कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय पति की याचिका खारिज की
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भारतीय नागरिक की बांग्लादेशी पत्नी को भारत में प्रवेश से रोकने के इमिग्रेशन अधिकारियों के फैसले को सही ठहराया। अदालत ने उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर पति की याचिका खारिज कर दी।
हाईकोर्ट ने इमिग्रेशन अधिकारियों के फैसले को माना उचित
कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक भारतीय नागरिक की बांग्लादेशी पत्नी को भारत में प्रवेश देने से इनकार करने के इमिग्रेशन अधिकारियों के फैसले को सही ठहराया है। अदालत ने कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड और मामले की परिस्थितियों को देखते हुए महिला को भारत में प्रवेश से रोकना उचित था।
इसके साथ ही कोर्ट ने भारतीय नागरिक प्रदीप बोस की ओर से दाखिल याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपनी बांग्लादेशी पत्नी और नाबालिग बेटे को भारत आने की अनुमति देने की मांग की थी।
मामले की सुनवाई जस्टिस कृष्ण राव की पीठ ने की।
पति ने अधिकारियों को दिया था अभ्यावेदन
याचिकाकर्ता प्रदीप बोस ने अपनी पत्नी और नाबालिग बेटे को भारत में प्रवेश की अनुमति देने के लिए अधिकारियों के समक्ष 5 सितंबर को अभ्यावेदन दिया था।
याचिका में दावा किया गया कि उनकी पत्नी शादी के बाद भारतीय नागरिक की पत्नी के रूप में भारत आती-जाती रही हैं और उनके पास भारत आने के लिए वैध वीजा भी था।
मल्टीपल-एंट्री X-1 वीजा पर आती थीं भारत
अदालत को बताया गया कि शादी के बाद महिला को भारतीय नागरिक की पत्नी के रूप में मल्टीपल-एंट्री X-1 वीजा जारी किया गया था।
रिकॉर्ड के अनुसार, उन्हें आखिरी बार 25 सितंबर 2025 को वीजा जारी किया गया था, जो 24 सितंबर 2026 तक वैध था।
महिला अप्रैल 2026 में बांग्लादेश गई थीं। इसके बाद जब वह 23 अगस्त 2026 को भारत लौट रही थीं, तब इमिग्रेशन अधिकारियों ने उन्हें भारत में प्रवेश देने से इनकार कर दिया।
पति की ओर से बिना कारण प्रवेश रोकने का आरोप
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में दलील दी गई कि महिला भारत और बांग्लादेश के बीच आती-जाती रहती हैं।
वकील ने आरोप लगाया कि इमिग्रेशन अधिकारियों ने महिला को भारत में प्रवेश से रोकते समय उचित कारण नहीं बताया। यह भी कहा गया कि भारत में प्रवेश की अनुमति देने के लिए अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत अभ्यावेदन पर उचित तरीके से विचार नहीं किया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से इसी आधार पर अदालत से हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
भारतीय दस्तावेज हासिल करने का आरोप
मामले में Foreigners Registration Office (FRO) की ओर से भी रिपोर्ट दाखिल की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, प्रदीप बोस की पत्नी श्राबंती चौधरी बांग्लादेशी नागरिक हैं और उनका बांग्लादेशी पासपोर्ट 7 सितंबर 2027 तक वैध है।
अधिकारियों की ओर से यह आरोप लगाया गया कि बांग्लादेशी नागरिक होने के बावजूद चौधरी ने कथित तौर पर धोखाधड़ी के जरिए भारत के वोटर कार्ड और पैन कार्ड जैसे दस्तावेज हासिल किए थे।
अधिकारियों ने इसी पृष्ठभूमि में उन्हें भारत में प्रवेश की अनुमति नहीं दी।
इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 का हवाला
अधिकारियों की ओर से पेश वकील ने हाईकोर्ट को बताया कि कुछ परिस्थितियों में किसी विदेशी नागरिक के भारत में प्रवेश को Immigration and Foreigners Act, 2025 के प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित किया जा सकता है।
अदालत के समक्ष उपलब्ध रिकॉर्ड, अधिकारियों की रिपोर्ट और मामले की परिस्थितियों पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने इमिग्रेशन अधिकारियों के निर्णय में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
हाईकोर्ट ने याचिका की खारिज
कलकत्ता हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री के आधार पर महिला को भारत में प्रवेश से रोकने के अधिकारियों के फैसले को उचित माना और भारतीय पति प्रदीप बोस की याचिका खारिज कर दी।
इस मामले में महिला द्वारा कथित रूप से भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए जाने का आरोप अधिकारियों की रिपोर्ट का हिस्सा था। हाईकोर्ट का निर्णय उपलब्ध रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर इमिग्रेशन अधिकारियों के निर्णय में हस्तक्षेप न करने पर केंद्रित रहा।
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