सुप्रीम कोर्ट ने सुधार की संभावना का हवाला देते हुए POCSO दोषी की मौत की सजा को उम्रकैद में दिया बदल-

Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को एक नाबालिग लड़की से बलात्कार और हत्या के मामले में अनुसूचित जनजाति समुदाय के एक दोषी की मौत की सजा Death sentence को उम्रकैद Life Imprisonment में बदल दिया।  These Appeals are preferred against the judgment of the High Court of Madhya Pradesh by which the conviction and … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि उच्च न्यायालयों को Article 226 रिट पेटिशन का निपटारा करते समय चुनौती देने के आधार पर अपना दिमाग लगाना चाहिए-

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 13 .01.2022 को उड़ीसा हाईकोर्ट Orissa High Court के आदेश का विरोध करने वाली एक विशेष अनुमति याचिका Special leave Petition पर विचार करते हुए कहा कि, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 Article 226 of Indian Constitution के तहत दायर याचिका Petition पर विचार करते हुए हाईकोर्ट को याचिका में दी … Read more

सुप्रीम कोर्ट: बीमा करने के बाद हेल्‍थ इंश्योरेंस क्‍लेम खारिज नहीं कर पाएगी बीमा कंपनी, जानें क्या है पूरा मामला-

हेल्‍थ इंश्‍योरेंस पॉलिसी (Health Insurance Policy) देकर किसी बहाने से क्लेम रिजेक्ट (Claim Reject) करना, अब ऐसा नहीं चलेगा. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने इस मामले पर एक महत्वपूर्ण फैसला दिया है. इससे हेल्‍थ इंश्योरेंस क्‍लेम (health insurance claim) को दावे को लेकर लोगों की परेशानी घटेगी. Supreme Court उच्चतम न्यायालय ने कहा है कि … Read more

सुप्रीम कोर्ट पंहुचा शवों के अंतिम संस्कार का मामला, जानिए क्‍या है इस धर्म में शवों के अंतिम संस्‍कार का तरीका?

अंतिम संस्‍कार के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट में लगी याचिका  केंद्र सरकार ने तरीके पर रोक लगाने की मांग  पारसी धर्म में शव का खास तरीके से होता है अंतिम संस्‍कार हर धर्म-संप्रदाय में शादी-ब्‍याह से लेकर अंतिम संस्‍कार तक के अपने तरीके और रस्‍मो-रिवाज होते हैं. जैसे हिंदू और सिख धर्म के अनुयायी शव … Read more

सुप्रीम कोर्ट: संविधान पीठ का महत्वपूर्ण निर्णय, अग्रिम जमानत में तय समयसीमा जरूरी नहीं-

जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस इंदिरा बनर्जी, जस्टिस विनीत सरन, जस्टिस एम आर शाह और जस्टिस एस रविंद्र भट की संविधान पीठ ने कहा कि अग्रिम जमानत सामान्य तौर पर तब तक समाप्त नहीं किए जाने की जरूरत है जब तक अदालत द्वारा उसे समन किया जाए या आरोप तय किए जाएं. हालांकि यह अदालत पर निर्भर है … Read more

शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायलय के निर्णय को ठहराया सही, केंद्र और राज्य सरकार का बचा करीब तीन हजार करोड़ राजस्व-

सर्वोच्च अदालत द्वारा पटना उच्च न्यायलय के उस निर्णय पर अपनी मुहर लगा दी है, जिससे केंद्र व राज्य सरकार को तकरीबन तीन हज़ार करोड़ रुपए से अधिक की राजस्व की बचत हुई है। विगत 4 जनवरी, 2022 को शीर्ष अदालत ने पटना उच्च न्यायलय द्वारा 22 अप्रैल, 2019 को सुनाए गए एक अहम निर्णय … Read more

वकीलों पर छापेमारी: सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या लोग वकीलों के पास नहीं जा सकते? और वर्दीधारी व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर मुहर लगा देंगे?

सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों को उनके कानूनी अधिकारों का प्रयोग करने से रोकने और स्थानीय अदालत के अधिकार क्षेत्र के अभियुक्त को बाहर ले जाने की हालिया प्रवृत्ति की निंदा की। “वकीलों पर छापेमारी की यह नई प्रवृत्ति वास्तव में क्या है? और आरोपियों को अदालत के अधिकार क्षेत्र से बाहर ले जाना?” AIADMK के … Read more

आपराधिक मामलों के संदर्भ में सर्वाधिक प्रचलित शब्द ज़मानत Bail है, जानिए क्या है “जमानत” का कानून!

आपराधिक मामलों के संदर्भ में सर्वाधिक प्रचलित शब्द ज़मानत होता है। जब भी कोई व्यक्ति किसी प्रकरण में अभियुक्त बनाया जाता है और अन्वेषण (Investigation), जांच (Inquiry) और विचारण (Trial) के लंबित रहते हुए उस व्यक्ति को कारावास में रखा जाता है तब ज़मानत शब्द, उस अभियुक्त के लिए सबसे अधिक उपयोग में लाया जाता … Read more

NI Act Sec 138 उन मामलों में भी लागू होती है जहां चेक आहरण के बाद और प्रस्तुति से पहले ऋण लिया जाता है – सुप्रीम कोर्ट

धारा 142 के साथ धारा 138 NI Act के तहत आपराधिक मामले में Supreme Court ने कहा कि 'शादी का झूठा वादा करके बलात्कार नहीं किया जा सकता'

केवल चेक को एक प्रतिभूति के रूप में लेबल करने मात्र से कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण या देयता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए एक इंस्ट्रूमेंट के रूप में इसके चरित्र को खत्म नहीं किया जाएगा।” सुप्रीम कोर्ट ने पाया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (Negotiable Instrument Act) एक्ट की धारा 138 … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने परिसीमा अवधि बढ़ाने के दिए आदेश; 15.03.2020 से 28.02.2022 तक की अवधि को परिसीमा से रखा गया है बाहर, विस्तार से जाने-

भारत के मुख्य न्यायाधीश एनवी रमाना, न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति सूर्य कांत की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट एडवोकेट्स-ऑन-रिकॉर्ड एसोसिएशन (एससीएओआरए) द्वारा दायर एक आवेदन के तहत स्वत: संज्ञान मामले में परिसीमा अवधि बढ़ाने के अनुरोध को स्वीकार किया। देश के सर्वोच्च न्यायलय ने COVID-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए न्यायालयों और न्यायाधिकरणों … Read more