दिल्ली हाई कोर्ट ने साई बाबा ट्रस्ट की YouTube वीडियो हटाने की अपील पर GAC को 7 दिन में कारणयुक्त आदेश देने का निर्देश दिया। अगली सुनवाई 19 अगस्त को होगी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट की YouTube वीडियो हटाने की अपील पर GAC को सात दिनों में कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है।
GAC को सात दिन में फैसला करने का निर्देश
दिल्ली हाई कोर्ट ने श्री साईबाबा संस्थान ट्रस्ट, शिरडी की ओर से दायर वैधानिक अपील पर Grievance Appellate Committee (GAC) को सात दिनों के भीतर फैसला करने का निर्देश दिया है। ट्रस्ट ने YouTube पर उपलब्ध कुछ वीडियो और अन्य ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ शिकायत की थी, जिनमें उसके अनुसार श्री साई बाबा और ट्रस्ट के बारे में कथित रूप से झूठे, मानहानिकारक, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने GAC को मामले की तात्कालिकता को ध्यान में रखते हुए अपील पर विचार करने और सात दिनों के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया। अदालत ने यह भी कहा कि निर्णय के बारे में ट्रस्ट को सूचित किया जाए।
19 अगस्त तक हाई कोर्ट में दाखिल करनी होगी अनुपालन रिपोर्ट
हाई कोर्ट ने संबंधित अधिकारियों को अगली सुनवाई तक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी और उस दिन अदालत के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश किए जाने की उम्मीद है।
YouTube ने वीडियो हटाने की मांग ठुकराई थी
यह आदेश ट्रस्ट की उस याचिका पर आया जिसमें Google LLC/YouTube की ओर से 17, 18, 19, 24 और 26 जुलाई 2026 को जारी किए गए संचार को चुनौती दी गई थी।
ट्रस्ट के अनुसार, YouTube ने कुछ वीडियो हटाने की उसकी मांग को स्वीकार नहीं किया। ट्रस्ट का आरोप है कि इन वीडियो में श्री साई बाबा के बारे में कथित रूप से झूठे, मानहानिकारक, भड़काऊ और अपमानजनक आरोप लगाए गए हैं तथा ट्रस्ट के खिलाफ भी आरोप किए गए हैं।
IT Rules के तहत पहले की थी शिकायत
ट्रस्ट ने पहले Information Technology (Intermediary Guidelines and Digital Media Ethics Code) Rules, 2021 के तहत Google LLC/YouTube के समक्ष शिकायत की थी। याचिका के मुताबिक, शिकायत के साथ संबंधित वीडियो के विशिष्ट URL और अन्य आवश्यक विवरण भी उपलब्ध कराए गए थे, लेकिन कथित आपत्तिजनक सामग्री के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।
इसके बाद ट्रस्ट ने केंद्र सरकार और GAC का रुख किया। हालांकि, ट्रस्ट का कहना है कि संबंधित सामग्री YouTube पर उपलब्ध बनी रही।
केंद्र से वीडियो हटाने के निर्देश की मांग
ट्रस्ट ने केंद्र सरकार और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के माध्यम से Google LLC/YouTube को संबंधित वीडियो हटाने या उनकी पहुंच निष्क्रिय करने का निर्देश देने की मांग की है।
इसके अलावा ट्रस्ट ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के लिए ऐसे दिशा-निर्देश बनाने की मांग की है, जिनके तहत धार्मिक भावनाओं को प्रभावित करने वाली सामग्री से संबंधित शिकायतों का प्रभावी ढंग से निपटारा किया जा सके।
ट्रस्ट ने शिकायत प्रणाली में बदलाव की भी मांग की है, जिसमें अपलोड की जा सकने वाली फाइलों की संख्या और शिकायतों में वर्णों की सीमा जैसी मौजूदा पाबंदियों को हटाने का अनुरोध शामिल है।
धार्मिक भावनाओं और अनुच्छेद 25 का दिया हवाला
ट्रस्ट ने दावा किया कि संबंधित वीडियो के YouTube पर लगातार उपलब्ध रहने से साई बाबा के भक्तों की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं और उनके संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत प्राप्त अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
याचिका में YouTube की ओर से वीडियो हटाने की मांग अस्वीकार करने वाले संचार को रद्द करने की भी मांग की गई है।
हाई कोर्ट ने वीडियो की सामग्री रिकॉर्ड में दोहराने से किया इनकार
सुनवाई के दौरान दिल्ली हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि वह अपने आदेश में संबंधित वीडियो की सामग्री को दोहराएगा या उसका उल्लेख नहीं करेगा। अदालत ने कहा कि ऐसा करने से समुदाय के सदस्यों की धार्मिक भावनाएं संभावित रूप से आहत हो सकती हैं।
ट्रस्ट की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता प्रमोद कुमार दुबे पेश हुए, जबकि केंद्र और अन्य प्राधिकरणों की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने पैरवी की।
19 अगस्त को होगी अगली सुनवाई
सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने GAC को ट्रस्ट की वैधानिक अपील पर सात दिनों में फैसला करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट ने याचिका पर नोटिस भी जारी किया।
मामले की अगली सुनवाई 19 अगस्त 2026 को होगी। उस समय अदालत के समक्ष अनुपालन रिपोर्ट पेश की जानी है।
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