राम मंदिर चढ़ावा गबन मामला: एफआईआर दर्ज, सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा विवाद

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भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिनमें धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) एफआईआर दर्ज

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी के मामले में यूपी सरकार के निर्देश पर एफआईआर दर्ज की गई है। कई लोगों को नामजद किया गया है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई जांच की मांग वाली याचिका भी दायर हुई है।

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन का मामला

अयोध्या स्थित Ram Mandir Ayodhya में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे और दानराशि के कथित गबन के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली गई है। उत्तर प्रदेश सरकार के निर्देश पर दर्ज इस एफआईआर में कई व्यक्तियों को नामजद किया गया है।

मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जिनमें धारा 306, 316(5), 317(4), 317(5), 61 और 3(5) शामिल हैं, के तहत कार्रवाई शुरू की गई है।

किन लोगों के खिलाफ दर्ज हुई एफआईआर?

एफआईआर में निम्नलिखित लोगों के नाम शामिल किए गए हैं—

  • अनुकल्प मिश्रा
  • लवकुश मिश्रा
  • अविनाश शुक्ला
  • टिन्नू यादव
  • मनीष यादव
  • अन्य अज्ञात व्यक्ति

जांच एजेंसियां अब आरोपों की सत्यता और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच करेंगी।

यूपी सरकार ने गठित की एसआईटी

आरोप सामने आने के बाद 14 जून को उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया था।

बताया गया कि यह कदम Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के अनुरोध पर उठाया गया, ताकि आरोपों की निष्पक्ष जांच की जा सके।

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सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंचा मामला

इसी बीच, मामले को लेकर Supreme Court of India में एक नई याचिका भी दायर की गई है।

याचिका में निम्नलिखित मांगें की गई हैं—

  • मामले में एफआईआर दर्ज करने का निर्देश।
  • Central Bureau of Investigation की निगरानी में विशेष जांच दल (SIT) का गठन।
  • कथित रूप से गायब धनराशि, वित्तीय अनियमितताओं, कुप्रबंधन और अन्य अवैधताओं की जांच।
  • Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust के प्रशासनिक एवं वित्तीय कार्यों की स्वतंत्र जांच।

वर्तमान स्थिति

  • एफआईआर दर्ज हो चुकी है।
  • राज्य सरकार की एसआईटी जांच कर रही है।
  • सुप्रीम कोर्ट में न्यायिक निगरानी वाली जांच की मांग की गई है।
  • आरोपों की सत्यता और कथित वित्तीय नुकसान की वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

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