Allahabad High Court ने 27 साल से अधिक Army Service वाले पूर्व Havaldar को Disability Pension देने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा Medical Board की बिना पर्याप्त कारण वाली राय के आधार पर Pension से इनकार नहीं किया जा सकता।
Medical Board की अस्पष्ट राय पर Pension रोकना कानूनन टिकाऊ नहीं: हाईकोर्ट
Allahabad High Court ने Indian Army के Army Medical Corps में 27 साल से अधिक सेवा दे चुके पूर्व Havaldar Jeetendra Kumar को Disability Pension देने का आदेश दिया है।
अदालत ने पाया कि Medical Board ने उनकी 20 प्रतिशत स्थायी disability को स्वीकार करने के बावजूद यह निष्कर्ष निकालने के लिए पर्याप्त कारण दर्ज नहीं किए कि उनका Seizure Disorder सैन्य सेवा के कारण उत्पन्न नहीं हुआ या Service Conditions से aggravated नहीं हुआ।
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल एक अस्पष्ट और बिना पर्याप्त reasoning वाली Medical Board Opinion किसी सैनिक को Disability Pension से वंचित करने का वैध आधार नहीं हो सकती।
Justice Alok Mathur और Justice Amitabh Kumar Rai की Bench
मामले की सुनवाई Justice Alok Mathur और Justice Amitabh Kumar Rai की Division Bench ने की।
हाईकोर्ट के समक्ष Union Government और चार अन्य प्राधिकरणों ने Armed Forces Tribunal (AFT) के 6 अक्टूबर 2023 के आदेश को चुनौती दी थी। AFT ने Jeetendra Kumar के Medical Records, Service History और लागू नियमों पर विचार करने के बाद उनके Disability Pension Claim को स्वीकार किया था।
2 सितंबर 2026 के अपने निर्णय में हाईकोर्ट ने AFT के आदेश में हस्तक्षेप नहीं किया और Kumar को Disability Pension तथा उससे जुड़े सभी लाभ देने का निर्देश दिया।
27 साल से अधिक Army Service के बाद अप्रैल 2022 में हुए Discharge
Jeetendra Kumar को 30 अप्रैल 1998 को Army Medical Corps में Enrol किया गया था। उन्होंने 30 अप्रैल 2022 को Service से Discharge लिया।
Judgment के अनुसार उन्होंने कुल 27 वर्ष, 3 महीने और 2 दिन की सेवा पूरी की थी।
Discharge के समय वे Low Medical Category में थे और उनकी Service Limit के Extension के दौरान उन्हें Medical Grounds पर Service से बाहर किया गया।
Seizure Disorder को 20% Disability माना गया
3 मार्च 2022 को Military Hospital, Bareilly में Release Medical Board आयोजित हुआ।
Medical Board ने उनकी बीमारी को “Seizure Disorder (G40.9)” के रूप में दर्ज किया और Disability को 20 प्रतिशत for life assessed किया।
हालांकि, Board ने साथ ही यह राय दी कि यह Disability न तो Military Service के कारण attributable थी और न ही Service के कारण aggravated हुई थी।
इसी Medical Opinion के आधार पर Jeetendra Kumar का Disability Pension Claim अस्वीकार कर दिया गया।
बीमारी पहली बार 2018 में सामने आई
हाईकोर्ट के सामने रखे गए Medical Records के अनुसार Seizure Disorder की पहली शुरुआत 5 अगस्त 2018 को Lucknow में दर्ज की गई थी।
इसके बाद Kumar का 20 अगस्त 2018 से Base Hospital, Delhi Cantonment में उपचार हुआ।
महत्वपूर्ण बात यह थी कि Army में भर्ती के समय उनके Medical Records में इस बीमारी का कोई उल्लेख नहीं था।
केवल भर्ती के समय बीमारी न होना पर्याप्त नहीं
लागू नियमों के अनुसार यदि किसी Serviceman में ऐसी बीमारी पाई जाती है जिसके कारण बाद में उसे Service से Discharge किया जाता है और भर्ती के समय बीमारी दर्ज नहीं थी, तो सामान्यतः यह माना जा सकता है कि बीमारी Service के दौरान उत्पन्न हुई।
हालांकि, हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल इतना तथ्य कि बीमारी Service के दौरान पहली बार सामने आई, अपने आप यह साबित नहीं करता कि बीमारी Military Service के कारण हुई थी।
Disability को attributable to या aggravated by service मानने के लिए Service और Disability के बीच आवश्यक causal connection पर भी विचार करना होता है।
Medical Board को कारण बताना जरूरी, महज औपचारिकता नहीं
फैसले में हाईकोर्ट ने Medical Board द्वारा Reasons दर्ज किए जाने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया।
अदालत ने कहा:
“The requirement to give reasons by the Medical Board is crucial, critical, decisive and necessary…”
कोर्ट के अनुसार Medical Board की Reasoned Opinion Disability Pension देने या अस्वीकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और Reasons देना कोई मात्र औपचारिकता नहीं है।
यदि किसी सैनिक की Service से Discharge या Disability Pension से वंचित करने का निर्णय Medical Board की ऐसी राय पर आधारित है जिसमें पर्याप्त कारण ही दर्ज नहीं किए गए हैं, तो उस आधार पर कार्रवाई को कानून की कसौटी पर कायम नहीं रखा जा सकता।
