मद्रास हाईकोर्ट ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में तिरुप्पत्तूर सीट से एक वोट से जीते TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति के निर्वाचन को चुनौती देने वाली DMK प्रत्याशी के.आर. पेरियाकरुप्पन की चुनाव याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि याचिका में चुनाव परिणाम को प्रभावित करने वाली अनियमितताओं के पर्याप्त तथ्य नहीं दिए गए थे।
Madras High Court ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 में शिवगंगा जिले की तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट से महज एक वोट से जीतने वाले तमिलगा वेत्री कझगम (TVK) के विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति के निर्वाचन को चुनौती देने वाली DMK प्रत्याशी के.आर. पेरियाकरुप्पन की चुनाव याचिका खारिज कर दी है।
जस्टिस जी.के. इलंथिरैयन ने सोमवार को यह फैसला सुनाते हुए कहा कि चुनाव याचिका में ऐसे आवश्यक तथ्य (Material Facts) प्रस्तुत नहीं किए गए थे, जिनसे जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 के तहत पूर्ण वाद-कारण (Complete Cause of Action) स्थापित हो सके।
अदालत ने सेतुपति की ओर से सिविल प्रक्रिया संहिता (CPC) के आदेश 7 नियम 11 के तहत दाखिल आवेदन स्वीकार करते हुए चुनाव याचिका खारिज कर दी। अदालत के अनुसार, डाक मतपत्र के कथित गलत दिशा में भेजे जाने, मतगणना में विसंगतियों और डाक मतपत्रों के पुनः सत्यापन में कथित विफलता के आरोप अपने आप में यह साबित नहीं करते कि किसी अनियमितता ने चुनाव परिणाम को भौतिक रूप से प्रभावित किया था।
एक वोट से मिली थी जीत
वर्ष 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में TVK प्रत्याशी आर. श्रीनिवास सेतुपति को 83,375 वोट मिले थे, जबकि DMK प्रत्याशी के.आर. पेरियाकरुप्पन को 83,374 वोट प्राप्त हुए थे। इस प्रकार सेतुपति ने मात्र एक वोट के अंतर से चुनाव जीता था।
तिरुप्पत्तूर विधानसभा सीट: चुनाव परिणाम
आर. श्रीनिवास सेतुपति (TVK)
83,375
विजेता
के.आर. पेरियाकरुप्पन (DMK)
83,374
पराजित
जीत का अंतर: केवल 1 वोट
मतगणना में अनियमितताओं के आरोप पर्याप्त नहीं: हाईकोर्ट
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता ऐसा स्वतंत्र साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके, जिससे यह स्थापित हो कि शिवगंगा जिले की विधानसभा संख्या 185, तिरुप्पत्तूर के लिए निर्धारित कोई डाक मतपत्र, दूसरे जिले की विधानसभा संख्या 50, तिरुप्पत्तूर के रिटर्निंग ऑफिसर को वास्तव में प्राप्त हुआ था और उनके पास रखा गया था।
जस्टिस इलंथिरैयन ने कहा कि ऐसा कोई तथ्य भी प्रस्तुत नहीं किया गया, जिससे यह प्रदर्शित हो कि निर्धारित प्रक्रिया का उल्लंघन हुआ था और उस उल्लंघन से चुनाव परिणाम प्रभावित हो सकता था।
अदालत ने मतगणना के अंतिम परिणाम पत्रक (Form 20) का भी परीक्षण किया और पाया कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) तथा गिने गए डाक मतपत्रों के मतों में कोई विसंगति दर्ज नहीं थी।
डाक मतपत्रों के पुनः सत्यापन पर क्या कहा?
