सर्वोच्च न्यायालय ने मद्रास HC के फैसले को पलटते हुए विवाहों में अधिवक्ताओं की भूमिका स्पष्ट की

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने एक विवादास्पद कानूनी बहस को समाप्त करते हुए, हिंदू विवाह अधिनियम 1955 के तहत विवाह संपन्न कराने में अधिवक्ताओं की भूमिका को स्पष्ट कर दिया है। कुछ मीडिया रिपोर्टों के विपरीत, न्यायालय ने वकीलों को उनकी व्यावसायिक क्षमता में विवाह संपन्न कराने की अनुमति नहीं दी है, लेकिन कानूनी पेशेवरों … Read more

वकील अपनी व्यक्तिगत क्षमता से आत्म-सम्मान विवाह करवा सकते है इसके लिए सार्वजनिक अनुष्ठान या घोषणा की आवश्यकता नहीं है: सुप्रीम कोर्ट

“वकील अपनी व्यक्तिगत हैसियत से विवाह संपन्न कर सकते हैं, पेशेवर हैसियत से नहीं” सर्वोच्च न्यायालय ने सोमवार को मद्रास उच्च न्यायालय के उस फैसले को खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि तमिलनाडु में आत्म-सम्मान विवाह गोपनीयता में और अधिवक्ताओं की मौजूदगी में नहीं किया जा सकता।न्यायमूर्ति रवींद्र भट्ट और न्यायमूर्ति अरविंद कुमार … Read more

क्या गैर-वैवाहिक बच्चे हिंदू कानूनों के तहत अपने माता-पिता की पैतृक संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने 2011 से लंबित याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

सुप्रीम कोर्ट ने आज 2011 की उस याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया, जो इस जटिल कानूनी मुद्दे से संबंधित थी कि क्या गैर-वैवाहिक बच्चे हिंदू कानूनों के तहत अपने माता-पिता की पैतृक संपत्ति में हिस्सेदारी के हकदार हैं। मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ … Read more

पर्याप्त कारण के बिना जीवनसाथी को लंबे समय तक यौन संबंध बनाने की अनुमति नहीं देना मानसिक क्रूरता है: इलाहाबाद हाईकोर्ट

allahabad high court

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक पुरुष को तलाक की डिक्री देते हुए कहा है कि पर्याप्त कारण के बिना पति या पत्नी को लंबे समय तक यौन संबंध बनाने की अनुमति न देना मानसिक क्रूरता है। न्यायमूर्ति सुनीत कुमार और न्यायमूर्ति राजेंद्र कुमार की एक खंडपीठ ने कहा, “निस्संदेह, लंबे समय तक एक पति या … Read more

Hindu Marriage Act: एक विवाह जो अपरिवर्तनीय रूप से टूट गया है वह दोनों पक्षों के लिए क्रूरता है – सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने एक अपील में कहा है कि हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत एक शादी जो अपरिवर्तनीय रूप से टूट गई है, दोनों पक्षों यानी पति और पत्नी के लिए क्रूरता है। कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई अदालतों की लड़ाई और बार-बार मध्यस्थता और सुलह में विफलता कम से … Read more

हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 13बी(2) छह महीने की कूलिंग अवधि निदेशिका, अनिवार्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय की ग्वालियर बेंच ने हाल ही में सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 बी (2) के तहत अर्जी दाखिल करने और अनुमति देने के बीच छह महीने की कूलिंग अवधि की आवश्यकता निदेशिका (डायरेक्ट्री) है, न कि अनिवार्यता । कोर्ट उस याचिका पर विचार कर रहा … Read more

तलाक पूर्व पति का निवास छोड़ने वाली महिला वहां रहने का अधिकार भी खो देती है : बॉम्बे एचसी

एक महिला जो तलाक के लिए अपने पति का घर छोड़ देती है, बाद में उसी घर में ‘निवास का अधिकार’ मांगने का अधिकार भी खो देती है, भले ही तलाक के खिलाफ उसकी याचिका घरेलू हिंसा से महिला संरक्षण अधिनियम 2005 के तहत लंबित हो। बॉम्बे उच्च न्यायलय की औरंगाबाद बेंच ने यह फैसला … Read more

क्या अनुच्छेद 142 की शक्तियों का इस्तेमाल कर पारिवारिक न्यायलय जाने से पहले ही भंग की जा सकती है शादी? SC में सुनवाई-

सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सुनवाई के दौरान कहा की दो बहुत अच्छे लोग अच्छे साथी नहीं हो सकते हैं। कई बार हमारे सामने ऐसे मामले आते हैं जहां लोग काफी समय तक साथ रहते हैं और फिर शादी टूट जाती है। संविधान के अनुच्छेद 142 Article 142 of Indian Constitution के तहत शक्ति के … Read more

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा: वैवाहिक अधिकारों की बहाली का उद्देश्य केवल यौन गतिविधि की अनुमति देने के बजाय विवाह को बनाए रखना है-

हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 9 और विशेष विवाह अधिनियम की धारा 22 को निरस्त करने के लिए याचिका दायर की गई थी। इसके अतिरिक्त, वैवाहिक अधिकारों की बहाली के प्रवर्तन के लिए नागरिक प्रक्रिया संहिता के प्रावधानों के आदेश XXI नियम 32 और 33 के आवेदन को अमान्य करने का प्रयास किया गया था। … Read more

HC ने वर्चुअल मोड में पावर ऑफ़ अटोर्नी के माध्यम से विवाह को दी मंजूरी, कहा अगर सीता की स्वर्ण प्रतिमा उनकी शारीरिक उपस्थिति का विकल्प हो सकती है तो आभासी तरीके से विवाह क्यों नहीं-

मद्रास हाईकोर्ट Madras High Court के मदुराई बेंच ने अपने समक्ष आये एक याचिका में अद्भुत्त निर्णय सुनाया कि, अगर सीता की स्वर्ण प्रतिमा उनकी शारीरिक उपस्थिति का विकल्प हो सकती है, तो आभासी उपस्थिति vertual mode के माध्यम से विवाह को पंजीकृत क्यों नहीं किया जा सकता है। न्यायमूर्ति जीआर स्वामीनाथन की बेंच ने … Read more