अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की याचिका खारिज की, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश में दखल से इनकार

Like to Share

मृत रेलवे कर्मचारी की ओर से अनुकंपा नियुक्ति का दावा

सुप्रीम कोर्ट ने Union of India & Ors. v. Jitendra Verma मामले में रेलवे की याचिका खारिज करते हुए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप से इनकार किया, जिसमें मृत रेलवे कर्मचारी के परिजन के अनुकंपा नियुक्ति दावे पर संबंधित नीति के तहत पुनर्विचार का निर्देश दिया गया था।

मृत रेलवे कर्मचारी की ओर से अनुकंपा नियुक्ति का दावा

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें रेलवे को मृत कर्मचारी के परिजन जितेंद्र वर्मा के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर संबंधित रेलवे नीति के तहत विचार करने का निर्देश दिया गया था।

यह मामला छमा बाई की सेवा के दौरान मृत्यु से जुड़ा है। वह वेस्ट सेंट्रल रेलवे के भोपाल डिवीजन में कार्यरत थीं और 19 जून 2016 को सेवा के दौरान उनका निधन हो गया था।

रिकॉर्ड के अनुसार, जितेंद्र वर्मा का नाम सर्विस रिकॉर्ड में कानूनी उत्तराधिकारी/नॉमिनी के रूप में दर्ज था।

सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे की चुनौती खारिज की

जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई की पीठ ने Union of India & Ors. v. Jitendra Verma मामले में केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से दायर याचिका को खारिज कर दिया।

पीठ ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार करते हुए हाईकोर्ट द्वारा दिए गए निर्देश को बरकरार रहने दिया।

Must Read -  अप्राकृतिक सेक्स: सहमति है तो अपराध नहीं, पत्नी की इच्छा के विरुद्ध हो तो धारा 377 के तहत दंडनीय — इलाहाबाद हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने क्या निर्देश दिया था?

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने रेलवे को जितेंद्र वर्मा के अनुकंपा नियुक्ति के दावे पर संबंधित रेलवे नीति के तहत पुनर्विचार करने का निर्देश दिया था।

हाईकोर्ट के आदेश में संबंधित नीति के उन प्रावधानों को ध्यान में रखने को कहा गया था, जो करीबी रिश्तेदार तथा गोद लिए गए बेटे या बेटी से संबंधित हैं।

इसके बाद केंद्र सरकार और रेलवे ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का महत्व

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सीधा प्रभाव यह है कि रेलवे को हाईकोर्ट के निर्देश के अनुरूप जितेंद्र वर्मा के दावे पर संबंधित नीति के तहत विचार करना होगा।

हालांकि, अनुकंपा नियुक्ति प्रदान करने का अंतिम निर्णय इस आदेश से स्वतः नहीं हो जाता। हाईकोर्ट ने दावे पर संबंधित नीति के तहत विचार/पुनर्विचार का निर्देश दिया था और सुप्रीम कोर्ट ने उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार किया है।

मामला एक नजर में

  • मृत कर्मचारी: छमा बाई
  • विभाग: वेस्ट सेंट्रल रेलवे, भोपाल डिवीजन
  • मृत्यु: 19 जून 2016, सेवा के दौरान
  • दावेदार: जितेंद्र वर्मा
  • सर्विस रिकॉर्ड: कानूनी उत्तराधिकारी/नॉमिनी के रूप में नाम दर्ज
  • हाईकोर्ट: संबंधित रेलवे नीति के तहत दावे पर पुनर्विचार का निर्देश
  • सुप्रीम कोर्ट: रेलवे/केंद्र की चुनौती खारिज, हाईकोर्ट के आदेश में हस्तक्षेप से इनकार
  • पीठ: जस्टिस मनोज मिश्रा और जस्टिस विजय बिश्नोई
  • केस: Union of India & Ors. v. Jitendra Verma

कानूनी स्थिति

यह आदेश मुख्य रूप से हाईकोर्ट के उस निर्देश को बरकरार रखता है, जिसके तहत रेलवे को दावेदार के अनुकंपा नियुक्ति के अनुरोध पर लागू नीति और संबंधित पात्रता प्रावधानों के आधार पर विचार करना है। सुप्रीम कोर्ट ने इस स्तर पर रेलवे की चुनौती स्वीकार नहीं की।

Must Read -  HC ने कहा की FIR को क्लेम पिटीशन की तरह ही माना जायेगा, मोटर वाहन मामलों में 6 महीने के भीतर रिपोर्ट दाखिल करने पर कोई लिमिटेशन लागू नहीं

#अनुकंपानियुक्ति #सुप्रीमकोर्ट #मध्यप्रदेशहाईकोर्ट #रेलवे #जितेंद्रवर्मा #छमाबाई #कानूनीउत्तराधिकारी #भारतीयरेलवे #CompassionateAppointment #SupremeCourt #MadhyaPradeshHighCourt #IndianRailways #JitendraVerma #LegalHeir #RailwayEmployee

Leave a Comment