उसी पद और स्थान पर दोबारा नियुक्ति का आदेश
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए उसी पद और स्थान पर दोबारा नियुक्त करने का आदेश दिया। कोर्ट ने सेवानिवृत्ति लाभ की राशि दो सप्ताह में वापस जमा करने की शर्त रखी। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को होगी।
हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 58 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त किए गए एक कर्मचारी को अंतरिम राहत देते हुए उसी पद और उसी स्थान पर दोबारा नियुक्त करने का आदेश दिया है, जहां वह 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्ति के समय कार्यरत था।
High Court ने यह आदेश कर्मचारी की रिट याचिका और अंतरिम राहत के आवेदन पर प्रतिवादियों द्वारा निर्धारित अवसर मिलने के बावजूद जवाब दाखिल नहीं किए जाने के मद्देनजर पारित किया। अदालत ने निर्देश दिया कि कर्मचारी को सेवानिवृत्ति लाभ की प्राप्त राशि दो सप्ताह के भीतर नियोक्ता के पास वापस जमा करने पर तत्काल सेवा में बहाल किया जाए।
यह अंतरिम व्यवस्था मुख्य रिट याचिका के अंतिम निर्णय और हाईकोर्ट द्वारा पारित किए जाने वाले आगामी आदेशों के अधीन रहेगी। मामले की अगली सुनवाई 27 अक्टूबर 2026 को निर्धारित की गई है।
क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता कर्मचारी को 58 वर्ष की आयु पूरी होने पर 30 अप्रैल 2026 को सेवानिवृत्त कर दिया गया था। कर्मचारी की ओर से हाईकोर्ट में दलील दी गई कि नियमानुसार उसे 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने का अधिकार है।
इसी आधार पर कर्मचारी ने अदालत से सेवानिवृत्ति आदेश के प्रभाव को रोकने और अंतरिम अवधि के दौरान उसी पद पर दोबारा नियुक्त करने की मांग की, ताकि वह 60 वर्ष की आयु पूरी होने तक सेवा जारी रख सके।
प्रतिवादियों ने दाखिल नहीं किया जवाब
मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, हाईकोर्ट ने 31 अगस्त 2026 को रिट याचिका और संबंधित विविध आवेदन पर प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया था तथा जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया था।
इसके बावजूद प्रतिवादियों की ओर से न तो मुख्य रिट याचिका और न ही अंतरिम राहत के आवेदन पर जवाब दाखिल किया गया।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता की दलीलें सुनने के बाद इस तथ्य पर भी ध्यान दिया कि प्रतिवादियों को स्टे आवेदन पर जवाब दाखिल करने का पर्याप्त अवसर दिया जा चुका था, लेकिन उन्होंने इसका उपयोग नहीं किया।
उसी पद और स्थान पर दोबारा नियुक्ति का आदेश
हाईकोर्ट ने अंतरिम राहत प्रदान करते हुए निर्देश दिया कि कर्मचारी को उसी पद और उसी स्थान पर दोबारा नियुक्त किया जाए, जहां वह सेवानिवृत्ति के समय कार्यरत था।
हालांकि, अदालत ने इसके लिए एक शर्त निर्धारित की है। यदि कर्मचारी ने सेवानिवृत्ति के बाद कोई सेवानिवृत्ति लाभ प्राप्त किया है, तो उसे प्राप्त राशि नियोक्ता के पास वापस जमा करनी होगी।
अदालत ने स्पष्ट किया कि यदि कर्मचारी दो सप्ताह के भीतर प्राप्त सेवानिवृत्ति लाभ की राशि वापस जमा कर देता है, तो प्रतिवादियों को आदेश के अनुसार उसे तत्काल सेवा में वापस लेना होगा।
60 वर्ष तक सेवा का दावा अंतिम निर्णय के अधीन
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि कर्मचारी की पुनर्नियुक्ति फिलहाल अंतरिम व्यवस्था के तहत होगी। वह 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने की मांग को लेकर दाखिल रिट याचिका के अंतिम निर्णय तक इस व्यवस्था के अंतर्गत काम कर सकेगा।
हालांकि, यह राहत मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन होगी और हाईकोर्ट द्वारा आगे पारित किसी भी आदेश से प्रभावित हो सकती है।
अदालत ने प्रतिवादियों को मुख्य रिट याचिका पर जवाब अगली सुनवाई की तारीख तक दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के प्रमुख बिंदु
- पुनर्नियुक्ति: सेवानिवृत्ति के समय वाले उसी पद और स्थान पर।
- शर्त: प्राप्त सेवानिवृत्ति लाभ की राशि दो सप्ताह के भीतर वापस जमा करनी होगी।
- सेवा अवधि: 60 वर्ष की आयु तक सेवा जारी रखने का दावा मुख्य याचिका के अंतिम निर्णय के अधीन।
- अगली सुनवाई: 27 अक्टूबर 2026।
- प्रतिवादियों को निर्देश: अगली सुनवाई तक मुख्य याचिका पर जवाब दाखिल करना होगा।
मामले का कानूनी महत्व
हाईकोर्ट का यह अंतरिम आदेश सेवानिवृत्ति की आयु को लेकर लंबित विवाद में कर्मचारी को अस्थायी राहत प्रदान करता है। हालांकि, अदालत ने अभी यह अंतिम रूप से निर्धारित नहीं किया है कि कर्मचारी को 60 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने का कानूनी अधिकार प्राप्त है या नहीं। इस प्रश्न पर अंतिम निर्णय रिट याचिका के निस्तारण के समय होगा।
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