दिल्ली हाई कोर्ट ने डाबर के कई उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने संबंधी FSSAI के आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी। कोर्ट ने कहा कि कंपनी को सुनवाई का अवसर दिए बिना ऐसा आदेश प्रथम दृष्टया उचित नहीं लगता।
FSSAI के आदेश पर दिल्ली हाई कोर्ट की रोक
दिल्ली हाई कोर्ट ने भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के 3 अगस्त 2026 के उस आदेश के संचालन पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें एफएमसीजी कंपनी डाबर इंडिया लिमिटेड को “100% Pure”, “100% Natural”, “100% Purity Guaranteed” और “100% Organic” जैसे दावों वाले कई खाद्य उत्पादों की बिक्री तत्काल बंद करने का निर्देश दिया गया था।
बिना सुनवाई आदेश पारित करना प्रथम दृष्टया उचित नहीं
जस्टिस अमित महाजन ने डाबर की रिट याचिका पर नोटिस जारी करते हुए अगली सुनवाई तक FSSAI के आदेश पर रोक लगा दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया कहा कि इस प्रकृति का आदेश संबंधित पक्ष को सुनवाई का अवसर दिए बिना पारित नहीं किया जाना चाहिए था।
साथ ही, अदालत ने प्रतिवादियों को याचिका पर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश भी दिया।
डाबर ने आदेश को दी चुनौती
डाबर ने अपनी याचिका में 3 अगस्त के उस प्रतिबंधात्मक आदेश को चुनौती दी है, जिसके तहत कंपनी को सूचीबद्ध उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का निर्देश दिया गया था।
कंपनी का कहना है कि वह कई दशकों से इन्हीं लेबलों के साथ अपने उत्पादों का विपणन कर रही है। डाबर ने यह भी तर्क दिया कि संबंधित नामित अधिकारी (Designated Officer) के पास इस प्रकार का प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने का वैधानिक अधिकार नहीं था।
प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के उल्लंघन का आरोप
डाबर ने अदालत में कहा कि आदेश जारी करने से पहले न तो कोई कारण बताओ नोटिस (Show Cause Notice) दिया गया और न ही कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर मिला। कंपनी का कहना है कि यह प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है।
डाबर ने यह भी दलील दी कि यदि किसी आपात स्थिति में भी प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया जाए, तब भी प्रभावित पक्ष को पूर्व सूचना देना आवश्यक होता है। जबकि वर्तमान मामला किसी आपातकालीन परिस्थिति का नहीं था।
“100%” शब्द के आधार पर कार्रवाई का आरोप
डाबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने अदालत में कहा कि नियामक ने केवल उत्पादों पर “100%” शब्द लिखे होने के आधार पर बिक्री पर रोक लगा दी। उन्होंने कहा कि कंपनी को न कोई कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही सुनवाई का अवसर उपलब्ध कराया गया।
केंद्र सरकार ने किया याचिका का विरोध
केंद्र सरकार की ओर से पेश केंद्रीय सरकारी स्थायी अधिवक्ता आशीष दीक्षित ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि डाबर को पहले ही एक “इम्प्रूवमेंट नोटिस” जारी किया जा चुका था।
उन्होंने यह भी बताया कि “100%” दावे वाले रियल फ्रूट जूस उत्पादों से संबंधित डाबर की एक अन्य रिट याचिका पहले से हाई कोर्ट में लंबित है, जिसमें अदालत ने कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। उन्होंने यह भी कहा कि इसी प्रकार की कार्रवाई अन्य कंपनियों और उत्पादों के संबंध में भी शुरू की गई है।
डाबर ने बताया दोनों मामले अलग
डाबर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता संदीप सेठी ने स्पष्ट किया कि पहले जारी किया गया इम्प्रूवमेंट नोटिस केवल रियल फ्रूट जूस उत्पादों से संबंधित था, जबकि वर्तमान विवाद अन्य खाद्य उत्पादों पर लागू प्रतिबंधात्मक आदेश से जुड़ा है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या नामित अधिकारी के पास सीधे बिक्री पर रोक लगाने का वैधानिक अधिकार है।
दशकों से एक ही लेबल के साथ बिक रहे हैं उत्पाद
सुनवाई के दौरान अदालत ने भी इस तथ्य पर ध्यान दिया कि डाबर कई वर्षों से इन्हीं लेबलों के साथ अपने उत्पाद बेच रही है। अदालत ने माना कि कंपनी ने प्रथम दृष्टया अंतरिम राहत पाने के लिए पर्याप्त आधार प्रस्तुत किया है।
किन उत्पादों पर लगाया गया था प्रतिबंध?
FSSAI के आदेश में डाबर हनी, डाबर हनी स्क्वीज़ी, सुंदरबन हनी, हिमालयन एप्पल साइडर विनेगर, हिमालयन ऑर्गेनिक एप्पल साइडर विनेगर, वर्जिन कोकोनट ऑयल, कोल्ड-प्रेस्ड सेसमे ऑयल, काउ घी, रियल एक्टिव 100% टेंडर कोकोनट वॉटर, डाबर होममेड कोकोनट मिल्क और ऑर्गेनिक हनी सहित कई उत्पादों की बिक्री तत्काल रोकने का निर्देश दिया गया था।
नियामक का आरोप था कि “100% Pure” और “100% Natural” जैसे दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित कर सकते हैं। साथ ही डाबर को 15 दिनों के भीतर अनुपालन रिपोर्ट (Action Taken Report) प्रस्तुत करने और आदेश का उल्लंघन जारी रहने पर दंडात्मक कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई थी।
याचिका में डाबर की मुख्य दलीलें
डाबर ने अपनी रिट याचिका में कहा है कि FSSAI का आदेश Food Safety and Standards (Advertising and Claims) Regulations, 2018 में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना जारी किया गया है।
कंपनी का यह भी कहना है कि आदेश अधिकार क्षेत्र से परे (Without Jurisdiction) है, इसमें पर्याप्त कारणों का उल्लेख नहीं किया गया है तथा इसके कारण बाजार में पहले से उपलब्ध उत्पादों को वापस मंगाने या उनकी नई पैकेजिंग करने की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जबकि नियामक ने कहीं भी यह आरोप नहीं लगाया कि संबंधित उत्पाद मिलावटी, असुरक्षित, नकली या निम्न गुणवत्ता के हैं।
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