सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस वी. मोहना ने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे से जुड़ी PIL की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। CJI सूर्यकांत ने कहा कि मामला दूसरी बेंच के समक्ष सूचीबद्ध होगा।
जस्टिस वी. मोहना ने किया Recuse
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस वी. मोहना ने मंगलवार को सांसदों और राज्य विधानसभाओं के सदस्यों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के जल्द निपटारे को सुनिश्चित करने के लिए दायर जनहित याचिका (PIL) की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
यह मामला चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच के समक्ष आया, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थीं।
पहले वकील के रूप में पेश हुई थीं जस्टिस मोहना
सुनवाई की शुरुआत में CJI सूर्यकांत ने बताया कि जस्टिस मोहना पहले इस मामले में वकील के रूप में पेश हो चुकी हैं।
CJI ने कहा, “मेरी बहन खुद को अलग करेंगी। हम इसे किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध करेंगे।”
इसके बाद जस्टिस वी. मोहना ने मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया।
जल्द सुनवाई की मांग
इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की सहायता कर रहे सीनियर एडवोकेट विजय हंसरिया, जो Amicus curiae की भूमिका निभा रहे हैं, ने आग्रह किया कि मामले को जल्द से जल्द किसी अन्य बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए।
उन्होंने सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों की बड़ी संख्या को देखते हुए मामले की शीघ्र सुनवाई की आवश्यकता पर जोर दिया।
251 लोकसभा और 75 राज्यसभा सदस्यों के खिलाफ मामले
राजनीति के अपराधीकरण पर विजय हंसरिया की नवीनतम रिपोर्ट के अनुसार, 543 लोकसभा सदस्यों में से 251 और 233 राज्यसभा सदस्यों में से 75 के खिलाफ आपराधिक मामले लंबित हैं।
2016 में अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर PIL में हंसरिया की ओर से दाखिल हलफनामे के अनुसार, देशभर में सांसदों और विधायकों के खिलाफ 4,000 से अधिक आपराधिक मामले लंबित थे।
28 में से 14 मुख्यमंत्रियों ने घोषित किए आपराधिक मामले
रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि देश के 28 मुख्यमंत्रियों में से 14 ने अपने खिलाफ आपराधिक मामलों की घोषणा की है। इनमें गंभीर अपराधों से जुड़े मामले भी शामिल हैं।
मुख्यमंत्रियों में तेलंगाना के मुख्यमंत्री अनुमुला रेवंत रेड्डी के खिलाफ सबसे अधिक 89 घोषित मामले बताए गए हैं। इसके बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के खिलाफ 29 और कर्नाटक के मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के खिलाफ 19 मामले घोषित किए गए हैं।
2018 से लंबित मामलों की स्थिति में खास बदलाव नहीं
विजय हंसरिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे के लिए सुप्रीम कोर्ट और विभिन्न हाई कोर्ट की लगातार निगरानी के बावजूद 2018 से लंबित मामलों की संख्या में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है।
2023 में सुप्रीम कोर्ट ने दिए थे कई निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने 9 नवंबर 2023 के अपने फैसले में सांसदों और विधायकों से जुड़े 5,000 से अधिक आपराधिक मामलों के शीघ्र ट्रायल के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए थे।
शीर्ष अदालत ने हाई कोर्ट को ऐसे मामलों की निगरानी के लिए विशेष बेंच गठित करने और उनके समयबद्ध निपटारे को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
साथ ही, सांसदों और विधायकों के खिलाफ मामलों की सुनवाई करने वाली विशेष अदालतों को निर्देश दिया गया था कि वे “दुर्लभ और बाध्यकारी कारणों” को छोड़कर स्थगन (Adjournment) देने से बचें।
सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट, जिला न्यायपालिका और नामित विशेष अदालतों को सांसदों, विधायकों और विधान परिषद के सदस्यों से जुड़े आपराधिक मामलों की कार्यवाही को प्राथमिकता देने का भी निर्देश दिया था।
अब दूसरी बेंच करेगी मामले की सुनवाई
जस्टिस वी. मोहना के Recusal के बाद अब यह मामला नई बेंच के समक्ष सूचीबद्ध किया जाएगा। मामले में सांसदों और विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमों के शीघ्र निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट की निगरानी और आगे की दिशा महत्वपूर्ण होगी।
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