गलत माप का कस्टमाइज्ड सोफा देना फर्नीचर दुकान को पड़ा महंगा, आयोग ने ग्राहक को ₹83,000 ब्याज सहित लौटाने का आदेश

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उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी माना

बेंगलुरु के उपभोक्ता आयोग ने गलत माप का कस्टमाइज्ड सोफा देने और रिफंड से इनकार करने पर फर्नीचर दुकान को ग्राहक के ₹83,000 सालाना 6% ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया। दुकान को ₹3,000 मुआवजा और ₹2,000 मुकदमे का खर्च भी देना होगा।

बेंगलुरु: कस्टमाइज्ड फर्नीचर के ऑर्डर में ग्राहक की बताई गई माप का पालन नहीं करना एक फर्नीचर दुकान को महंगा पड़ गया। बेंगलुरु के बैंगलोर अर्बन-II अतिरिक्त जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने गलत माप का सोफा देने और रिफंड से इनकार करने के मामले में दुकान को ग्राहक के ₹83,000 ब्याज सहित लौटाने का आदेश दिया है। इसके अलावा, ग्राहक को मानसिक परेशानी के लिए ₹3,000 मुआवजा और मुकदमे के खर्च के रूप में ₹2,000 देने का निर्देश दिया गया है।

आयोग ने माना कि सहमत माप के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध नहीं कराना और शिकायत के बावजूद उचित समाधान न देना सेवा में कमी तथा अनुचित व्यापार व्यवहार के दायरे में आता है।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला बेंगलुरु निवासी रत्नेश निगम और एक फर्नीचर दुकान के बीच विवाद से जुड़ा है। शिकायत के अनुसार, निगम ने 16 फरवरी 2025 को दुकान से एक सोफा सेट ऑर्डर किया था। इसमें तीन सीट वाला एक सोफा और दो सिंगल-सीटर सोफे शामिल थे।

इस खरीदारी के लिए उन्होंने क्रेडिट कार्ड की EMI सुविधा के माध्यम से कुल ₹83,000 का भुगतान किया था।

ग्राहक ने फर्नीचर में अपनी पसंद के अनुसार तीन बदलाव भी करवाए थे। इनमें बेज रंग का कपड़ा, सीट की गहराई 22 इंच से बढ़ाकर 23 इंच करना और लकड़ी के फ्रेम पर डार्क वॉलनट फिनिश देना शामिल था।

सिंगल-सीटर सोफे की चौड़ाई 10 इंच ज्यादा निकली

रत्नेश निगम के मुताबिक, दुकान के सेल्स एग्जीक्यूटिव रमेश ने व्हाट्सऐप पर सिंगल-सीटर सोफे की माप साझा की थी। इसके अनुसार, सोफे की लंबाई 41 इंच, चौड़ाई 37 इंच और ऊंचाई 41 इंच होनी थी।

लेकिन डिलीवरी के बाद ग्राहक ने पाया कि सोफे की वास्तविक माप अलग थी। शिकायत के अनुसार, सोफे की लंबाई 37 इंच, चौड़ाई 47 इंच और ऊंचाई 38 इंच थी।

इस तरह चौड़ाई बताई गई माप से 10 इंच अधिक थी। ग्राहक का कहना था कि इस अंतर के कारण सोफे उसके कमरे में ठीक से फिट नहीं हो रहे थे।

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उसने यह भी आरोप लगाया कि सेल्स एग्जीक्यूटिव ने बाद में गलत माप साझा किए जाने की बात स्वीकार की थी। ग्राहक के अनुसार, सोफे की चौड़ाई कम कराने से पूरे सेट के डिजाइन और एकरूपता पर असर पड़ सकता था। इसलिए उसने मरम्मत या बदलाव के बजाय पूरी रकम वापस मांगी।

