MRP से अधिक कीमत पर बीयर बेचने पर हिमाचल उपभोक्ता आयोग की सख्ती, दुकानदार को 12,500 रुपये देने का आदेश

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MRP से अधिक वसूली ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’

हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा में MRP 155 रुपये वाली बीयर 230 रुपये में बेचने पर उपभोक्ता आयोग ने शराब दुकान और सेल्समैन को 75 रुपये रिफंड और 12,500 रुपये देने का आदेश दिया।

हिमाचल प्रदेश के एक उपभोक्ता आयोग ने MRP से अधिक कीमत पर बीयर बेचने के मामले में शराब की दुकान और उसके सेल्समैन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने दुकान और सेल्समैन को ग्राहक से वसूले गए अतिरिक्त 75 रुपये वापस करने तथा 12,500 रुपये का भुगतान करने का निर्देश दिया है।

आयोग ने कहा कि किसी पैकेज्ड कमोडिटी या एक्साइज उत्पाद को उस पर अंकित अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) से अधिक कीमत पर बेचना Legal Metrology Act, Consumer Protection Act और राज्य के आबकारी नियमों का गंभीर उल्लंघन है।

MRP से अधिक वसूली ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’

उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष हेमांशु मिश्रा तथा सदस्य आरती सूद और नारायण ठाकुर ने कहा कि MRP से अधिक कीमत वसूलना Consumer Protection Act, 2019 की धारा 2(47) के तहत ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) है। आयोग ने इसे सेवा में गंभीर कमी भी माना।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि MRP से अधिक राशि वसूलना अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है और ग्राहक को खरीद की रसीद देने से इनकार करना कथित अवैध व्यापारिक गतिविधियों को छिपाने के इरादे की ओर भी संकेत करता है।

कांगड़ा में 155 रुपये की बीयर के लिए वसूले 230 रुपये

शिकायत के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 को शिकायतकर्ता कांगड़ा स्थित एक शराब की दुकान पर गया और वहां से बीयर की एक बोतल खरीदी।

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बोतल पर 155 रुपये MRP अंकित था, लेकिन सेल्समैन ने ग्राहक से 230 रुपये वसूल किए। इस तरह ग्राहक से निर्धारित MRP से 75 रुपये अधिक लिए गए।

ग्राहक ने जब इस पर आपत्ति जताई तो आरोप है कि सेल्समैन ने कहा कि वह दुकान के मालिक के निर्देश पर यह रकम वसूल रहा है।

शिकायतकर्ता के अनुसार, सेल्समैन ने उसे खरीद की रसीद देने से भी इनकार कर दिया।

इसके बाद ग्राहक ने सेवा में गंभीर कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार का आरोप लगाते हुए उपभोक्ता आयोग का रुख किया और अतिरिक्त वसूली की रकम वापस करने के साथ मुआवजे की मांग की।

दुकान और सेल्समैन की ओर से कोई जवाब नहीं

शराब दुकान और उसके सेल्समैन को आयोग की ओर से नोटिस भेजा गया, लेकिन वे कार्यवाही में उपस्थित नहीं हुए। इसके बाद आयोग ने मामले को एकतरफा (ex-parte) आगे बढ़ाया।

आयोग ने कहा कि विपक्षी पक्षों को वैध तरीके से नोटिस दिए जाने के बावजूद उन्होंने शिकायत का विरोध नहीं किया। इसलिए शिकायतकर्ता द्वारा पेश किए गए साक्ष्य अप्रत्युत्तरित और चुनौतीहीन रहे।

आयोग ने कहा कि शिकायतकर्ता के साक्ष्य विश्वसनीय और ठोस हैं तथा उन्हें अविश्वसनीय मानने का कोई कानूनी या तथ्यात्मक आधार सामने नहीं आया।

MRP 155 रुपये, बिक्री कीमत 230 रुपये साबित

आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता ने यह स्थापित कर दिया कि उससे 155 रुपये MRP वाले उत्पाद के लिए 230 रुपये वसूले गए।

आयोग ने यह भी माना कि खरीद की रसीद जारी करने से कथित इनकार इस बात को और गंभीर बनाता है कि व्यापारिक लेनदेन को छिपाने का प्रयास किया गया।

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आबकारी विभाग को भी कार्रवाई के लिए आदेश

आयोग ने लाइसेंस प्राप्त शराब विक्रेता द्वारा की गई कथित अवैध ओवरचार्जिंग और आबकारी नियमों की कथित अवहेलना की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए अपने आदेश की एक प्रति अतिरिक्त आयुक्त, आबकारी एवं कराधान विभाग, धर्मशाला को भेजने का निर्देश दिया।

आयोग ने विभाग से नियमों के अनुसार “कड़ी विभागीय और दंडात्मक कार्रवाई” करने को कहा है।

उपभोक्ताओं के लिए क्या है संदेश?

इस मामले से स्पष्ट है कि किसी पैकेज्ड उत्पाद पर अंकित MRP से अधिक कीमत वसूलना उपभोक्ता कानून के तहत कार्रवाई का आधार बन सकता है। ऐसी वसूली को परिस्थितियों के अनुसार अनुचित व्यापार व्यवहार और सेवा में कमी माना जा सकता है।

उपभोक्ता को MRP से अधिक राशि वसूले जाने पर बिल या रसीद, पैकेजिंग और भुगतान से जुड़े प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए। इन दस्तावेजों के आधार पर उपभोक्ता उचित मंच के समक्ष शिकायत कर सकता है।

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