अनुच्छेद 226(2): जो तथ्य प्रार्थना के अनुदान के लिए प्रासंगिक नहीं हैं वे न्यायालय को अधिकारिता प्रदान करने वाली कार्रवाई के कारण को जन्म नहीं देंगे- सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने संविधान के अनुच्छेद 226(2) के संबंध में मार्गदर्शक परीक्षणों की व्याख्या करते हुए कहा है कि जो तथ्य प्रार्थना के अनुदान के लिए प्रासंगिक नहीं हैं, वे न्यायालय को अधिकारिता प्रदान करने वाले वाद हेतुक को जन्म नहीं देंगे। न्यायालय ने एक मामले में कहा कि केवल इसलिए कि याचिकाकर्ता कंपनी का … Read more

कोर्ट का फैसला कंस्यूमर हित में कहा, Medical Claim के लिए मरीज का 24 घंटे अस्पताल में भर्ती रहना जरूरी नहीं

मेडिकल इन्शुरन्स क्लेम को लेकर वडोदरा की उपभोक्ता फोरम Consumer Forum कोर्ट ने बड़ा फैसला दिया है। कोर्ट ने कहा कि है क्लेम के लिए किसी भी व्यक्ति का अस्पताल में 24 घंटे तक भर्ती रहना जरूरी नहीं है। कोर्ट ने कहा कि अब समय बदल चुका है। नई तकनीक में मरीजों को ज्यादा समय … Read more

टायर फटना ‘एक्ट ऑफ़ गॉड’ नहीं, ये मानवीय कृत्य है, इन्सुरेंस कंपनी करे तत्काल भुगतान – हाई कोर्ट

मुस्लिम पुरुष को एक से ज्यादा शादियों का रजिस्ट्रेशन नहीं, बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका खारिज

किसी वाहन का टायर फटना ईश्वर का कार्य Act of God नहीं माना जा सकता है, लेकिन वाहन के चालक के लिए मानवीय लापरवाही का कार्य है, बॉम्बे हाई कोर्ट ने हाल ही में एक बीमा कंपनी को दुर्घटना के मामले में मृतक पीड़ित के परिवार को मुआवजा देने का निर्देश देते हुए फैसला सुनाया। … Read more

फर्जी वकील बनकर वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष और रिटायर्ड IAS ने हाईकोर्ट के CJ से की वकीलों की शिकायत, FIR दर्ज

तारिक को जानकारी मिली थी कि उक्त पत्र वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष निसार अहमद द्वारा टाइप कराकर फर्जी राजेश मेहरा के नाम से पोस्ट किए गए हैं। फर्जी नाम से न्यायाधीशों के पास वकीलों की शिकायत करने वाले भोपाल Waqf Board के भूतपूर्व अध्यक्ष और सेवानिवृत्त भारतीय प्रशाशनिक सेवा (IAS) के अधिकारी निसार अहमद … Read more

हर जगह जहां नमाज अदा की जाती है उसे मस्जिद नहीं माना जा सकता: SC ने इलाहाबाद HC परिसर के अंदर की मस्जिद को हटाने का अधिकारियों को दिया निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने विध्वंस का विरोध करने वाले याचिकाकर्ताओं को यह कहते हुए इलाहाबाद उच्च न्यायालय के परिसर से एक मस्जिद को तीन महीने के भीतर हटाने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संरचना एक समाप्त पट्टे (टर्मिनेटेड लीज) की संपत्ति पर खड़ी थी और वे इसे अधिकार के रूप में दावा नहीं … Read more

न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी और उसकी तुलना ‘भस्मासुर’ से करने पर HC ने वकील को आपराधिक अवमानना ​​​​मामले में दोषी ठहराया

गौहाटी उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक न्यायिक अधिकारी के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणी पर एक अधिवक्ता उत्पल गोस्वामी को सूमोटो से आपराधिक अवमानना ​​​​मामले में दोषी ठहराया। न्यायमूर्ति कल्याण राय सुराणा और न्यायमूर्ति देवाशीष बरुआ की खंडपीठ ने अधिवक्ता उत्पल गोस्वामी को न्यायालय अधिनियम, 1971 की धारा 14 के प्रावधान के अनुसार दोषी ठहराया। … Read more

मुख्तार अंसारी गैंग ‘मोस्ट खूंखार क्रिमिनल गैंग ऑफ इंडिया’: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इसके सदस्य की जमानत नामंजूर करते हुए कहा

इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हाल ही में एक आरोपी को यह कहते हुए जमानत देने से इंकार कर दिया कि वह भारत के सबसे खूंखार आपराधिक गिरोह यानी मुख्तार अंसारी के गिरोह का सदस्य है। आरोपी पर 2010 में मऊ जिले में हत्या के एक मामले में मामला दर्ज किया गया था जिसमें जेल में … Read more

केवल अनुबंध के उल्लंघन के कारण, धोखाधड़ी के लिएआपराधिक मामला शुरू नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने सुनवाई करते हुए कहा कि महज अनुबंध का उल्लंघन करने से धोखाधड़ी के लिए आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता और लेन-देन की शुरुआत में बेईमानी के इरादे को सही तरीके से दिखाया जाना चाहिए। न्यायमूर्ति एएस ओका और न्यायमूर्ति राजेश बिंदल की पीठ ने कहा कि आपराधिक कार्यवाही शुरू करने के … Read more

शीर्ष अदालत का सरकारी अधिकारियों से ‘अनुकंपा नौकरी’ के दावों का निर्णय करते समय अत्यधिक भावना सक्रियता से कार्य करने का आह्वान

सर्वोच्च अदालत

शीर्ष अदालत ने कहा कि मृत्यु युवा-वृद्ध या अमीर-गरीब के बीच कोई भेद नहीं करती है सुप्रीम कोर्ट ने अनुकंपा नौकरी से जुड़े एक वाद पर सुनवाई करते हुए कहा कि मृत्यु युवा-वृद्ध या अमीर-गरीब के बीच कोई भेद नहीं करती है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने सरकारी अधिकारियों से अनुकंपा के आधार पर … Read more

आर्टिकल 32 के अन्तरगर्त शीर्ष अदालत के बाध्यकारी फैसले को चुनौती नहीं दी जा सकती, सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ द्वारा 2020 में भूमि अधिग्रहण अधिनियम से संबंधित फैसले को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है। शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत शीर्ष अदालत के बाध्यकारी फैसले को चुनौती देने वाली याचिका … Read more