नालसार विवाद के बाद BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग, वकील संगठनों ने दी अविश्वास प्रस्ताव की चेतावनी
नालसार विवाद के बाद तीन प्रमुख वकील संगठनों ने BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। इस्तीफा न देने पर अविश्वास प्रस्ताव लाने की चेतावनी दी गई।
देश में 700 से अधिक सदस्यों वाले तीन प्रमुख वकील संगठनों ने नालसार विवाद के बाद बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग की है। संगठनों ने कहा है कि यदि मनन मिश्रा पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो बार काउंसिल ऑफ इंडिया के अन्य सदस्यों से उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की मांग की जाएगी।
छात्रों से माफी के बाद उठी इस्तीफे की मांग
यह घटनाक्रम मनन मिश्रा द्वारा कानून के छात्रों से माफी मांगने के एक दिन बाद सामने आया है। इससे पहले उन्होंने हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्नातकों को राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण कराने से रोकने का निर्देश जारी किया था। हालांकि, बाद में इस निर्देश को वापस ले लिया गया।
तीन वकील संगठनों ने लिखा पत्र
ऑल इंडिया लॉयर्स एसोसिएशन फॉर जस्टिस, नेशनल अलायंस फॉर जस्टिस अकाउंटेबिलिटी एंड राइट्स और क्वीर लॉयर्स एसोसिएशन ने BCI चेयरमैन मनन मिश्रा को पत्र भेजकर उनके इस्तीफे की मांग की है। इन तीनों संगठनों में करीब 700 सदस्य बताए गए हैं।
संगठनों की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि BCI अध्यक्ष और नालसार के छात्रों के बीच हुई घटना को लेकर कानूनी बिरादरी के सदस्य बेहद चिंतित और शर्मिंदा हैं। संगठनों ने नेतृत्व पर मनमाने तरीके से काम करने और बार के हितों तथा उसकी संस्थागत अखंडता को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।
‘बार की स्वतंत्रता और स्वायत्तता जरूरी’
वकील संगठनों ने कहा कि कानूनी पेशे की स्वतंत्रता, निष्ठा और स्वायत्तता एक मजबूत लोकतंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि देश के स्वतंत्रता संघर्ष में बार से जुड़े पूर्वजों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया था और अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने की क्षमता लोकतांत्रिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण ताकत रही है।
संगठनों ने चिंता जताई कि कमजोर नेतृत्व के कारण आज इस क्षमता में गिरावट देखने को मिल रही है।
‘उच्च मानक स्थापित करने का समय आ गया’
वकीलों ने कहा कि उन्होंने मनन मिश्रा को पत्र लिखकर उनके कार्यों पर असंतोष जताया है और तत्काल इस्तीफा देने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि वह इस्तीफा नहीं देते हैं तो वे BCI के अन्य सदस्यों को पत्र लिखकर उनके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित करने का अनुरोध करेंगे।
वकील संगठनों ने कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के लिए उच्च मानक स्थापित करने का समय आ गया है।
BCI और स्टेट बार काउंसिल की संस्थागत समीक्षा की मांग
मनन मिश्रा को भेजे गए पत्र में संगठनों ने BCI और स्टेट बार काउंसिल के सदस्यों से संबंधित निर्देश जारी करने की पूरी प्रक्रिया की संस्थागत समीक्षा की मांग की है।
उन्होंने विशेष रूप से उन पत्रों की समीक्षा की मांग की है, जिनमें पहले स्टेट बार काउंसिलों से नालसार के 2026 बैच के छात्रों को पंजीकरण नहीं देने को कहा गया था। साथ ही बाद में नालसार छात्रों द्वारा अपने दीक्षांत समारोह में भारत के मुख्य न्यायाधीश की मौजूदगी का विरोध करने के निर्णय की जांच से संबंधित निर्देश पर भी सवाल उठाए गए हैं।
क्या है नालसार विवाद?
पिछले सप्ताह नालसार लॉ यूनिवर्सिटी के छात्रों के एक वर्ग ने आगामी दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को आमंत्रित किए जाने का विरोध किया था। छात्रों ने पिछले महीने नीट विरोध प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस ज्यादती से संबंधित एक याचिका पर CJI की हालिया टिप्पणियों को अपने विरोध का आधार बताया था।
BCI ने छात्रों के पंजीकरण पर लगाई थी रोक
गुरुवार शाम वरिष्ठ अधिवक्ता मनन मिश्रा ने एक निर्देश जारी कर नालसार यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के स्नातकों को राज्य बार काउंसिल में पंजीकरण कराने से रोक दिया था। साथ ही छात्रों के खिलाफ जांच की मांग भी की गई थी।
हालांकि, कुछ घंटे बाद BCI ने दूसरा पत्र जारी कर अपने पहले निर्देश में बदलाव किया और छात्रों के पंजीकरण पर लगाई गई रोक वापस ले ली।
CJI सूर्यकांत ने BCI के कदम पर जताई नाराजगी
शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने BCI के निर्देश की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि छात्रों को विरोध करने का अधिकार है और यह मामला छात्रों तथा उनके बीच संवाद का विषय है।
CJI ने BCI के हस्तक्षेप पर सवाल उठाते हुए इसे अनुचित बताया। इसके अगले दिन मनन मिश्रा ने नालसार के छात्रों से माफी मांग ली।
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