अनिल अंबानी को राहत नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने HC आदेश बरकरार रखा
सुप्रीम कोर्ट ने अनिल अंबानी की याचिका खारिज की; बैंकों को ‘फ्रॉड’ घोषित करने की प्रक्रिया जारी रखने की अनुमति, साथ ही जांच तेज करने के निर्देश।
एक महत्वपूर्ण फैसले में Supreme Court of India ने उद्योगपति Anil Ambani को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने Bombay High Court के डिवीजन बेंच के उस आदेश को बरकरार रखा, जिसमें बैंकों को उनके लोन खाते को “फ्रॉड” घोषित करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने की अनुमति दी गई थी।
🔹 क्या था विवाद
मामला उन बैंकों के फैसले से जुड़ा है, जिनमें Indian Overseas Bank शामिल है, जिन्होंने अंबानी के लोन अकाउंट को “फ्रॉड” घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की थी।
इससे पहले:
- बॉम्बे हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने दिसंबर 2025 में अंबानी को अंतरिम राहत दी थी
- लेकिन बाद में डिवीजन बेंच ने उस आदेश को पलट दिया
इसी फैसले को अंबानी ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी।
🔹 सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी
मुख्य न्यायाधीश Surya Kant की अगुवाई वाली पीठ ने कहा:
- हाईकोर्ट का आदेश जारी रहेगा
- लेकिन यह लंबित सिविल मुकदमे के मेरिट्स को प्रभावित नहीं करेगा
कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि:
👉 हाईकोर्ट इस सिविल मुकदमे का शीघ्र निपटारा करे
साथ ही, अदालत ने कहा कि:
- अंबानी के पास यदि अन्य कानूनी उपाय उपलब्ध हैं
- तो वे उनका उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं
🔹 समझौते पर कोई टिप्पणी नहीं
सुनवाई के दौरान अंबानी की ओर से बैंकों के साथ समझौते की इच्छा जताई गई।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि:
👉 वह इस मुद्दे पर कोई राय नहीं दे रही है
🔹 समानांतर जांच भी जारी
इस मामले के समानांतर, Supreme Court of India ने हाल ही में रिलायंस अनिल अंबानी ग्रुप (RAAG) से जुड़े कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच का भी आदेश दिया था।
यह याचिका EAS Sarma द्वारा दायर की गई थी।
🔹 ED और CBI की रिपोर्ट
अदालत के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट्स में:
- Enforcement Directorate ने बताया कि
- 12 फरवरी 2026 को एक SIT गठित की गई
- 8 मामलों में जांच शुरू हो चुकी है
- कई दस्तावेज जब्त किए गए हैं
- ED ने “Project Help” नामक एक संदिग्ध योजना का भी जिक्र किया
- जिसमें लगभग ₹2,983 करोड़ के दावे
- मात्र ₹26 करोड़ में निपटाए जाने का आरोप है
🔹 CBI की जांच
Central Bureau of Investigation ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि:
- 7 मामलों की जांच चल रही है
- 5 नए FIR दर्ज किए गए हैं
- एक मामले में ही ₹2,223 करोड़ का कथित नुकसान सामने आया है
कुल मिलाकर:
👉 लगभग ₹73,006 करोड़ के दावों की जांच हो रही है
🔹 कानूनी महत्व
यह फैसला दो महत्वपूर्ण पहलुओं को रेखांकित करता है:
- बैंकों को “फ्रॉड” वर्गीकरण की प्रक्रिया में न्यायिक समर्थन
- समानांतर सिविल और आपराधिक जांच की वैधता
🔹 निष्कर्ष
सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश अनिल अंबानी के लिए एक बड़ा झटका है, जहां एक ओर उन्हें तत्काल राहत नहीं मिली, वहीं दूसरी ओर वित्तीय अनियमितताओं की जांच भी तेज होती दिख रही है।
अब सभी की नजर बॉम्बे हाईकोर्ट में लंबित सिविल मुकदमे और जांच एजेंसियों की आगे की कार्रवाई पर है।
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