दिल्ली हाईकोर्ट ने IRCTC, RailOne और रेलवे के ऑनलाइन टिकट आरक्षण सिस्टम की कथित तकनीकी खामियों और टिकटों तक निष्पक्ष पहुंच को लेकर दायर PIL पर रेलवे मंत्रालय और IRCTC से जवाब मांगा है। याचिका में स्वतंत्र तकनीकी और प्रशासनिक ऑडिट की मांग की गई है।
ऑनलाइन रेलवे टिकट बुकिंग सिस्टम के ऑडिट की मांग पर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को रेलवे के ऑनलाइन टिकट आरक्षण सिस्टम में कथित तकनीकी खामियों और उपलब्ध टिकटों तक यात्रियों की निष्पक्ष पहुंच सुनिश्चित करने की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर रेल मंत्रालय और भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) से जवाब मांगा।
मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने केंद्र सरकार और रेलवे की ओर से पेश वकील को याचिका पर निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया।
यह जनहित याचिका अधिवक्ता उत्तम कुमार ने दायर की है। इसमें IRCTC, RailOne और अन्य संबद्ध डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित यात्री आरक्षण प्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी, परिचालन और प्रशासनिक जांच कराने की मांग की गई है।
लॉगिन, भुगतान और टिकट जनरेट होने में विफलता की शिकायतें
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि ऑनलाइन टिकट बुकिंग के दौरान यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। इनमें शामिल हैं:
- लॉगिन और प्रमाणीकरण संबंधी समस्याएं।
- बुकिंग सत्र का बीच में विफल हो जाना।
- भुगतान प्रक्रिया में तकनीकी दिक्कतें।
- खाते से रकम कटने के बावजूद टिकट जारी न होना।
- अग्रिम आरक्षण खुलने के समय और अधिक मांग वाले दिनों में टिकट बुक करने में कठिनाई।
याचिका में स्पष्ट किया गया है कि याचिकाकर्ता किसी विशेष टिकट, बर्थ या प्राथमिकता की मांग नहीं कर रहा है। उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक यात्रियों को उपलब्ध रेलवे सीटों तक निष्पक्ष, पारदर्शी, विश्वसनीय और सार्थक पहुंच मिल सके।
रेलवे आरक्षण प्रणाली के व्यापक ऑडिट की मांग
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता कुमुद झा, पारस जायसवाल, शुभम शेखर और विशाल कुमार सिंह, विधि फर्म K&S Domus Legalis के माध्यम से पेश हुए।
उन्होंने रेलवे की संपूर्ण ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली की स्वतंत्र और तकनीकी रूप से सक्षम जांच कराने की मांग की है। प्रस्तावित ऑडिट में निम्नलिखित पहलुओं की समीक्षा शामिल है:
- सर्वर और नेटवर्क की क्षमता।
- बुकिंग तथा कतार प्रबंधन का बुनियादी ढांचा।
- सीटों की उपलब्धता प्रदर्शित करने की प्रणाली।
- लॉगिन और प्रमाणीकरण व्यवस्था।
- भुगतान गेटवे और लेनदेन का मिलान।
- टिकट जारी करने की प्रक्रिया।
- RAC और प्रतीक्षा सूची के आवंटन की व्यवस्था।
- रिफंड और भुगतान वापसी की प्रक्रिया।
- विशेष कोटे का उपयोग।
- अधिकृत एजेंटों की पहुंच और बुकिंग व्यवस्था।
याचिका में समयबद्ध ऑडिट कराने और जांच में किसी प्रणालीगत कमी का पता चलने पर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश देने की मांग की गई है।
क्या अधिकृत एजेंटों को आम यात्रियों से तकनीकी बढ़त मिलती है?