Board ने ‘NO’ कहा, लेकिन पर्याप्त reasoning नहीं दी
Union Government की ओर से Medical Board की राय पर भरोसा किया गया।
सरकार का तर्क था कि Seizure Disorder पहली बार उस समय सामने आया जब Kumar Lucknow में Leave पर थे। यह भी कहा गया कि वह Peace Station था और Service-related Trauma या Infection का कोई प्रमाण उपलब्ध नहीं था।
लेकिन हाईकोर्ट ने Medical Board की reasoning को पर्याप्त नहीं माना।
Board ने इस सवाल पर “NO” दर्ज किया था कि Disability Service से attributable या aggravated है या नहीं। लेकिन इसके समर्थन में मुख्यतः यह संक्षिप्त आधार दिया गया कि बीमारी Peace Area में Leave के दौरान सामने आई और Trauma अथवा Infection का कोई प्रमाण नहीं था।
Bench ने पाया कि Medical Records में भी पर्याप्त विवरण नहीं था और Kumar की Medical History को उचित रूप से दर्ज नहीं किया गया था।
Peace Station होने से Claim अपने आप खत्म नहीं होता
हाईकोर्ट ने इस तर्क को भी स्वीकार नहीं किया कि बीमारी Peace Station में सामने आने के कारण वह Military Service से संबंधित नहीं हो सकती।
अदालत ने लागू Regulations का उल्लेख करते हुए कहा कि Disability के कारण का आकलन केवल इस आधार पर नहीं किया जा सकता कि बीमारी Field/Active Service Area में सामने आई या सामान्य Peace Conditions में।
नियम Direct और Circumstantial Evidence दोनों पर विचार करने की बात करते हैं। जहां लागू हो, Benefit of Reasonable Doubt भी Serviceman के पक्ष में उपलब्ध हो सकता है।
Peace Posting में भी Military Training और Stress मौजूद
हाईकोर्ट ने Armed Forces Tribunal की उस reasoning का भी उल्लेख किया जिसमें कहा गया था कि Peace Stations पर तैनात सैनिक भी कठोर Military Training, Stress और Strain से गुजरते हैं।
AFT ने पहले ही माना था कि Medical Board द्वारा दिए गए कारण Kumar को Disability Pension से वंचित करने के लिए पर्याप्त नहीं थे।
हाईकोर्ट ने इसी कमी को महत्वपूर्ण माना और Medical Board की निष्कर्षात्मक राय को पर्याप्त कारणों के अभाव में स्वीकार करने से इनकार किया।
Seizure Disorder के कई संभावित Triggers पर भी कोर्ट ने किया विचार
हाईकोर्ट ने Medical Guidance का उल्लेख करते हुए कहा कि Seizure Disorders अलग-अलग उम्र में बिना किसी स्पष्ट और तत्काल कारण के भी विकसित हो सकते हैं।
Medical literature में Sleep Deprivation, Emotional Stress, Physical and Mental Exhaustion, Infection, Fever और Loud Noise जैसे factors को seizures के संभावित triggers के रूप में बताया गया है।
हालांकि, अदालत का निर्णय किसी विशेष Trigger को Kumar की बीमारी का कारण घोषित करने पर आधारित नहीं था। मुख्य प्रश्न यह था कि Medical Board ने Service-related connection को अस्वीकार करने के लिए पर्याप्त और स्पष्ट Reasons दिए थे या नहीं।
Discharge बरकरार, लेकिन Disability Pension का इनकार रद्द
हाईकोर्ट ने Jeetendra Kumar के Army से Medical Grounds पर Discharge को नहीं छेड़ा।
अदालत का हस्तक्षेप केवल Disability Pension के अधिकार से संबंधित था।
Bench ने माना कि Pension से इनकार जिस Medical Opinion पर आधारित था, वह पर्याप्त Reasons से समर्थित नहीं था। इसलिए उस आधार पर Disability Pension से इनकार टिकाऊ नहीं है।
हाईकोर्ट ने तत्काल Pension और सभी Attendant Benefits देने का निर्देश दिया
Allahabad High Court ने Jeetendra Kumar को तत्काल प्रभाव से Disability Pension प्रदान करने का निर्देश दिया।
इसके साथ ही उन्हें नियमों के अनुसार सभी attendant benefits देने को भी कहा गया।
इस प्रकार Court ने AFT द्वारा पहले दिए गए राहतकारी आदेश को प्रभावी बनाए रखा।
फैसले की मुख्य बातें
- Jeetendra Kumar ने Army Medical Corps में 27 वर्ष 3 महीने 2 दिन सेवा की।
- Release Medical Board ने उनकी Disability 20% for life assessed की।
- Disability: Seizure Disorder (G40.9)।
- Medical Board ने बीमारी को Military Service से attributable/aggravated नहीं माना।
- हाईकोर्ट ने Medical Board की reasoning को पर्याप्त नहीं पाया।
- Court ने कहा कि Reasoned Medical Opinion आवश्यक है, महज औपचारिकता नहीं।
- Peace Station में बीमारी सामने आना अकेले Disability Pension से इनकार का आधार नहीं हो सकता।
- Army से Medical Grounds पर हुआ Discharge बरकरार रहा।
- पूर्व Havaldar को Disability Pension और सभी attendant benefits देने का आदेश दिया गया।
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