Red Bull के ‘एनर्जी ड्रिंक’ टैग पर FSSAI के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती, कंपनी को नहीं मिली अंतरिम राहत

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FSSAI ने रेड बुल को कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की पूरी रेंज से ‘एनर्जी ड्रिंक’ का विवरण हटाने का निर्देश

Red Bull ने कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल पर रोक लगाने वाले FSSAI के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। जस्टिस अमित महाजन ने बिना सुनवाई आदेश जारी करने पर सवाल उठाते हुए FSSAI से जवाब मांगा। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी।

कैफीनयुक्त पेय पदार्थों पर ‘एनर्जी ड्रिंक’ (Energy Drink) शब्द के इस्तेमाल को लेकर रेड बुल और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) के बीच कानूनी विवाद दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया है। रेड बुल ने FSSAI के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कंपनी को अपने कैफीनयुक्त पेय पदार्थों से ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द हटाने का निर्देश दिया गया था।

मामले की सुनवाई सोमवार को जस्टिस अमित महाजन की पीठ ने की। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने FSSAI से पूछा कि क्या आदेश पारित करने से पहले रेड बुल को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था और अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। अदालत ने कंपनी को सुनवाई का अवसर दिए बिना तत्काल कार्रवाई करने की आवश्यकता पर भी सवाल उठाया और FSSAI से इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा।

अदालत ने फिलहाल रेड बुल को कोई अंतरिम राहत नहीं दी है। मामले को आगे की सुनवाई के लिए 29 सितंबर को सूचीबद्ध किया गया है।

FSSAI के 30 जून के आदेश को दी चुनौती

रेड बुल ने 30 जून, 2026 को FSSAI के सहायक निदेशक द्वारा जारी उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें कंपनी को अपने कैफीनयुक्त पेय पदार्थों की पूरी रेंज से ‘एनर्जी ड्रिंक’ का विवरण हटाने का निर्देश दिया गया था।

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कंपनी ने 17 जुलाई को जारी उस संचार को भी चुनौती दी है, जिसके माध्यम से FSSAI ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को कथित रूप से गैर-अनुपालन करने वाले उत्पादों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे।

बिना नोटिस और सुनवाई के आदेश पारित करने का आरोप

याचिका में रेड बुल ने कहा है कि वह वर्ष 2002 से भारत में अपने उत्पादों की बिक्री ‘एनर्जी ड्रिंक’ के नाम से कर रही है। कंपनी का आरोप है कि FSSAI ने 30 जून का आदेश जारी करने से पहले न तो उसे कोई पूर्व नोटिस दिया और न ही अपना पक्ष रखने का उचित अवसर प्रदान किया।

रेड बुल के मुताबिक, इसके बाद 17 जुलाई को जारी संचार के आधार पर देश के विभिन्न स्थानों पर उसके उत्पादों के विरुद्ध प्रवर्तन कार्रवाई की गई, जिसमें उत्पादों की जब्ती भी शामिल है।

FSSAI की 2024 की एडवाइजरी का दिया हवाला

रेड बुल ने अपनी याचिका में FSSAI के मार्च 2024 के एक परामर्श (Advisory) का भी हवाला दिया है। कंपनी के अनुसार, इस एडवाइजरी में संबंधित खाद्य श्रेणियों के अंतर्गत आने वाले कैफीनयुक्त पेय पदार्थों के लिए ‘एनर्जी ड्रिंक’ शब्द के इस्तेमाल की अनुमति स्पष्ट की गई थी।

कंपनी ने सवाल उठाया है कि जब नियामक ने पहले इस शब्द के इस्तेमाल को स्वीकार किया था, तो अब इसे हटाने का निर्देश किस आधार पर जारी किया गया।

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हाईकोर्ट ने प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत पर मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने इस बात पर विशेष रूप से स्पष्टीकरण मांगा कि क्या FSSAI ने आदेश जारी करने से पहले रेड बुल को सुनवाई का अवसर दिया था। अदालत ने बिना कंपनी का पक्ष सुने तत्काल कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता पर सवाल उठाते हुए FSSAI को इस संबंध में निर्देश प्राप्त करने को कहा।

फिलहाल अदालत ने आदेश पर रोक लगाने या कंपनी को किसी अन्य प्रकार की अंतरिम राहत देने से इनकार किया है। मामले की अगली सुनवाई 29 सितंबर को होगी, जिसमें FSSAI का पक्ष और प्रक्रियात्मक पहलू महत्वपूर्ण रहेंगे।

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