याचिका में यह भी जांचने की मांग की गई है कि क्या अधिकृत रेलवे एजेंटों या अन्य मध्यस्थों को सामान्य यात्रियों की तुलना में कोई तकनीकी अथवा परिचालन लाभ प्राप्त है।
यदि ऐसा कोई अंतर मौजूद है, तो उसकी वैधता और पारदर्शिता की भी जांच किए जाने का अनुरोध किया गया है।
हालांकि, याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल वह किसी विशेष व्यक्ति, ब्रोकर या मध्यस्थ पर गैरकानूनी गतिविधि में शामिल होने का आरोप नहीं लगा रहा है। याचिका का उद्देश्य स्वतंत्र जांच के माध्यम से यह पता लगाना है कि कहीं किसी को अनुचित या अनधिकृत लाभ तो नहीं मिल रहा।
बॉट और ऑटोमेटेड बुकिंग टूल्स के दुरुपयोग की जांच
याचिका में बॉट, ऑटोमेटेड स्क्रिप्ट, बड़े पैमाने पर टिकट बुक करने वाले सॉफ्टवेयर, अनधिकृत टूल्स और लॉगिन क्रेडेंशियल के दुरुपयोग को रोकने के लिए मौजूद सुरक्षा उपायों की जांच की मांग भी की गई है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इन पहलुओं की तकनीकी जांच से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि ऑनलाइन आरक्षण प्रणाली में किसी प्रकार की अनुचित पहुंच या असमानता मौजूद है या नहीं।
विशेष आरक्षण कोटे के आवंटन और उपयोग में पारदर्शिता की मांग
याचिका में हाई ऑफिशियल रिक्विजिशन (HOR), आपातकालीन कोटे और अन्य आरक्षित श्रेणियों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।
याचिकाकर्ता ने वैध विशेष कोटों के अस्तित्व को चुनौती नहीं दी है। इसके बजाय, उसने इन कोटों के तहत सीटों की मांग, जारी करने, आवंटन और बाद में उपयोग किए जाने का ऑडिट योग्य रिकॉर्ड रखने की मांग की है।
खाते से रकम कटने पर समयबद्ध रिफंड व्यवस्था की मांग
याचिका में उन परिस्थितियों पर भी चिंता जताई गई है, जब यात्री के बैंक खाते या भुगतान माध्यम से रकम कट जाती है, लेकिन टिकट जनरेट नहीं होता।
याचिकाकर्ता ने ऐसे लेनदेन की स्थिति निर्धारित करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध व्यवस्था बनाने तथा जहां कानूनन रिफंड या रकम वापस करना आवश्यक हो, वहां भुगतान लौटाने की प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।
इसके अतिरिक्त, चार्ट तैयार होने के बाद खाली बची बर्थ को RAC यात्रियों को आवंटित करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता और चार्ट बनने के बाद भी पूरी तरह प्रतीक्षा सूची में रहने वाले यात्रियों से वसूली गई रकम के व्यवहार की जांच की मांग की गई है।
बुकिंग और भुगतान के डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में रेलवे आरक्षण प्रणाली से संबंधित डिजिटल रिकॉर्ड सुरक्षित रखने और उनकी जांच कराने का अनुरोध किया गया है। इनमें शामिल हैं:
- बुकिंग लॉग और सर्वर लॉग।
- सिस्टम तथा उपयोगकर्ता एक्सेस लॉग।
- प्रमाणीकरण रिकॉर्ड।
- भुगतान मिलान और लेनदेन संबंधी डेटा।
- टिकट जनरेट होने के रिकॉर्ड।
- सीट उपलब्धता से संबंधित डेटा।
- टिकट रद्द करने के रिकॉर्ड।
- विशेष कोटे के आवंटन के रिकॉर्ड।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इन रिकॉर्डों की जांच से यह निर्धारित किया जा सकता है कि यात्रियों की शिकायतें छिटपुट तकनीकी घटनाएं हैं या आरक्षण प्रणाली में बार-बार सामने आने वाली संरचनात्मक कमियां।
तकनीकी मामलों का निर्णय अदालत से नहीं, सक्षम विशेषज्ञों से कराने की मांग
याचिका में कहा गया है कि इसका उद्देश्य अदालत से जटिल तकनीकी मामलों का स्वयं निर्णय कराने का नहीं है। इसके बजाय, याचिकाकर्ता चाहता है कि सक्षम प्राधिकारी स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच करें तथा किसी प्रणालीगत खामी की पुष्टि होने पर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाएं।
फिलहाल, दिल्ली हाईकोर्ट ने रेल मंत्रालय और IRCTC से याचिका पर निर्देश प्राप्त करने को कहा है। खंडपीठ ने मामले में एक सप्ताह के भीतर निर्देश लेने का समय दिया है।
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