संवाद और सहमति की भारतीय परंपरा: CJI ने पंचायत व्यवस्था को बताया ‘मेडिएशन’ का पारंपरिक रूप

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भारत में मेडिएशन की पारंपरिक परंपरा

जयपुर में Commonwealth Peace, Mediation and Rule of Law Conference में CJI ने भारत की पंचायत परंपरा और संवाद के जरिए विवाद समाधान की संस्कृति को आधुनिक मेडिएशन से जोड़ा।

विवाद सुलझाने की भारतीय परंपरा पर CJI का जोर

जयपुर में आयोजित Commonwealth Peace, Mediation and the Rule of Law Conference में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने देश की सदियों पुरानी विवाद समाधान परंपरा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि भारत में विवादों को केवल कानूनी लड़ाई के जरिए नहीं, बल्कि संवाद, सामुदायिक भागीदारी और आपसी सहमति के माध्यम से सुलझाने की लंबी परंपरा रही है।

‘मेडिएशन’ शब्द लोकप्रिय होने से पहले ही थी यह व्यवस्था

CJI ने भारतीय पंचायत व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि जिस अवधारणा को आज मेडिएशन (Mediation) के नाम से जाना जाता है, उसका मूल भाव भारत की पारंपरिक सामाजिक व्यवस्था में पहले से मौजूद था।

पंचायतों में विवादों का समाधान केवल यह तय करने तक सीमित नहीं रहता था कि कौन सही है और कौन गलत। इसका उद्देश्य ऐसा समाधान तलाशना भी था जिससे विवाद समाप्त होने के बाद संबंधित पक्षों के बीच सामाजिक संबंध बने रहें।

पंचायत व्यवस्था में संवाद और सामुदायिक भागीदारी

CJI के अनुसार, पारंपरिक पंचायत प्रणाली में संवाद, सामुदायिक भागीदारी और सहमति के जरिए विवादों को सुलझाने का प्रयास किया जाता था। यह व्यवस्था इस विचार पर आधारित थी कि विवाद का समाधान ऐसा होना चाहिए जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो और भविष्य में उनके बीच संबंधों को बनाए रखने में मदद करे।

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विवाद खत्म करने के साथ रिश्ते बचाना भी जरूरी

मेडिएशन की मूल भावना पर प्रकाश डालते हुए CJI ने इस बात को रेखांकित किया कि विवाद समाधान का वास्तविक उद्देश्य केवल मुकदमा समाप्त करना नहीं है। महत्वपूर्ण यह भी है कि विवाद के बाद पक्षकार अपने सामाजिक, पारिवारिक या व्यावसायिक संबंधों को आगे जारी रख सकें।

भारतीय पंचायत व्यवस्था इसी दृष्टिकोण का एक पारंपरिक उदाहरण रही है, जहां विवाद का समाधान करने के साथ रिश्तों को बचाए रखने पर भी जोर दिया जाता था।

आधुनिक मेडिएशन के लिए पारंपरिक अनुभव उपयोगी

CJI की टिप्पणी यह दर्शाती है कि आधुनिक वैकल्पिक विवाद समाधान व्यवस्था (ADR) के विकास के बीच भारत की पारंपरिक विवाद समाधान प्रणालियों से भी महत्वपूर्ण सीख ली जा सकती है।

संदेश स्पष्ट है—मेडिएशन कोई पूरी तरह नई अवधारणा नहीं, बल्कि संवाद और सहमति के जरिए विवाद सुलझाने की भारतीय परंपरा का आधुनिक रूप भी है।

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