CJI सूर्य कांत का कोर्टरूम घटना पर बयान
CJI सूर्य कांत ने सुप्रीम कोर्ट में हालिया कोर्टरूम घटना पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने पुराने मामलों के निस्तारण के लिए चार विशेष पीठों के गठन और कॉलेजियम प्रणाली पर भी अपने विचार रखे।
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने सोमवार को हाल ही में अदालत कक्ष में हुई उस घटना पर पहली बार सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी, जिसमें एक युवा अधिवक्ता पर उनके खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग करने और अदालत कक्ष में दस्तावेज फेंकने का आरोप है। उन्होंने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की गरिमा और सम्मान बनाए रखना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
CJI ने यह टिप्पणी ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन (AISAA) द्वारा आयोजित एक सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए की।
‘बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं, लेकिन संस्थाओं का सम्मान बना रहना चाहिए’
मुख्य न्यायाधीश ने अपने संबोधन में कहा,
“बच्चे कई बार ऐसा कर देते हैं। लेकिन मैं यह कहना चाहता हूं कि हमें संवैधानिक संस्थाओं की मर्यादा और सम्मान बनाए रखना चाहिए। यह हम सबका दायित्व है और सभी को इसका निर्वहन करना चाहिए।”
यह पहली बार है जब CJI सूर्य कांत ने सार्वजनिक मंच से सुप्रीम कोर्ट में हुई हालिया कोर्टरूम घटना पर अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की।
पुराने मामलों के निस्तारण के लिए चार विशेष पीठों का गठन
मुख्य न्यायाधीश ने यह भी घोषणा की कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित पुराने मामलों के शीघ्र निस्तारण के उद्देश्य से चार विशेष पीठों का गठन किया गया है।
उन्होंने कहा कि नई रोस्टर व्यवस्था के तहत दो विशेष पीठें दीवानी (Civil) मामलों तथा दो विशेष पीठें आपराधिक (Criminal) मामलों की सुनवाई करेंगी। इन पीठों का मुख्य उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों का शीघ्र निस्तारण करना है।
कॉलेजियम नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी दी जानकारी
CJI सूर्य कांत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की नियुक्ति कॉलेजियम द्वारा विस्तृत और समग्र मूल्यांकन के बाद की जाती है।
उन्होंने बताया कि कॉलेजियम न्यायिक क्षमता, ईमानदारी, अनुभव और अन्य प्रासंगिक मानकों का मूल्यांकन करने के साथ-साथ विभिन्न उच्च न्यायालयों के क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और विविधता का भी ध्यान रखता है, ताकि सर्वोच्च न्यायालय देश की संवैधानिक भावना और विविधता का समुचित प्रतिनिधित्व कर सके।
नव नियुक्त और सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का किया गया सम्मान
यह समारोह सुप्रीम कोर्ट के नव नियुक्त न्यायाधीशों—न्यायमूर्ति शील नागू, न्यायमूर्ति श्री चंद्रशेखर, न्यायमूर्ति संजीव सचदेवा, न्यायमूर्ति अरुण पल्ली और न्यायमूर्ति वी. मोहना—के सम्मान में आयोजित किया गया था।
समारोह में हाल ही में सेवानिवृत्त हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति जे.के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पंकज मित्तल को भी सम्मानित किया गया।
‘जिला अदालत से CJI बनने तक की यात्रा प्रेरणादायक’
कार्यक्रम में स्वागत भाषण देते हुए ऑल इंडिया सीनियर एडवोकेट्स एसोसिएशन के महासचिव तथा सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता आदिश सी. अग्रवाला ने कहा कि हिसार की जिला अदालतों से लेकर भारत के मुख्य न्यायाधीश बनने तक CJI सूर्य कांत की यात्रा योग्यता, अनुशासन और निरंतर परिश्रम का प्रेरणादायक उदाहरण है।
उन्होंने कहा कि युवा अधिवक्ताओं को प्रोत्साहित करने की CJI सूर्य कांत की पहल ने न केवल उनमें आत्मविश्वास बढ़ाया है, बल्कि बार और बेंच के बीच विश्वास एवं सहयोग के संबंधों को भी मजबूत किया है।
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