दुकान ने कस्टमाइज्ड फर्नीचर की नीति का दिया हवाला

फर्नीचर दुकान ने अपने बचाव में कहा कि 47 इंच की चौड़ाई सोफे के डिजाइन और अनुपात को ध्यान में रखकर रखी गई थी। दुकान का दावा था कि ग्राहक को इस बदलाव के बारे में बताया गया था और उसने मौखिक सहमति भी दी थी।

दुकान के अनुसार, सोफे में आवश्यक बदलाव करके समस्या का समाधान किया जा सकता था। उसने सोफे वापस लेकर उनमें सुधार करने की पेशकश भी की थी, लेकिन ग्राहक ने इस प्रक्रिया में सहयोग नहीं किया।

दूसरी ओर, ग्राहक ने रिफंड के लिए संदेशों और ईमेल के जरिए कई बार संपर्क किया। इसके बाद उसने 25 अप्रैल 2025 को कानूनी नोटिस भेजा। दुकान ने 8 मई 2025 को जवाब देते हुए रकम लौटाने से इनकार कर दिया।

उपभोक्ता आयोग ने सेवा में कमी माना

मामले की सुनवाई के दौरान आयोग ने शिकायत, दुकान के जवाब और दोनों पक्षों के दस्तावेजों पर विचार किया। आयोग ने इस तथ्य पर ध्यान दिया कि दुकान ने सिंगल-सीटर सोफे की चौड़ाई 47 इंच रखे जाने की बात स्वीकार की थी।

आयोग के अनुसार, ग्राहक की बताई गई माप और डिलीवर किए गए उत्पाद की माप में महत्वपूर्ण अंतर था। इसके बावजूद विवाद का उचित समाधान नहीं किया गया और ग्राहक को भुगतान की गई रकम वापस नहीं मिली।

आयोग ने दुकान के आचरण को सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार मानते हुए ग्राहक की शिकायत स्वीकार की।

आयोग ने सोफा सेट पर दो साल की वारंटी का भी उल्लेख किया और कहा कि ग्राहक की शिकायत का उचित समाधान किया जाना चाहिए था।

ग्राहक को कितनी रकम मिलेगी?

आयोग ने फर्नीचर दुकान को निम्नलिखित भुगतान करने का आदेश दिया:

  • ₹83,000: सोफा सेट की पूरी खरीद राशि वापस करने के लिए।
  • 6% सालाना ब्याज: 16 फरवरी 2025 से वास्तविक भुगतान की तारीख तक।
  • ₹3,000: मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए मुआवजा।
  • ₹2,000: मुकदमे के खर्च के रूप में।
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इसके अतिरिक्त, दुकान को सोफा सेट ग्राहक से वापस लेने का निर्देश दिया गया है।

इस प्रकार ग्राहक को मूल राशि के अतिरिक्त ₹5,000 मुआवजे और मुकदमे के खर्च के रूप में मिलेंगे। ब्याज सहित कुल भुगतान ₹88,000 से अधिक होगा। अंतिम राशि भुगतान की तारीख के आधार पर तय होगी।

फैसले का कानूनी महत्व

यह मामला उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से महत्वपूर्ण है। कस्टमाइज्ड उत्पाद होने मात्र से विक्रेता को सहमत शर्तों से अलग सामान देने या ग्राहक की शिकायत का समाधान किए बिना रिफंड से इनकार करने का स्वतः अधिकार नहीं मिल जाता।

हालांकि, हर कस्टमाइज्ड उत्पाद के मामले में रिफंड अनिवार्य नहीं होता। विवाद का निर्णय ऑर्डर की शर्तों, ग्राहक की सहमति, उत्पाद में अंतर और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर किया जाता है।

निष्कर्ष: बेंगलुरु के उपभोक्ता आयोग ने गलत माप का सोफा देने और शिकायत का उचित समाधान नहीं करने पर फर्नीचर दुकान को ₹83,000 ब्याज सहित लौटाने तथा ₹5,000 अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया। यह फैसला दर्शाता है कि कस्टमाइज्ड फर्नीचर की बिक्री में भी ग्राहक के साथ तय शर्तों का पालन करना आवश्यक है।

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