“चाहे प्रेम विवाह हो या अरेंज मैरिज”, विभिन्न कारक रिश्ते को करते हैं प्रभावित, HC ने हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक के आधार में संशोधन की आवश्यकता जताई

Hindu Marriage Act: इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इसमें तलाक के आधार में संशोधन की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि अपूरणीय विवाह विच्छेद को भी आधार बनाया जाना चाहिए। कोर्ट ने कहा, “चाहे प्रेम विवाह हो या अरेंज मैरिज, विभिन्न कारक रिश्ते को प्रभावित करते हैं। इलाहाबाद … Read more

हिंदू विवाह अधिनियम: धारा 11 (शून्य विवाह) की याचिका पर धारा 12 (शून्यकरणीय विवाह) के आधार पर निर्णय नहीं किया जा सकता – इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने यूपी पुलिस रेडियो ऑपरेटर भर्ती रद्द करने का आदेश किया खारिज

इलाहाबाद उच्च न्यायालय एक मामले के सुनवाई के दौरान माना कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 11 (शून्य विवाह, Void Marriages) के तहत ‌‌दिए गए आधार धारा 12 (शून्यकरणीय विवाह, Voidable Marriages) के तहत दिए गए आधारों से बहुत अलग हैं और इस प्रकार, अधिनियम की धारा 11 के तहत दायर याचिका पर धारा … Read more

बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका दायर करके पति को अपनी नाबालिग पत्नी की कस्टडी के दावा करने का कोई अंतर्निहित अधिकार नहीं है: पटना HC

पटना उच्च न्यायालय ने माना कि एक पति के पास बंदी प्रत्यक्षीकरण रिट याचिका दायर करके अपनी नाबालिग पत्नी की कस्टडी के दावा करने का अंतर्निहित अधिकार नहीं है। कोर्ट ने राजकीय बालिका देखभाल गृह में रहने वाली अपनी नाबालिग पत्नी की कस्टडी के दावा की मांग करने वाली पति द्वारा दायर याचिका पर विचार … Read more

“शादी पूरी ना होना और शारीरिक अंतरंगता से इनकार करना मानसिक क्रूरता के बराबर, हिंदू विवाह अधिनियम के तहत तलाक लेने का वैध आधार : HC

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में एक अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि एक महिला द्वारा अपने पति के साथ शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना “मानसिक क्रूरता” है और यह उसके लिए (पति) हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत तलाक लेने का वैध आधार है। न्यायमूर्ति शील नागू और न्यायमूर्ति विनय सराफ की … Read more

पकड़ौआ ब्याह रद्द करने के पटना हाईकोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, 7 फेरे के बिना अमान्य हुई थी शादी

पकड़ौआ विवाह

बिहार में पकड़ौआ विवाह की पुरानी परंपरा है. कभी लड़के को किडनैप करके जबरन कराई जाने वाली ऐसी शादियां धड़ल्ले से होती थीं जो समय कम हो गईं लेकिन अभी भी खत्म नहीं हुई हैं. सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह की पीठ ने इसके साथ ही मामले में संबंधित पक्षकारों … Read more

“आप उच्च न्यायालय क्यों नहीं जाते? इसे (सुप्रीम कोर्ट को) पहली बार की अदालत न बनाएं, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 (वी) की शुद्धता पर सवाल उठाने वाली याचिका पर कहा

न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह

शीर्ष अदालत ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 5 (वी) की शुद्धता पर सवाल उठाने वाली याचिका पर सुनवाई करने से शुक्रवार को इनकार कर दिया, जो सपिंडा रिश्तेदारों (दूर के चचेरे भाई / रिश्तेदारों) के बीच विवाह को प्रतिबंधित करता है। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने आज इस … Read more

पति को पत्नी के साथ ‘किराए की संपत्ति’ या ‘बंधुआ मजदूर’ जैसा व्यवहार नहीं करना चाहिए, HC ने और क्या-क्या कहा जाने

Chatis Hc Org

अगर पति बिना किसी पर्याप्त कारण के पत्नी को अलग रखना चाहता है और पत्नी इसका विरोध कर रही है तो ये क्रूरता नहीं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायलय द्वारा Chhattisgarh High Court एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि वैवाहिक घर में पत्नी के साथ किराए की संपत्ति या बंधुआ मजदूर जैसा व्यवहार नहीं किया … Read more

शादी का अपूरणीय विच्छेद अनुच्छेद 142 के तहत तलाक का सीधा-सीधा फॉर्मूला नहीं’- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विवाह में रहना एक पवित्र और अमूल्य भावनात्मक जीवन-जाल है

supreme-court-4

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस बेला एम त्रिवेदी की बेंच ने कहा है कि शादी के अपूरणीय टूटने के आधार पर तलाक हमेशा वांछनीय नहीं होता है, खासकर भारत में। उस संदर्भ में, न्यायालय ने कहा कि “अदालतों में तलाक की कार्यवाही दायर करने की बढ़ती प्रवृत्ति के बावजूद, विवाह की संस्था … Read more

विवाह विच्छेद के आधार पर पारिवारिक कोर्ट तलाक का आदेश नहीं दे सकता: हाई कोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि फैमिली कोर्ट को हिंदू विवाह अधिनियम Hindu Marriage Act के तहत तलाक से जुड़े प्रावधानों के अनुसार आदेश देना चाहिए। दिल्ली उच्च न्यायलय Delhi High Court ने स्पष्ट किया कि पारिवारिक अदालतें Family Court शादी के अपूरणीय टूटने के आधार पर तलाक नहीं दे सकती हैं। न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा और न्यायमूर्ति … Read more

आईपीसी धारा 494 के तहत अपराध के लिए दूसरी शादी के कार्यक्रमों का सबूत चाहिए: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक आवेदन को स्वीकार करते हुए कहा कि यह अच्छी तरह से स्थापित है कि आईपीसी की धारा 494 के तहत अपराध का गठन करने के लिए, यह आवश्यक है कि दूसरी शादी उचित समारोहों और उचित रूप में मनाई जानी चाहिए। हिंदू कानून के तहत ‘सप्तपदी’ समारोह वैध विवाह के … Read more