बैंक ऑफ बड़ौदा को 2.10 लाख रुपये देने का आदेश
रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक ऑफ बड़ौदा को सेना के अधिकारी को 2.10 लाख रुपये देने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि लोन का ब्याज कम करने वाली सुविधा की जानकारी मांगने के बावजूद बैंक ने जरूरी जानकारी नहीं दी, जो सेवा में कमी है।
बैंक ऑफ बड़ौदा को 2.10 लाख रुपये देने का आदेश
हरियाणा के रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने बैंक ऑफ बड़ौदा को भारतीय सेना के एक सेवारत अधिकारी को कुल 2.10 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
आयोग ने माना कि अधिकारी ने अपने होम लोन का ब्याज बोझ कम करने के तरीकों के बारे में बैंक से जानकारी मांगी थी, लेकिन बैंक ने उन्हें ऐसी सुविधा की जानकारी नहीं दी, जिससे उनके लोन पर ब्याज का बोझ कम हो सकता था।
आयोग ने बैंक के इस आचरण को सेवा में कमी (Deficiency in Service) माना।
यह आदेश 9 सितंबर को रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष नागेंद्र सिंह कादियान तथा सदस्य डॉ. तृप्ति पन्नू और डॉ. विजेंद्र सिंह की पीठ ने पारित किया।
51 वर्षीय ब्रिगेडियर ने दर्ज कराई थी शिकायत
शिकायतकर्ता 51 वर्षीय सेवारत भारतीय सेना अधिकारी, जो ब्रिगेडियर रैंक पर हैं, ने वर्ष 2012 में अपनी पत्नी के साथ बैंक ऑफ बड़ौदा से 42 लाख रुपये का होम लोन लिया था।
यह ऋण अलग-अलग किस्तों में जारी किया गया और वर्ष 2016 तक पूरी ऋण राशि जारी हो चुकी थी।
सेना में सेवा के कारण अधिकारी की पोस्टिंग अलग-अलग स्थानों पर होती रही। इसके बावजूद वह बैंक की शाखा में जाते रहे और बैंक मैनेजर तथा अन्य कर्मचारियों के संपर्क में बने रहे।
अधिकारी का कहना था कि उन्होंने कई बार बैंक कर्मचारियों से ऐसी योजनाओं और विकल्पों के बारे में जानकारी मांगी, जिनसे उनके होम लोन पर ब्याज का बोझ कम किया जा सकता था।
उनके अनुसार, यदि बैंक ने समय पर उन्हें संबंधित सुविधा की जानकारी दी होती तो वह ब्याज के रूप में बड़ी राशि बचा सकते थे।
‘एडवांटेज फंड सुविधा’ की जानकारी नहीं देने का आरोप
शिकायतकर्ता ने बताया कि बैंक ने वर्ष 2015 में ‘एडवांटेज फंड सुविधा’ शुरू की थी।
इस सुविधा के तहत लिंक्ड सेविंग्स अकाउंट में रखी गई राशि के आधार पर होम लोन की बकाया मूल राशि पर ब्याज में राहत मिल सकती थी।
सेना अधिकारी का आरोप था कि बैंक ने उन्हें इस सुविधा की जानकारी नहीं दी, जबकि वह पहले से अपने होम लोन के ब्याज बोझ को कम करने के विकल्पों के बारे में पूछ रहे थे।
उन्होंने आयोग के समक्ष कहा कि एक मौजूदा ग्राहक के रूप में उन्हें अपने लोन से संबंधित ऐसी महत्वपूर्ण सुविधाओं के बारे में जानकारी मिलनी चाहिए थी।
शिकायतकर्ता की ओर से अधिवक्ता सविता दलाल ने पक्ष रखा।
बैंक ने कहा- योजनाओं का प्रचार विभिन्न माध्यमों से किया जाता है
बैंक ऑफ बड़ौदा की ओर से अधिवक्ता प्रदीप अहलावत ने दलील दी कि बैंक की नई योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी विभिन्न माध्यमों से दी जाती है।
