‘Love Jihad’ marriage deception case: महिला और उसकी बेटी के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश, ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश-HC

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धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने के मामले में : महिला को राहत, हाईकोर्ट ने ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण और पिछले पांच वर्षों के ₹10.60 लाख बकाया भुगतान करने का निर्देश

इंदौर हाईकोर्ट ने पहचान छिपाकर विवाह करने के आरोप वाले मामले में महिला और उसकी बेटी के पक्ष में बड़ा फैसला सुनाया। अदालत ने आरोपी को ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण और पिछले पांच वर्षों के ₹10.60 लाख बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया।

इंदौर हाईकोर्ट से महिला को बड़ी राहत

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने कथित रूप से धार्मिक पहचान छिपाकर विवाह करने के मामले में महिला और उसकी बेटी के पक्ष में महत्वपूर्ण आदेश पारित किया है। अदालत ने आरोपी व्यक्ति को महिला और उसकी पुत्री के लिए कुल ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देने तथा पिछले पांच वर्षों का ₹10.60 लाख बकाया भुगतान करने का निर्देश दिया है।

क्या है मामला?

महिला के अधिवक्ता विनय जोशी के अनुसार, मामला इंदौर निवासी गब्बर उर्फ Mustafa Bohra से संबंधित है। आरोप है कि वर्ष 2020 में कोविड काल के दौरान उसने अपनी धार्मिक पहचान छिपाकर एक हिंदू महिला से विवाह किया।

याचिका के अनुसार, आरोपी ने स्वयं को हिंदू बताकर मंदिर में विवाह की रस्में निभाईं, महिला को मंगलसूत्र पहनाया और सिंदूर लगाकर शादी की। बाद में महिला गर्भवती हुई, जिसके पश्चात उसे आरोपी की वास्तविक पहचान की जानकारी मिली।

2021 में दर्ज कराई थी शिकायत

महिला ने वर्ष 2021 में इंदौर के Dwarkapuri Police Station में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के बाद दोनों अलग-अलग रहने लगे।

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इसके बाद महिला ने भरण-पोषण और अन्य कानूनी राहतों के लिए न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।

फैमिली कोर्ट ने केवल बच्चे के लिए दिया था भरण-पोषण

इस मामले में पहले फैमिली कोर्ट ने महिला को पत्नी के रूप में मान्यता देने से इनकार कर दिया था। अदालत ने केवल बच्ची के भरण-पोषण के लिए आरोपी को ₹2,000 प्रतिमाह देने का आदेश दिया था।

महिला ने इस आदेश को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की।

हाईकोर्ट ने बढ़ाई भरण-पोषण राशि

22 जून को पारित आदेश में हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के निर्णय में संशोधन करते हुए आरोपी को—

  • महिला के लिए ₹10,000 प्रतिमाह,
  • बेटी के लिए ₹10,000 प्रतिमाह,

कुल ₹20,000 प्रतिमाह भरण-पोषण देने का निर्देश दिया।

इसके अतिरिक्त, अदालत ने पिछले पांच वर्षों के बकाया भरण-पोषण के रूप में ₹10.60 लाख का भुगतान करने का भी आदेश दिया।

फैसले का महत्व

यह आदेश उन मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां विवाह की वैधता या पक्षकारों की पहचान को लेकर विवाद हो, लेकिन महिला और बच्चे के भरण-पोषण का प्रश्न सामने हो। हाईकोर्ट ने बच्चे के हितों और महिला की आर्थिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए राहत प्रदान की है।

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