याचिका में डाक मतपत्रों के पुनः सत्यापन की प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप भी लगाया गया था। इस संबंध में अदालत ने रिटर्निंग ऑफिसर्स हैंडबुक, 2023 के क्लॉज 15.25 का परीक्षण किया।
अदालत ने कहा कि इस प्रावधान के तहत जब जीत का अंतर अमान्य घोषित किए गए डाक मतपत्रों की संख्या से कम होता है, तब अनिवार्य पुनः सत्यापन (Re-verification) किया जाना आवश्यक है। हालांकि, यह प्रावधान पहले से गिने जा चुके मतों की पुनर्गणना (Recounting) की अनुमति नहीं देता।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा हैंडबुक के निर्देशों का पालन नहीं भी किया गया हो, तब भी केवल इस आधार पर चुनाव को अमान्य नहीं ठहराया जा सकता, जब तक यह प्रदर्शित न हो कि कथित उल्लंघन ने चुनाव परिणाम को प्रभावित किया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला
हाईकोर्ट ने Ramesh Rout v. Rabindra Nath Rout और Arikala Narasa Reddy v. Venkata Ram Reddy Reddygari मामलों में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसलों का हवाला दिया।
अदालत ने कहा कि रिटर्निंग ऑफिसर्स हैंडबुक में दिए गए निर्देश रिटर्निंग ऑफिसर्स के लिए बाध्यकारी हैं, लेकिन उनके उल्लंघन के आधार पर चुनाव को दूषित (Vitiate) ठहराने के लिए यह प्रदर्शित करना आवश्यक है कि उसका मतगणना प्रक्रिया या चुनाव परिणाम पर वास्तविक प्रभाव पड़ा था।
जस्टिस इलंथिरैयन ने कहा:
“रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा हैंडबुक में दिए गए निर्देशों का पालन करने में मात्र विफलता, बिना किसी अतिरिक्त तथ्य या साक्ष्य के, जो चुनाव परिणाम पर कथित गैर-अनुपालन के प्रभाव को प्रदर्शित करे, चुनाव को अमान्य करने का आधार नहीं हो सकती।”
मतगणना के दौरान पुनर्गणना की मांग पर अदालत की टिप्पणी
अदालत ने यह भी पाया कि EVM की मतगणना और डाक मतपत्रों की गिनती पूरी होने के बाद संबंधित चुनाव एजेंटों को परिणाम दिखाए गए थे और उनकी स्वीकृति प्राप्त की गई थी।
हाईकोर्ट के अनुसार, मतगणना के अंतिम चरण में केवल जीत का अंतर एक वोट होने के आधार पर पुनर्गणना या पुनः सत्यापन की मांग को स्वीकार नहीं किया जा सकता।
DMK प्रत्याशी ने उठाए थे कई सवाल
के.आर. पेरियाकरुप्पन ने अपनी चुनाव याचिका में सेतुपति के निर्वाचन को निरस्त करने के साथ-साथ कई राहतें मांगी थीं। इनमें अस्वीकृत डाक मतपत्रों का पुनः सत्यापन, EVM और डाक मतपत्रों की पुनर्गणना, VVPAT पर्चियों का सत्यापन तथा EVM की मेमोरी और माइक्रोकंट्रोलर की जांच शामिल थी।
याचिका में प्रमुख रूप से निम्नलिखित आरोप लगाए गए थे:
- डाक मतपत्र का कथित गलत स्थान पर पहुंचना: शिवगंगा जिले की विधानसभा संख्या 185 के लिए निर्धारित एक डाक मतपत्र के विधानसभा संख्या 50 के रिटर्निंग ऑफिसर के पास पहुंचने और अस्वीकृत किए जाने का आरोप लगाया गया।
- मतगणना में विसंगति: पेरियाकरुप्पन ने राउंडवार EVM मतों और Form 20 तथा निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों के बीच 18 वोटों का अंतर होने का दावा किया।
- डाक मतपत्रों का पुनः सत्यापन: रिटर्निंग ऑफिसर्स हैंडबुक के क्लॉज 15.25 के तहत निर्धारित पुनः सत्यापन प्रक्रिया का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया गया।
- डाक मतपत्रों की गलत अस्वीकृति: कुछ डाक मतपत्रों को अनुचित तरीके से अमान्य घोषित किए जाने का आरोप लगाया गया।
- EVM प्रक्रिया में कथित अनियमितता: निर्वाचन संचालन नियमों के तहत EVM के कॉन्फिगरेशन में कथित उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया।
याचिकाकर्ता की ओर से यह तर्क दिया गया था कि इन सभी मुद्दों पर तथ्यात्मक विवाद मौजूद हैं, जिनकी जांच पूर्ण सुनवाई के दौरान की जानी चाहिए थी, न कि प्रारंभिक स्तर पर याचिका खारिज करके।
सेतुपति ने याचिका खारिज करने की मांग की थी
TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति ने आदेश 7 नियम 11 CPC के तहत आवेदन दाखिल कर चुनाव याचिका खारिज करने की मांग की थी।
उनकी ओर से दलील दी गई कि याचिका में आवश्यक आधारभूत तथ्यों का अभाव है और यह नहीं बताया गया है कि कथित अनियमितताओं ने किस प्रकार चुनाव परिणाम को भौतिक रूप से प्रभावित किया। उन्होंने कथित रूप से गलत दिशा में भेजे गए डाक मतपत्र के संबंध में भी याचिकाकर्ता के दावे पर सवाल उठाया।
पहले सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे थे पेरियाकरुप्पन
इस चुनाव विवाद में पहले भी न्यायिक कार्यवाही हुई थी। पेरियाकरुप्पन ने शुरुआत में मद्रास हाईकोर्ट में रिट याचिका W.P. No. 19287 of 2026 दाखिल की थी और बाद में सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
इसके बाद उन्होंने रिट याचिका वापस ले ली थी और उन्हें चुनाव याचिका के माध्यम से अपनी शिकायतें उठाने की स्वतंत्रता दी गई थी।
मद्रास हाईकोर्ट ने 17 सितंबर को सेतुपति के आवेदन पर दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। सोमवार को विस्तृत फैसला सुनाते हुए अदालत ने सेतुपति का आवेदन स्वीकार कर चुनाव याचिका खारिज कर दी।
वकीलों की ओर से पैरवी
TVK विधायक आर. श्रीनिवास सेतुपति की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता वी. राघवाचारी ने पैरवी की। उनके साथ अधिवक्ता दीक्षिता गोहिल, प्रांजल अग्रवाल (गोहिल अग्रवाल लॉ चैंबर्स), यश एस. विजय और टी. महेंद्रन भी उपस्थित रहे।
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