Sambhal School Case: इस्लामिक प्रार्थना और मुस्लिम पोशाक के आरोप में निलंबित शिक्षक को Allahabad HC से राहत, जांच 15 दिन में पूरी करने का आदेश

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Allahabad High Court ने संभल के सरकारी स्कूल में छात्रों से कथित इस्लामिक प्रार्थना और मुस्लिम पोशाक पहनाने के मामले में निलंबित शिक्षक Mohd. Anzar Ahmad को राहत दी। Court ने जांच पूरी होने तक suspension पर रोक लगाई और 15 दिन में departmental inquiry पूरी करने का निर्देश दिया।

Sambhal School Case में निलंबित शिक्षक को हाईकोर्ट से राहत

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने संभल के एक सरकारी स्कूल में छात्रों से कथित तौर पर इस्लामिक प्रार्थना कराने और मुस्लिम समुदाय से जुड़ी पोशाक पहनाने के आरोप में निलंबित शिक्षक Mohd. Anzar Ahmad को अंतरिम राहत दी है।

Justice Manju Rani Chauhan ने Mohd. Anzar Ahmad v. Principal Secretary, Basic Education and 4 Others मामले में 7 सितंबर को आदेश देते हुए शिक्षक के suspension पर departmental inquiry पूरी होने तक रोक लगा दी।

साथ ही Court ने संबंधित विभाग को निर्देश दिया कि departmental inquiry को यथासंभव शीघ्र और अधिकतम 15 दिनों के भीतर पूरा किया जाए।

क्या है संभल के सरकारी स्कूल का पूरा मामला?

मामला संभल के एक सरकारी स्कूल में सुबह की prayer assembly से जुड़ा है।

शिक्षक के खिलाफ आरोप है कि स्कूल में छात्रों से प्रसिद्ध शायर अल्लामा इकबाल की नज्म “लब पे आती है दुआ” पढ़वाई गई।

इसके अलावा आरोप लगाया गया कि कुछ छात्रों को मुस्लिम समुदाय से संबंधित पोशाक पहनाई गई। आरोपों के मुताबिक, छात्राओं को हिजाब और छात्रों को टोपी पहनाई गई।

इन घटनाओं को लेकर मई में जांच के आदेश दिए गए थे। मामले में स्कूल के कई अधिकारियों के खिलाफ disciplinary action लिया गया और प्रभारी प्रधानाध्यापक Mohd. Anzar Ahmad को भी suspend किया गया।

शिक्षक ने कहा—घटना के समय Medical Leave पर था

अपने suspension को चुनौती देते हुए Mohd. Anzar Ahmad ने High Court के समक्ष कहा कि कथित घटना के समय वह sanctioned medical leave पर थे।

उनकी ओर से यह भी दलील दी गई कि लगाए गए आरोप ऐसे नहीं हैं जिनके आधार पर उनके खिलाफ major punishment की कार्रवाई की जा सके।

दूसरी ओर, State Government ने Court को बताया कि शिक्षक को charge-sheet जारी की जा चुकी है।

राज्य की ओर से दावा किया गया कि कथित घटना के समय petitioner स्कूल में मौजूद थे और छात्रों को एक विशेष समुदाय से जुड़ी पोशाक में देखा गया था।

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हालांकि petitioner के counsel ने इस दावे से इनकार किया और दोहराया कि घटना के समय शिक्षक medical leave पर थे।

Allahabad HC ने कहा—इस स्तर पर आरोपों की merits जांचना उचित नहीं

High Court ने कहा कि वर्तमान stage पर petitioner के खिलाफ लगाए गए आरोपों की merits में जाना उचित नहीं होगा।

Court ने स्पष्ट किया कि Mohd. Anzar Ahmad अपनी medical leave और उससे संबंधित documents को departmental inquiry के दौरान अपने defence में पेश कर सकते हैं।

