सुप्रीम कोर्ट का निर्देश: Indiabulls से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोपों की CBI करेगी स्वतंत्र जांच

Like to Share

सुप्रीम कोर्ट ने Indiabulls Housing Finance से जुड़े वित्तीय अनियमितता के आरोपों की EOW की राय से स्वतंत्र जांच CBI को करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने विस्तृत रिपोर्ट भी मांगी।

CBI को स्वतंत्र जांच का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को Indiabulls Housing Finance Ltd और उससे जुड़ी संस्थाओं के खिलाफ लगाए गए वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों की स्वतंत्र जांच करने का निर्देश CBI को दिया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच के दौरान CBI दिल्ली पुलिस की Economic Offences Wing (EOW) द्वारा पहले की गई जांच और उसके निष्कर्षों से निर्देशित नहीं होगी।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश Citizens Whistleblower Forum की ओर से दायर जनहित याचिका (PIL) पर सुनवाई करते हुए दिया।

पांच लेन-देन पर EOW की राय को चुनौती

याचिकाकर्ता ने Indiabulls से जुड़े पांच लेन-देन पर EOW द्वारा आगे जांच नहीं किए जाने के फैसले को चुनौती दी थी। EOW ने इन लेन-देन की जांच के बाद आगे जांच को आवश्यक नहीं माना था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि याचिकाकर्ता EOW के निष्कर्षों को चुनौती देकर स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, इसलिए CBI इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से जांच करेगी और EOW की रिपोर्ट से प्रभावित नहीं होगी।

₹50 करोड़ से अधिक के बैंक फ्रॉड का मुद्दा

याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने दलील दी कि RBI के एक सर्कुलर के अनुसार ₹50 करोड़ से अधिक की राशि वाले बैंक फ्रॉड के मामलों की जांच CBI द्वारा की जानी चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) की शिकायत में कथित धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश, फंड डायवर्जन और लोन के evergreening से जुड़े प्रथमदृष्टया आरोप सामने आते हैं।

भूषण ने तर्क दिया कि EOW ऐसे बैंक-फ्रॉड आरोपों की जांच के लिए सक्षम एजेंसी नहीं है और आरोपों की जांच किसी सक्षम एजेंसी द्वारा स्वतंत्र रूप से की जानी चाहिए।

₹1,693 करोड़ के लोन से जुड़ा आरोप

याचिकाकर्ता की ओर से एक आरोप का उल्लेख किया गया, जिसमें Americorp Group की संस्थाओं को करीब ₹1,693 करोड़ के लोन दिए जाने की बात कही गई।

भूषण के अनुसार, इन लोन की राशि कथित तौर पर Indiabulls से जुड़ी संस्थाओं के शेयरों में वापस लगाई गई और शेयर कीमतों में कथित हेरफेर के जरिए मुनाफा कमाया गया।

Must Read -  Reliance Power के CFO अशोक कुमार पाल ED की दो दिन की रिमांड पर, कोर्ट ने गिरफ्तारी को लेकर दी अहम टिप्पणियां

उन्होंने Palais Royale प्रोजेक्ट से जुड़े कथित फंड डायवर्जन और संदिग्ध लेन-देन के संबंध में ED के निष्कर्षों का भी हवाला दिया।

EOW की ‘क्लीन चिट’ पर कोर्ट की टिप्पणी

जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान कहा कि EOW पहले ही इन लेन-देन की जांच कर चुकी है और उसे कोई अनियमितता नहीं मिली।

इसके जवाब में प्रशांत भूषण ने कहा कि यह केवल EOW का निष्कर्ष है और इसे स्वतंत्र CBI जांच का विकल्प नहीं माना जा सकता। उनके अनुसार CBI ने स्वयं इन पांच आरोपों की स्वतंत्र जांच नहीं की है।

वहीं, प्रतिवादियों ने आरोपों का विरोध करते हुए कहा कि कोई बैंक फ्रॉड नहीं हुआ क्योंकि लोन चुका दिए गए थे। यह भी दलील दी गई कि किसी बैंक ने डिफॉल्ट या नुकसान की शिकायत नहीं की और केवल evergreening अपने आप में आपराधिक अपराध नहीं है।

₹1,574 करोड़ के छठे लेन-देन पर अलग जांच

CBI ने कोर्ट को बताया कि ED की शिकायत में कुल छह आरोप हैं। इनमें से पांच की जांच EOW कर चुकी है, जबकि छठा मामला करीब ₹1,574 करोड़ के लेन-देन से संबंधित है।

CBI ने बताया कि इस छठे आरोप के संबंध में चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है और आगे की जांच के लिए PMLA की विशेष अदालत, मुंबई से अनुमति आवश्यक है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने CBI से पूछा कि उसे ट्रायल कोर्ट से अनुमति लेने की आवश्यकता क्यों है। CBI ने बताया कि आगे की जांच की अनुमति के लिए उसका आवेदन Special Judge, PMLA, Mumbai के समक्ष पहले से लंबित है।

Special Judge को दो सप्ताह में फैसला देने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने Special Judge, PMLA, Mumbai को CBI के आवेदन पर 24 अगस्त 2026 से दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया।

इसके बाद CBI को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपनी प्रगति और स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा गया।

EOW को भी जांच पूरी करने का निर्देश

कोर्ट ने दिल्ली पुलिस की EOW को करीब ₹1,574 करोड़ वाले छठे लेन-देन से संबंधित लंबित जांच पूरी करने और नई स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया।

Must Read -  Supreme Court के Landmark Judgment जिससे नारियल तेल सस्ता हो जायेगा, अन्य तेलों पर भी पड़ सकता है असर

वहीं, अन्य आरोपों के संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने CBI को EOW की राय या रिपोर्ट से स्वतंत्र होकर जांच करने और एक व्यापक रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया।

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि उसने EOW की उस रिपोर्ट पर कोई राय व्यक्त नहीं की है, जिसमें कुछ लेन-देन के संबंध में क्लीन चिट दी गई थी।

पहले भी CBI, ED, SFIO और SEBI को जांच का निर्देश

यह मामला Citizens Whistleblower Forum की ओर से दायर लंबे समय से लंबित PIL से जुड़ा है। नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने CBI, ED, SFIO और SEBI के वरिष्ठ अधिकारियों को Indiabulls Housing Finance से जुड़े पांच borrower groups के संबंध में लगाए गए आरोपों की संयुक्त रूप से जांच करने का निर्देश दिया था।

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि वर्ष 2014 से 2017 के बीच इन borrower groups को दिए गए लोन में फंड डायवर्जन और अन्य वित्तीय अनियमितताएं हुईं।

याचिका में Indiabulls के पूर्व प्रमोटर समीर गेहलोत के संबंध में भी विभिन्न आरोप लगाए गए हैं। याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि उनके द्वारा विदेश जाने और कथित तौर पर होटल, विमान तथा यॉट जैसी संपत्तियां हासिल करने सहित कई पहलुओं की विस्तृत जांच आवश्यक है।

अब CBI और EOW की रिपोर्ट पर नजर

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब मामले में CBI की स्वतंत्र जांच और EOW की आगे की जांच महत्वपूर्ण होगी। कोर्ट इन एजेंसियों से प्राप्त नई रिपोर्टों के आधार पर मामले पर आगे विचार करेगा।

Tags

#Indiabulls #IndiabullsHousingFinance #CBI #SupremeCourt #सुप्रीमकोर्ट #CBIInvestigation #EOW #FinancialIrregularities #BankFraud #Evergreening #CitizensWhistleblowerForum #PrashantBhushan #LegalNews #कानूनीसमाचार

Leave a Comment