SC ने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग पर उमर अब्दुल्ला की पत्नी पायल को नोटिस जारी कर जवाब मांगा वही राजनेता “क्रूरता” या “परित्याग” के अपने दावों को साबित नहीं कर सके

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी संस्थानों को बिना भेदभाव के उचित और स्थिर रोजगार प्रदान करने का दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने आज उमर अब्दुल्ला की अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला से नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता द्वारा दायर याचिका पर जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने क्रूरता के आधार पर तलाक की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की पत्नी पायल अब्दुल्ला को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने द्विविवाह एक गंभीर अपराध मानते हुए आईपीसी की धारा 494 के तहत दोषी व्यक्ति पर लगाए गए ‘पिस्सू-काटने’ के दंड को संशोधित किया

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“हमारे पास यह मानने के अलावा कोई विकल्प नहीं है कि धारा 494 आईपीसी के तहत अपराध के लिए दोषी ठहराए जाने पर उन पर ‘अदालत उठने तक कारावास’ की सजा लगाना, अनुचित रूप से नरमी या पिस्सू के काटने की सजा थी” सर्वोच्च न्यायालय ने द्विविवाह BIGAMY के एक मामले में कहा कि भारतीय … Read more

धारा 138, एनआई अधिनियम, 1881 के तहत कब एक चेक को अस्वीकृत माना जाएगा – इलाहाबाद उच्च न्यायलय

इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद उच्च न्यायलय ने हाल ही में धारा 138 एनआई अधिनियम के तहत मामले में एक महत्वपूर्ण निर्णय दिया, जिसमें समझाया गया कि धारा 138, परक्राम्य लिखत अधिनियम, 1881 (एनआई अधिनियम) के तहत चेक कब अस्वीकृत माना जाएगा। संक्षिप्त पृष्ठभूमि- यह मामला राहुल (प्रतिवादी संख्या 2) द्वारा विजय कुमार (आवेदक) के खिलाफ धारा 138 एनआई … Read more

सर्वोच्च न्यायालय ने ‘गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता के सिद्धांत’ की प्रयोज्यता पर कानून के तीन प्रश्नों को एक बड़ी पीठ के समक्ष विचारार्थ भेजा

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अरविंद केजरीवाल द्वारा दायर प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनकी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका में, सर्वोच्च न्यायालय ने ‘गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता के सिद्धांत’ की प्रयोज्यता पर कानून के तीन प्रश्नों को एक बड़ी पीठ के समक्ष विचारार्थ भेजा है। तीन प्रश्न- (क) क्या “गिरफ्तारी की आवश्यकता और अनिवार्यता” पीएमएल अधिनियम की धारा 19(1) … Read more

सुप्रीम कोर्ट की विशेष टिप्पणी ‘जमानत के आदेश पर रोक दुर्लभ और असाधारण मामलों में ही लगे’, व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हनन होता है तो ये विनाशकारी होगा

सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले की सुनवाई के दौरान जमानत पर रोक को लेकर अहम टिप्पणी की। शीर्ष अदालत ने कहा कि जमानत के आदेश पर रोक दुर्लभ और असाधारण मामलों में ही लगनी चाहिए। कोर्ट ने ये भी कहा कि अगर जमानत के आदेश पर रोक लगाते समय व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हनन … Read more

IPC Sec 494 एक पत्नी के रहते दूसरी शादी करने पर दंड के मामले में CrPC Sec 198 अदालत को संज्ञान लेने से रोकती है – इलाहाबाद हाईकोर्ट

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जेल अधीक्षक की पेंशन में 10% कटौती को रद्द किया, कहा – "यह कदाचार नहीं है"

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ट्रिपल तलाक(तलाक -ए -बिद्दत) को लेकर बड़ा फैसला दिया है। हाईकोर्ट ने कहा है कि तलाक ट्रिपल तलाक है या नहीं, तथ्य का विषय, ट्रायल कोर्ट में साक्ष्य लेकर तय होगा। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 482 के तहत अंतर्निहित शक्ति का इस्तेमाल कर दाखिल चार्जशीट या केस कार्यवाही रद्द नहीं की … Read more

LIVE IN RELATIONSHIP के मामले में किसी महिला के खिलाफ पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता का दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होता-HC

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लिव-इन रिलेशन LIVE IN RELATIONSHIP को लेकर उच्च न्यायलय ने एक अहम बयान दिया है। केरल उच्च न्यायलय KERALA HIGH COURT ने एक हालिया फैसले में कहा कि लिव इन रिलेशन LIVE IN RELATIONSHIP के मामले में किसी महिला के खिलाफ पति या उसके रिश्तेदारों की क्रूरता का दंडात्मक प्रावधान लागू नहीं होता। हाईकोर्ट ने … Read more

“हम कानून बनाने का निर्देश नहीं दे सकते”: SC ने डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा को रोकने के लिए निर्देश देने की दि. मेडि. एसो. की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी संस्थानों को बिना भेदभाव के उचित और स्थिर रोजगार प्रदान करने का दिया निर्देश

उच्चतम न्यायालय SUPREME COURT ने आज दिल्ली मेडिकल एसोसिएशन DELHI MEDICAL ASSOCIATION द्वारा संविधान के अनुच्छेद 32 ARTICLE 32 OF INDIAN CONSTITUTION के तहत दायर याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया, जिसमें डॉक्टरों के खिलाफ हिंसा के मामलों में निर्देश और राहत की मांग की गई थी। न्यायमूर्ति संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय करोल … Read more

SC ने न्यायिक बैकलॉग से निपटने के लिए ग्राम न्यायालयों के कार्यान्वयन पर तत्काल कार्रवाई का आग्रह किया, जिससे घर के पास ही सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध हो

उच्चतम न्यायालय ने आज कहा कि ‘ग्राम न्यायालय’ की स्थापना से नागरिकों को उनके घर के पास ही सस्ता और त्वरित न्याय उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी और निचली अदालतों में लंबित मामलों की संख्या में भी कमी आएगी। संसद द्वारा 2008 में पारित एक अधिनियम में जमीनी स्तर पर ग्राम न्यायालयों की स्थापना का … Read more

जब कोई मध्यस्थ कार्यवाही के समय मौजूद कानून के आधार पर कोई निर्णय पारित करता है, तो उक्त निष्कर्षों को बाद के निर्णय के आधार पर स्पष्ट रूप से अवैध नहीं माना जा सकता – इलाहाबाद उच्च न्यायालय

allahabad high court

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने कहा कि जब कोई मध्यस्थ कार्यवाही के समय मौजूद कानून के आधार पर कोई निर्णय पारित करता है, तो उक्त निष्कर्षों को बाद के निर्णय के आधार पर स्पष्ट रूप से अवैध नहीं माना जा सकता। न्यायालय ने यह भी दोहराया कि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा कानूनी मिसाल में निर्धारित सिद्धांतों को … Read more