अदालत ने माना कि departmental proceedings में petitioner को अपने बचाव का पूरा अवसर मिलेगा और वह उपलब्ध documentary तथा अन्य evidence के आधार पर अपनी innocence establish कर सकते हैं।

Suspension पर inquiry पूरी होने तक रोक

High Court ने शिक्षक के suspension order के operation पर departmental inquiry पूरी होने तक stay लगा दिया।

हालांकि Court ने यह भी स्पष्ट किया कि suspension पर लगाई गई रोक departmental inquiry के final outcome के अधीन रहेगी।

इसका अर्थ है कि Court ने इस stage पर शिक्षक को आरोपों से exonerate नहीं किया है। अंतिम परिणाम departmental inquiry में सामने आने वाले evidence और findings पर निर्भर करेगा।

Court ने संबंधित authority को inquiry को तेजी से पूरा करने का निर्देश देते हुए 15 दिन की अधिकतम समयसीमा निर्धारित की।

दोनों पक्षों की ओर से ये वकील हुए पेश

Petitioner Mohd. Anzar Ahmad की ओर से Advocates Bhavesh Singh Jadon, Mohammad Naushad Siddiqui और Syed Iqbal Ahmad ने arguments रखे।

वहीं, Basic Education Officer, Sambhal की ओर से Advocate Nagendra Kumar Pandey ने राज्य/विभाग का पक्ष रखा।

संभल हिंसा की न्यायिक जांच रिपोर्ट का भी संदर्भ

संभल से संबंधित एक अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रम नवंबर 2024 की हिंसा को लेकर गठित Judicial Commission की रिपोर्ट से जुड़ा है।

रिपोर्ट में आयोग ने कथित तौर पर कहा है कि नवंबर 2024 की हिंसा अचानक नहीं हुई थी बल्कि pre-planned थी

आयोग ने जिला प्रशासन और पुलिस को कथित रूप से clean chit देते हुए कुछ राजनीतिक नेताओं और Jama Masjid management committee से जुड़े पदाधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।

करीब 400 पन्नों की रिपोर्ट पिछले वर्ष अगस्त में राज्य सरकार को सौंपी गई थी और बाद में इसे उत्तर प्रदेश विधानसभा में पेश किया गया।

हालांकि यह रिपोर्ट Mohd. Anzar Ahmad के suspension case से अलग मामला है और दोनों घटनाओं को एक ही proceeding के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

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हाईकोर्ट के आदेश का कानूनी महत्व

इस आदेश में High Court ने मुख्य रूप से यह सिद्धांत दोहराया कि disciplinary proceedings के प्रारंभिक stage पर Court को आरोपों की factual merits का विस्तृत मूल्यांकन करने से बचना चाहिए, विशेषकर जब विभागीय जांच अभी जारी हो।

वर्तमान मामले में Court ने petitioner को अपनी medical leave और अन्य documentary evidence के आधार पर defence प्रस्तुत करने का अवसर दिया है।

साथ ही inquiry को अनिश्चितकाल तक लंबित रखने के बजाय उसे 15 दिनों के भीतर पूरा करने का निर्देश देकर disciplinary process और employee के अधिकारों के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया गया है।

फैसला एक नजर में

Case: Mohd. Anzar Ahmad v. Principal Secretary, Basic Education and 4 Others
Court: Allahabad High Court
Judge: Justice Manju Rani Chauhan
Order Date: 7 September 2026
Issue: Sambhal government school में alleged Islamic prayer और Muslim attire को लेकर teacher का suspension
Relief: Suspension पर departmental inquiry पूरी होने तक रोक
Direction: Inquiry अधिकतम 15 दिनों में पूरी करने का निर्देश
Important Qualification: Stay departmental inquiry के final outcome के अधीन रहेगा।

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यहां संभल हिंसा की Judicial Commission Report को अलग घटनाक्रम के रूप में रखा गया है, ताकि शिक्षक के मामले और 2024 की हिंसा की रिपोर्ट के बीच तथ्यात्मक संबंध का अनावश्यक संकेत न जाए।

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