आयोग को बताया कि उसने वर्ष 2018 में अपनी 1,033 बोरियों में रखी 77,250 किलोग्राम गाजर तथा 450 बोरियों में 42,379 किलोग्राम चुकंदर को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज में जमा कराया था। इन फसलों का कुल मूल्य लगभग ₹40.19 लाख था।

करीब छह महीने बाद जब वह अपनी उपज लेने पहुंचा तो उसे बताया गया कि सब्जियां खराब हो गई थीं। बाद में उसे पता चला कि कोल्ड स्टोरेज ने उसकी जानकारी और अनुमति के बिना फसल बेच दी थी।

किसान ने आरोप लगाया कि इससे उसे भारी आर्थिक नुकसान हुआ और परिवार को मानसिक व आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा।

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लीगल नोटिस के जवाब में बिक्री स्वीकार

रिकॉर्ड के अनुसार किसान ने 5 नवंबर 2018 को कोल्ड स्टोरेज को कानूनी नोटिस भेजा था। आयोग के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि नोटिस के जवाब में कोल्ड स्टोरेज ने स्वयं स्वीकार किया था कि उसने किसान की फसल बेच दी थी।

इसके बाद किसान ने उपभोक्ता आयोग में लगभग ₹90.19 लाख के मुआवजे की मांग करते हुए उपभोक्ता शिकायत दायर की।

कोल्ड स्टोरेज का बचाव

कोल्ड स्टोरेज की ओर से कहा गया कि जब किसान फसल लेकर आया था तब तक वह गर्मी के कारण पहले ही खराब हो चुकी थी। संचालक का दावा था कि किसान को तत्काल बिक्री की सलाह दी गई थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया।

यह भी तर्क दिया गया कि बाद में किसान के कहने पर ही शेष सब्जियां बेची गईं और किसान स्वयं कृषि उत्पादों के व्यापार का कार्य करता था।

आयोग ने दलीलें खारिज कीं

आयोग ने कोल्ड स्टोरेज की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। आयोग ने कहा कि:

  • यह साबित करने के लिए कोई दस्तावेज या रिकॉर्ड प्रस्तुत नहीं किया गया कि फसल जमा करते समय ही खराब थी।
  • किसान की सहमति से सब्जियां बेची गईं, इसका भी कोई विश्वसनीय प्रमाण नहीं दिया गया।
  • यदि उपज पहले से खराब थी तो कोल्ड स्टोरेज ने उसे स्वीकार क्यों किया और रसीदों में इसका उल्लेख क्यों नहीं किया गया।

आयोग ने स्पष्ट किया कि किसान अपनी उपज को मौसम और खराब होने से बचाने के लिए ही कोल्ड स्टोरेज में रखता है। ऐसे में सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित करना सेवा प्रदाता की जिम्मेदारी है।

48,450 किलो गाजर का मूल्य दिलाने का आदेश

आयोग ने रिकॉर्ड का परीक्षण करते हुए पाया कि किसान ने कुल 1,033 बैग गाजर जमा कराई थी, जिनमें से उसे केवल 387 बैग वापस मिले।

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शेष 646 बैग, जिनका कुल वजन 48,450 किलोग्राम था, कोल्ड स्टोरेज ने बेच दिए थे।

इसी आधार पर आयोग ने आदेश दिया कि कोल्ड स्टोरेज:

  • 48,450 किलोग्राम गाजर की कीमत के रूप में ₹29,07,000 अदा करे।
  • गाजर के भंडारण के लिए वसूला गया ₹2,32,425 किराया वापस करे।
  • ₹15,000 मानसिक पीड़ा एवं वाद व्यय के रूप में भी भुगतान करे।

इस प्रकार किसान को कुल ₹31,54,425 का भुगतान दो महीने के भीतर करने का निर्देश दिया गया।

आयोग की महत्वपूर्ण टिप्पणी

आयोग ने कहा कि किसान अपनी उपज को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की सेवाएं लेता है। यदि सेवा प्रदाता उचित तापमान और भंडारण व्यवस्था बनाए रखने में विफल रहता है या बिना अनुमति उपज बेच देता है, तो यह स्पष्ट रूप से “सेवा में कमी” (Deficiency in Service) है और उपभोक्ता संरक्षण कानून के तहत उसके लिए उत्तरदायी ठहराया जाएगा।


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