दहेज उत्पीड़न: केरल हाई कोर्ट ने सास को राहत देने से किया इनकार, अस्पष्ट आरोपों पर देवर को किया डिस्चार्ज

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दहेज उत्पीड़न मामले में सास और देवर पर हाई कोर्ट का फैसला

केरल हाई कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न मामले में सास के खिलाफ स्पष्ट आरोपों के कारण केस रद्द करने से इनकार किया, जबकि सामान्य और अस्पष्ट आरोपों के आधार पर देवर के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही खारिज कर दी।

सास को नहीं मिली राहत, देवर के खिलाफ केस खारिज

केरल हाई कोर्ट ने दहेज उत्पीड़न के एक मामले में आरोपी महिला की सास को राहत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि बहू द्वारा सास पर लगाए गए आरोप स्पष्ट और गंभीर हैं तथा उनकी सच्चाई का निर्धारण ट्रायल के दौरान सबूतों के मूल्यांकन के बाद किया जाना चाहिए।

वहीं, अदालत ने महिला के देवर के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। कोर्ट ने पाया कि देवर के खिलाफ लगाए गए आरोप सामान्य और अस्पष्ट हैं और उनमें अपराध के आवश्यक तत्व स्पष्ट रूप से सामने नहीं आते।

यह आदेश जस्टिस जॉबिन सेबेस्टियन ने 7 अगस्त को सास और देवर की ओर से दायर अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पारित किया। दोनों ने अपने खिलाफ दर्ज दहेज उत्पीड़न से संबंधित आपराधिक मामले को रद्द करने की मांग की थी।

दहेज कम लाने को लेकर सास पर ताने देने का आरोप

अदालत ने सास के खिलाफ लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया स्पष्ट और ठोस माना। शिकायत के अनुसार, सास बहू को बार-बार यह कहकर अपमानित करती थी कि उसके मायके से शादी में पर्याप्त दहेज नहीं आया।

कोर्ट ने कहा कि इन आरोपों की सच्चाई या झूठ का फैसला इस स्तर पर नहीं किया जा सकता। इसके लिए ट्रायल कोर्ट में साक्ष्यों की जांच और मूल्यांकन आवश्यक होगा।

शादी में मिले 55 सॉवरेन सोने के गहनों का मामला

मामले के अनुसार, महिला और आरोपी व्यक्ति की शादी सितंबर 2019 में हुई थी। शादी के बाद दोनों पति-पत्नी के रूप में साथ रह रहे थे।

महिला का आरोप था कि उसके माता-पिता ने शादी के समय उसे करीब 55 सॉवरेन यानी लगभग 440 ग्राम सोने के गहने दिए थे। आरोप के मुताबिक, उसके पति ने इन गहनों को अपने कब्जे में लेने के बाद अपने भाई को सौंप दिया।

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महिला ने अपनी सास पर लगातार मानसिक प्रताड़ना और अपमान करने का भी आरोप लगाया। उसके अनुसार, सास शादी के समय मायके से मिले सोने के गहनों को कम बताते हुए उसे लगातार ताने देती थी।

मोबाइल से घटना रिकॉर्ड करने पर देवर पर मारपीट का आरोप

महिला ने आरोप लगाया कि जनवरी 2020 में भी उसके साथ अपमानजनक व्यवहार किया गया। जब उसने कथित घटना को अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड करने की कोशिश की, तो उसके देवर ने उसके साथ गाली-गलौज की और उसे थप्पड़ मारा।

महिला ने यह भी आरोप लगाया कि देवर ने उसे गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी। उसके अनुसार, सास और देवर दोनों ने उस पर उसके नाम की संपत्ति बेचने के लिए दबाव बनाया और उसे धमकाया।

इन घटनाओं के कारण महिला ने मानसिक तनाव में जाने का भी दावा किया।

बचाव पक्ष ने आरोपों को बताया सामान्य और अस्पष्ट

सास और देवर की ओर से पेश अधिवक्ता पी. एंटो थॉमस ने दलील दी कि शिकायत में लगाए गए आरोप सामान्य, अस्पष्ट और पर्याप्त रूप से विशिष्ट नहीं हैं।

उन्होंने तर्क दिया कि यदि शिकायत में लगाए गए आरोपों को पूरी तरह सही मान भी लिया जाए, तब भी याचिकाकर्ताओं के खिलाफ संबंधित अपराध के आवश्यक तत्व स्थापित नहीं होते।

महिला की ओर से ठोस आरोपों का दिया गया हवाला

महिला की ओर से अधिवक्ता विष्णु भुवनेन्द्रन ने दलील दी कि शिकायत और जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री में दोनों आरोपियों के खिलाफ पर्याप्त और स्पष्ट आरोप मौजूद हैं।

उन्होंने कहा कि ससुराल पक्ष द्वारा दहेज को लेकर महिला के साथ दुर्व्यवहार और उत्पीड़न किए जाने के स्पष्ट आरोप रिकॉर्ड पर मौजूद हैं। इसलिए इस स्तर पर आपराधिक कार्यवाही को समाप्त करना उचित नहीं होगा।

सास के खिलाफ ट्रायल जारी रहेगा

केरल हाई कोर्ट ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही रद्द करने की याचिका पर विचार करते समय हाई कोर्ट का दायरा सीमित होता है। अदालत को मुख्य रूप से यह देखना होता है कि शिकायत और रिकॉर्ड पर उपलब्ध सामग्री को प्रथम दृष्टया देखने पर अपराध के आवश्यक तत्व बनते हैं या नहीं।

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कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि आरोप ऐसे तथ्यात्मक विवाद पैदा करते हैं जिनके लिए साक्ष्यों की जांच और मूल्यांकन आवश्यक है, तो उनका निर्णय ट्रायल कोर्ट द्वारा पूरी सुनवाई के बाद किया जाना चाहिए।

अदालत ने पाया कि सास के खिलाफ लगाए गए आरोप स्पष्ट हैं और प्रथम दृष्टया क्रूरता तथा दहेज उत्पीड़न से जुड़े अपराध के आवश्यक तत्वों को सामने लाते हैं। इसलिए सास के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने से अदालत ने इनकार कर दिया।

अस्पष्ट आरोपों के आधार पर देवर के खिलाफ केस जारी रखना दुरुपयोग

दूसरी ओर, हाई कोर्ट ने देवर के खिलाफ लगाए गए आरोपों को ‘वाग एंड बेल्ड’ यानी अस्पष्ट और सामान्य माना।

कोर्ट ने कहा कि केवल इस तरह के सामान्य आरोपों के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।

इसी आधार पर अदालत ने देवर के खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया, जबकि सास के खिलाफ मामला जारी रखने का आदेश दिया।

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