बैंक के अनुसार, इनमें उसकी वेबसाइट, सोशल मीडिया, बैंक शाखाएं और अन्य माध्यम शामिल हैं।
बैंक ने यह भी कहा कि जब भी शिकायतकर्ता ने बैंक की योजनाओं के बारे में जानकारी मांगी, उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराई गई।
बैंक ने अधिकारी को किसी आर्थिक नुकसान होने के दावे से भी इनकार किया।
आयोग ने कहा- ग्राहक को हर योजना खुद जानना जरूरी नहीं
आयोग ने माना कि बैंक ने नई योजनाओं के प्रचार-प्रसार के लिए वेबसाइट, सोशल मीडिया, शाखाओं में लगाए गए नोटिस और अन्य माध्यमों का इस्तेमाल करने की बात कही थी।
हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी सुविधा का सामान्य रूप से प्रचार करना बैंक को उस ग्राहक के प्रति अपनी जिम्मेदारी से पूरी तरह मुक्त नहीं करता, जिसने विशेष रूप से अपने लोन का ब्याज कम करने के तरीकों के बारे में जानकारी मांगी हो।
आयोग ने कहा कि किसी ग्राहक से यह अपेक्षा नहीं की जा सकती कि उसे बैंक की प्रत्येक योजना, सर्कुलर या सुविधा की जानकारी स्वयं ही हो।
मौजूदा वित्तीय संबंध से जुड़ी जानकारी देना जरूरी
आयोग ने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि बैंक के लिए हर ग्राहक को प्रत्येक नई योजना की व्यक्तिगत जानकारी देना अनिवार्य नहीं है।
लेकिन यदि किसी ग्राहक का मौजूदा वित्तीय संबंध किसी विशेष सुविधा से सीधे जुड़ा है और ग्राहक ने स्वयं उस तरह की सुविधा या ब्याज कम करने के विकल्प के बारे में जानकारी मांगी है, तो बैंक को उससे संबंधित जरूरी और महत्वपूर्ण जानकारी उपलब्ध करानी चाहिए।
आयोग ने माना कि इस मामले में शिकायतकर्ता ने अपने मौजूदा होम लोन के संबंध में ब्याज का बोझ कम करने के विकल्पों के बारे में जानकारी मांगी थी। इसके बावजूद संबंधित सुविधा की जानकारी नहीं दी गई।
बैंक को कितना भुगतान करना होगा?
आयोग ने बैंक ऑफ बड़ौदा को कुल 2.10 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है।
राशि का विवरण इस प्रकार है:
- 2 लाख रुपये — शिकायतकर्ता को मुआवजे के रूप में
- 5,000 रुपये — सेवा में कमी के लिए
- 5,000 रुपये — मुकदमे के खर्च के रूप में
इस प्रकार बैंक को कुल 2,10,000 रुपये का भुगतान करना होगा।
फैसले का क्या है मतलब?
इस फैसले में रोहतक जिला उपभोक्ता आयोग ने मौजूदा बैंक ग्राहक और बैंक के बीच सूचना साझा करने की जिम्मेदारी को महत्वपूर्ण माना है।
फैसले का मूल सिद्धांत यह है कि यदि कोई ग्राहक अपने मौजूदा लोन का ब्याज बोझ कम करने वाली सुविधाओं के बारे में विशेष रूप से जानकारी मांगता है, तो बैंक उस ग्राहक से सीधे संबंधित महत्वपूर्ण सुविधा की जानकारी देने से पूरी तरह बच नहीं सकता।
हालांकि, आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि बैंक के लिए अपनी प्रत्येक नई योजना की जानकारी हर ग्राहक को व्यक्तिगत रूप से देना जरूरी नहीं है। जिम्मेदारी उस स्थिति में महत्वपूर्ण हो जाती है, जब ग्राहक स्वयं अपने मौजूदा वित्तीय संबंध से जुड़ी ऐसी सुविधा के बारे में जानकारी मांगता है।
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