क्या किसी महिला को पति के साथ दांपत्य जीवन में रहने के लिए बाध्य किया जा सकता है? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से मांगा जवाब

दांपत्य जीवन बहाल करने का अधिकार एक तरह से पितृसत्तात्मक सिद्धांत को बल देता है महिला को जागीर की तरह बताता है और ये प्रावधान अनुच्छेद-15 और 21 का उल्लंघन करता हैं। सुप्रीम कोर्ट के 9 जजों की संवैधानिक बेंच के उस फैसले का हवाला दिया गया जिसमें निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार माना … Read more

पटना हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के जजों, कानून मंत्री को गाली देने के आरोपी वकील के खिलाफ FIR का आदेश दिया-

न्यायिक अधिकारियों और न्यायाधीशों पर अपमानजनक पोस्ट से निपटने के लिए कोर्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लगाई कड़ी फटकार- पटना हाई कोर्ट ने हाल ही में अधिकारियों को सोशल मीडिया पर सुप्रीम कोर्ट, पटना उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों के साथ-साथ केंद्रीय कानून मंत्री को गाली देने के आरोपी एक वकील के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज … Read more

जमानत देते समय अदालत के लिए विस्तृत कारण बताना जरूरी नहीं-

पीठ ने कहा हमें अधिवक्ताओं की भी रक्षा करनी है- Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि जमानत देते समय कोर्ट के लिए विस्तृत कारण बताना जरूरी नहीं है, खासकर तब जब मामला प्रारंभिक चरण में हो और आरोपित द्वारा किए गए अपराध को स्पष्ट नहीं किया गया हो। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त टिप्पणी … Read more

सुप्रीम कोर्ट: हाईकोर्ट Article 226 के तहत बैंक को कर्जदार को OTS देने का निर्देश देने वाला आदेश नहीं कर सकता पारित-

Supreme Court सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि हाई कोर्ट संविधान के अनुच्छेद 226 Article 226 of Indian Constitution के तहत किसी वित्तीय संस्थान/बैंक को कर्जदार को सकारात्मक तरीके से एकमुश्त निपटान (ओटीएस) का लाभ देने का निर्देश देने वाला आदेश पारित नहीं कर सकता। न्यायमूर्ति एम आर शाह और न्यायमूर्ति बी वी नागरत्ना … Read more

जस्टिस पुष्पा वी.गनेडीवाला: ‘स्किन-टु-स्किन कॉन्टैक्ट’ वाला फैसला देने वाली नहीं बनेंगी स्थायी जज, SC कॉलेजियम का फैसला, रुका प्रमोशन-

18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के लिए स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट जरूरी नहीं है. स्किन टू स्किन कॉन्टेक्ट के बिना बच्चों के नाजुक अंगों को छूना POCSO Act के तहत यौन शोषण होगा . यौन उद्देश्य से बच्चे के यौन अंगों को छूना पोक्सों के तहत … Read more

NDPS ACT: निजी तलाशी के दौरान धारा 50 का पालन नहीं करने से वाहन से हुई बरामदगी अमान्य नहीं हो जाती-

SUPREME COURT सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आरोपी की निजी तलाशी के दौरान नशीला पदार्थ अधिनियम ‌(Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act, 1985 ) की धारा 50 का पालन नहीं करने के कारण वाहन से हुई बरामदगी अमान्य नहीं हो जाती है। न्यायमूर्ति यूयू ललित, न्यायमूर्ति इंदु मल्होत्रा और न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी की पीठ … Read more

सुप्रीम कोर्ट से चार धाम परियोजना को मिली मंजूरी, जानिए क्या था विवाद-

सुप्रीम कोर्ट ने सुरक्षा चिंताओं के मद्देनजर चारधाम परियोजना के तहत बन रही सड़कों को ‘डबल लेन’ तक चौड़ा करने की इजाज़त दे दी है. जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की सदारत वाली पीठ ने मंगलवार को यह फैसला सुनाते हुए चारधाम परियोजना के बारे में सीधे जानकारी हासिल करने के लिए साबिक जज ए के … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि एनआई अधिनियम की धारा 138 उन मामलों पर भी लागू होती है जहां चेक आहरण के बाद और प्रस्तुति से पहले ऋण लिया जाता है-

“केवल चेक को एक प्रतिभूति सेकुएरिटी के रूप में प्रस्तुत करने मात्र से कानूनी रूप से लागू करने योग्य ऋण या देयता को पूरा करने के लिए डिज़ाइन किए गए एक इंस्ट्रूमेंट के रूप में इसके चरित्र को खत्म नहीं किया जाएगा।” शीर्ष अदालत ने पाया कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स (NI Act) एक्ट की धारा 138 … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से बताया कि अपराध तय करते वक्त अदालतों को किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए ?

सर्वोच्च अदालत ने कहा है कि अदालतों का कर्तव्य है कि वे न सिर्फ अपराध बल्कि अपराधी, उसकी मानसिक स्थिति और उसकी सामाजिक आर्थिक स्थितियों को भी ध्यान में रखें. न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि यह अदालतों का कर्तव्य है कि वे आरोपी के सुधार और पुनर्वास की संभावना … Read more

सुप्रीम कोर्ट का बड़ा निर्णय : दो भाई-बहनों व एक भतीजे के हत्यारे के फांसी की सजा को उम्रकैद में बदली-

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि दोषी ने नृशंस अपराध किया है। लेकिन राज्य सरकार ने यह नहीं बताया कि आरोपी के सुधार की गुंजाइश नहीं है। याची ने अपराध किया है लेकिन वह दुर्दांत अपराधी नहीं है। उसका यह पहला अपराध था। सर्वोच्च अदालत में मध्य प्रदेश में संपत्ति … Read more