सुप्रीम कोर्ट का सख्त दिशानिर्देश : आपराधिक मामलों में न्यायालयों को न्यायेतर स्वीकारोक्ति का किस प्रकार से मूल्यांकन करना चाहिए
भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने रामू अप्पा महापात्र बनाम महाराष्ट्र राज्य (2025 INSC 147) मामले में यह स्पष्ट किया है कि आपराधिक मामलों में अदालतों को अतिरिक्त-न्यायिक स्वीकारोक्तियों (Extra-Judicial Confessions) का मूल्यांकन किस प्रकार करना चाहिए। यह मामला क्रिमिनल अपील नंबर 608/2013 से उत्पन्न हुआ, जिसमें सेशंस कोर्ट और बॉम्बे हाईकोर्ट द्वारा दोषसिद्धि को चुनौती … Read more