कोर्टरूम टिप्पणियों के ‘मेमिफिकेशन’ पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख
सुप्रीम कोर्ट ने कोर्टरूम टिप्पणियों को मीम, वायरल कंटेंट और व्यावसायिक गतिविधियों में बदलने के आरोपों वाली याचिका पर केंद्र, CBI और BCI से जवाब मांगा।
कोर्टरूम टिप्पणियों के ‘मेमिफिकेशन’ पर सुप्रीम कोर्ट का रुख
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को उस याचिका पर नोटिस जारी किया, जिसमें कोर्टरूम में हुई बातचीत और हालिया ‘कॉकroach’ वाली रूपकात्मक टिप्पणी को संदर्भ से अलग करके मीम, वायरल वीडियो और व्यावसायिक डिजिटल कंटेंट में बदलने के आरोपों की CBI जांच की मांग की गई है।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि न्यायिक कार्यवाही के कुछ हिस्सों को चुनिंदा तरीके से काटकर ‘मेमिफाई’, मिमिक और व्यावसायिक रूप से प्रसारित किया जा रहा है, जिससे संवैधानिक और प्रक्रियात्मक संदर्भ से अलग होकर न्यायपालिका की संस्थागत गरिमा और न्याय के संवैधानिक वादे पर असर पड़ता है।
केंद्र, CBI और BCI से मांगा जवाब
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना शामिल हैं, ने याचिका पर केंद्र सरकार, CBI और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को नोटिस जारी किया है।
याचिका में ‘Cockroach Janta Party’ से जुड़ी कथित गतिविधियों की भी जांच की मांग की गई है। हालांकि, याचिकाकर्ता ने यह भी स्पष्ट किया है कि निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और संविधान द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने की मांग नहीं की जा रही है।
फर्जी वकीलों और कानून की फर्जी डिग्री का भी मुद्दा
अधिवक्ता राजा चौधरी द्वारा दायर याचिका में कोर्ट से फर्जी वकीलों, फर्जी कानून की डिग्री, कानूनी पेशे में प्रतिरूपण (impersonation) और पेशेवर मानकों में कथित गिरावट से संबंधित आरोपों की भी जांच कराने का अनुरोध किया गया है।
याचिकाकर्ता ने इन मुद्दों को न्यायिक संस्थानों और कानूनी पेशे की विश्वसनीयता से जोड़ते हुए उचित जांच और नियामकीय कार्रवाई की मांग की है।
‘कॉकroach’ टिप्पणी किस संदर्भ में थी?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट की 15 मई की कार्यवाही का उल्लेख किया गया है, जिसमें तत्कालीन कोर्टरूम बातचीत के दौरान CJI ने ‘कॉकroach’ शब्द का रूपक के तौर पर इस्तेमाल किया था।
बाद में CJI ने मीडिया को बताया था कि टिप्पणी ऐसे वकीलों के संदर्भ में थी, जिन्होंने कथित तौर पर फर्जी डिग्रियों के आधार पर पेशे में प्रवेश किया था। उन्होंने कहा था कि मुद्दा फर्जी कानून की डिग्रियों और कानूनी पेशे को साफ करने से जुड़ा था।
याचिकाकर्ता का कहना है कि कोर्टरूम की उस बातचीत के कुछ अंश बाद में मूल संवैधानिक और प्रक्रियात्मक संदर्भ से काटकर सोशल मीडिया पर वायरल किए गए।
रूपकों के इस्तेमाल को लेकर याचिका में क्या कहा गया?
याचिका में तर्क दिया गया है कि पशुओं, कीड़ों और अन्य प्रतीकों से जुड़े रूपक साहित्य, न्यायशास्त्र, राजनीतिक सिद्धांत और संवैधानिक विमर्श में लंबे समय से इस्तेमाल होते रहे हैं।
याचिकाकर्ता ने फ्रांज काफ्का की ‘The Metamorphosis’ का उदाहरण देते हुए कहा कि उसमें ‘vermin’ का इस्तेमाल शाब्दिक अर्थ में नहीं, बल्कि अलगाव, नौकरशाही की हिंसा और संस्थागत बेतुकेपन को व्यक्त करने के लिए प्रतीकात्मक रूप से किया गया था।
इसी तरह भारतीय संवैधानिक और न्यायिक विमर्श में ‘Jungle Raj’, ‘watchdog’, ‘marketplace of ideas’, ‘fraud on the Constitution’ और ‘guinea pig’ जैसे रूपकों का इस्तेमाल संस्थागत और संवैधानिक परिस्थितियों को व्यक्त करने के लिए किया गया है।
‘Cockroach Janta Party’ की गतिविधियों की जांच की मांग
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि ‘Cockroach Janta Party’ से जुड़ी कथित ट्रेडमार्क, ब्रांडिंग और डिजिटल कंटेंट के मुद्रीकरण जैसी गतिविधियां न्यायिक विवाद और कोर्टरूम की मौखिक टिप्पणियों के संगठित व्यावसायिक इस्तेमाल की ओर संकेत करती हैं।
याचिका में इन गतिविधियों की जांच की मांग की गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि न्यायिक कार्यवाही और उससे जुड़ी टिप्पणियों का व्यावसायिक लाभ के लिए किस प्रकार इस्तेमाल किया गया।
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भी याचिका का रुख
महत्वपूर्ण रूप से, याचिका में कहा गया है कि निष्पक्ष आलोचना, लोकतांत्रिक असहमति, व्यंग्य और संविधान द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता लोकतांत्रिक व्यवस्था का हिस्सा हैं।
हालांकि, याचिकाकर्ता का दावा है कि न्यायिक टिप्पणियों को उनके संवैधानिक और प्रक्रियात्मक संदर्भ से पूरी तरह अलग करके वायरल और व्यावसायिक सामग्री में बदलना एक अलग मुद्दा है, जिसकी जांच आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट में अब अगला कदम
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल याचिका पर संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान यह देखा जाएगा कि कोर्टरूम की मौखिक टिप्पणियों के डिजिटल प्रसार, उनके व्यावसायिक इस्तेमाल और कानूनी पेशे में फर्जी डिग्री एवं प्रतिरूपण से जुड़े आरोपों पर न्यायालय किस प्रकार विचार करता है।
मामला: Raja Choudhary v. Union of India & Ors.
Tags
#सुप्रीमकोर्ट #कॉकroachटिप्पणी #CBIजांच #कोर्टरूमटिप्पणी #बारकाउंसिलऑफइंडिया #फर्जीवकील #फर्जीLawDegree #Judiciary #SupremeCourt #CBI #BCI #CourtroomRemarks #LegalProfession #FreeSpeech
