भारतीय संविधान अपने आप में एक ‘परंपरा तोड़ने वाला’, क्या विषमलैंगिकता विवाह का एक प्रमुख तत्व है ? संविधान पीठ – SC

सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिक विवाहों को कानूनी मान्यता देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि भारतीय संविधान अपने आप में एक ‘परंपरा तोड़ने वाला’ है। विवाह में एक बहुत ही महत्वपूर्ण घटक के रूप में संतानोत्पत्ति थी, हालाँकि विवाह की वैधता इस पर सशर्त नहीं थी। भारत के मुख्य न्यायाधीश की संविधान पीठ … Read more

क्या होती है अक्ल दाढ़? बॉम्बे HC ने नाबालिग से रेप के जुर्म में 10 साल की सजा पाए आरोपी को किया बरी

बॉम्बे HC ने नाबालिग से रेप का दोषी ठहराए गए शख्स को बरी कर दिया. दरअसल पीड़िता को नाबालिग साबित करने के लिए अक्ल दाढ़ न होने का हवाला दिया जा रहा था. इस पर कोर्ट ले कहा कि अक्ल दाढ़ न होना रेप पीड़िता की उम्र साबित करने के लिए एक निर्णायक सबूत नहीं … Read more

एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग कानून में आया बदलाव, चार्टर्ड अकाउंटेंट बने ‘रिपोर्टिंग एंटिटी’, CA-CS और कॉस्ट अकाउंटेंट भी PMLA कानून के दायरे में

तमाम चीनी कंपनियों की जांच के बाद आया कि चार्टेड अकाउंटेंट, कास्ट एकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरी ने कथित रूप से मनी लॉन्ड्रिंग और अवैध फंडिंग में चाइनीज जालसाजों की मदद की थी। चीनी शेल कंपनियों के गठन के मामले में 2022 में 400 से अधिक सीए और कंपनी सचिव जांच के दायरे में आए थे। … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम के तहत सुरक्षात्मक घरों में हिरासत में लिए गए यौनकर्मियों को रिहा करने का आदेश दिया

सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम Immoral Traffic (Prevention) Act के तहत हिरासत में लिए गए और सुरक्षात्मक घरों में रहने वाले वयस्क यौनकर्मी अपनी मर्जी से बाहर जाने के लिए स्वतंत्र थे। न्यायमूर्ति बी.आर. गवई, न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संजय करोल ने देश भर की राज्य सरकारों को … Read more

सुप्रीम कोर्ट: निर्धारिती, ‘कार्य अनुबंध’ पर सेवा कर के लिए संपूर्ण अनुबंध मूल्य का दावा करने का हकदार नहीं है

Assesse is Not Entitled To Claim Entire Contract Value For Service Tax On Works Contract: SC सर्वोच्च न्यायालय ने सीमा शुल्क उत्पाद शुल्क और सेवा कर अपीलीय न्यायाधिकरण (CESTAT) के आदेश को खारिज करते हुए कहा कि निर्धारिती कुल अनुबंध मूल्य लेने का हकदार नहीं है जिसमें माल और सेवाएं दोनों शामिल हैं और मूल्य … Read more

POCSO ACT: रोमांटिक, सहमति से संबंध को दंडित नहीं किया जाना चाहिए: बॉम्बे HC ने 25 वर्षीय व्यक्ति को जमानत दी

हाई कोर्ट ने कहा कि चूंकि घटना के समय लड़का भी छोटा (22 वर्ष) था, इसलिए उसके और नाबालिग लड़की के बीच सहमति से यौन संबंध को POCSO ACT के कड़े प्रावधानों के तहत दंडित करने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि यह इसके वास्तविक उद्देश्य को विफल कर देगा। बॉम्बे हाई कोर्ट ने कहा है … Read more

पत्नी द्वारा ऐसे आरोप जो पति के प्रतिष्ठा को प्रभावित करते हैं, मानसिक क्रूरता के समान और तलाक मांगने का आधार: सुप्रीम कोर्ट

भारत में शादी करने को चाहे जितना भी आसान बना दिया जाये लेकिन तलाक लेना उतना ही मुश्किल है तलाक अगर आपसी सहमति से हो जाये तो अच्छा है वरना ये प्रोसेस बहोत लम्बा होने वाला है। क्योकि जब मामला कोर्ट में पहुँचता है तो केस कितना लम्बा नहीं बता सकता। सुप्रीम कोर्ट ने कहा … Read more

अभियुक्त को केवल इसलिए डिफ़ॉल्ट जमानत नहीं दी जा सकती, क्योंकि वैध प्राधिकरण की मंजूरी के बिना चार्जशीट दायर की गई है: सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च अदालत ने एक मामले में फैसला सुनते हुए कहा कि एक आरोपी व्यक्ति को केवल इसलिए डिफ़ॉल्ट जमानत नहीं दी जा सकती है क्योंकि एक वैध प्राधिकरण की मंजूरी के बिना चार्जशीट दायर की जाती है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति डॉ डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला की पीठ द्वारा दिए गए एक फैसले … Read more

केंद्र द्वारा 13 नए न्यायाधीशों की नियुक्ति और उच्च न्यायालयों के 2 न्यायाधीशों के स्थानांतरण समेत कलकत्ता HC के CJ को अधिसूचित किया

भारत के संविधान के अनुच्छेद 217 के खंड (1) द्वारा प्रदत्त शक्ति को प्रयोग करते हुए माननीया राष्ट्रपति ने श्री जस्टिस तिरुनेलवेली सुब्बैया शिवगणनम, को कलकत्ता उच्च न्यायालय, मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया है। विधि और न्याय मंत्रालय ने उच्च न्यायालयों के न्यायाधीशों के रूप में 11 न्यायिक अधिकारियों और 2 अधिवक्ताओं की नियुक्ति को … Read more

विवाह का असाध्य टूटना: संविधान के ‘अनुच्छेद 142’ के तहत ‘विवाह को भंग करने का आधार’- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया कि वह संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल कर सकता है ताकि वह असुधार्य टूटन के आधार पर विवाह को भंग कर सके। संविधान का अनुच्छेद 142 उसके समक्ष लंबित किसी भी मामले में “पूर्ण न्याय” करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और … Read more