चुनाव याचिका खारिज नहीं की जा सकती: Form-25 में कमी पर सुप्रीम कोर्ट ने बताई Certiorari और Section 86 की सीमा

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Form-25 में कमी पर चुनाव याचिका खारिज नहीं की जा सकती: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि Form-25 के attestation में कमी होने पर पूरी चुनाव याचिका को Section 86 के तहत अनिवार्य रूप से खारिज नहीं किया जा सकता। भ्रष्ट आचरण के आरोप हटाए जा सकते हैं, लेकिन स्वतंत्र चुनावी आधारों पर सुनवाई जारी रहेगी।

Form-25 में कमी पूरी चुनाव याचिका खारिज करने का आधार नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव याचिकाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि Form-25 के affidavit में attestation की कमी अपने आप पूरी election petition को Representation of the People Act, 1951 की Section 86 के तहत खारिज करने का आधार नहीं बनती।

जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने कहा कि यदि Form-25 में आवश्यक attestation नहीं है, तो चुनाव याचिका में लगाए गए corrupt practices के आरोपों को हटाया जा सकता है, लेकिन चुनाव को चुनौती देने वाले स्वतंत्र आधारों पर मामले की सुनवाई merits पर की जानी चाहिए।

पीठ ने गुवाहाटी हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें 2024 लोकसभा चुनाव में असम की करिमगंज लोकसभा सीट से निर्वाचित उम्मीदवार के खिलाफ दायर election petition को प्रारंभिक आपत्तियों के आधार पर खारिज कर दिया गया था।

विवाद क्या था?

मामला 2024 लोकसभा चुनाव में असम की No. 7 Karimganj Parliamentary Constituency से निर्वाचित उम्मीदवार के चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका से जुड़ा था।

मूल याचिकाकर्ता, जो अधिवक्ता और कांग्रेस (INC) से जुड़े राजनेता हैं, ने Representation of the People Act की Sections 80, 80-A और 81 के तहत चुनाव याचिका दायर की थी।

निर्वाचित उम्मीदवार ने Section 86 के तहत याचिका खारिज करने की मांग की। इसके लिए मुख्य रूप से तीन आपत्तियां उठाई गईं:

  1. Form-25 में attestation की कमी — प्रतिवादी को दी गई प्रति में यह स्पष्ट नहीं था कि affidavit को Notary या अन्य सक्षम अधिकारी द्वारा attested किया गया है।
  2. अलग-अलग attestation endorsements — याचिका के कुछ पृष्ठों पर “attested to be true copy of the petition”, जबकि अन्य पृष्ठों पर “certified to be true copy” लिखा था।
  3. कुछ पृष्ठों के गायब होने का आरोप — प्रतिवादी ने कहा कि याचिका की प्रति से पेज 11, 16, 21 और 22 गायब थे।

गुवाहाटी हाईकोर्ट ने attestation को उचित नहीं माना और election petition को खारिज कर दिया।

सुप्रीम कोर्ट: Section 81(3) में कोई खास भाषा निर्धारित नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने Section 81(3) की व्याख्या करते हुए कहा कि चुनाव याचिका की प्रतियां चुनाव याचिकाकर्ता द्वारा अपने हस्ताक्षर से true copy के रूप में attested होनी चाहिए।

हालांकि, कानून में attestation के लिए किसी विशेष शब्दावली या निर्धारित प्रारूप का प्रावधान नहीं है।

पीठ ने F.A. Sapa v. Singora का हवाला देते हुए कहा कि मूल आवश्यकता यह है कि चुनाव याचिकाकर्ता अपने हस्ताक्षर से प्रति की सत्यता की जिम्मेदारी स्वीकार करे।

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इसलिए, “attested to be true copy” और “certified to be true copy” जैसे अलग-अलग endorsements, यदि उनका मूल अर्थ समान है, तो केवल इस अंतर के आधार पर पूरी election petition खारिज नहीं की जा सकती।

‘Copy’ का मतलब हर अक्षर की हूबहू प्रतिलिपि नहीं

पीठ ने संविधान पीठ के फैसले Murarka Radhey Shyam Ram Kumar v. Roop Singh Rathore का भी उल्लेख किया।

अदालत ने स्पष्ट किया कि Section 81(3) के तहत दी जाने वाली “copy” का बिल्कुल शब्दशः या हर दृष्टि से identical होना आवश्यक नहीं है। महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या दी गई प्रति इतनी सही है कि निर्वाचित उम्मीदवार उसके आधार पर अपने बचाव की तैयारी कर सके और वह किसी प्रकार से mislead न हो।

इसलिए ऐसी कमी जो न तो गलत प्रस्तुति करती हो और न ही प्रतिवादी को भ्रमित करती हो, हर स्थिति में election petition के लिए fatal नहीं होगी।

Form-25 पर अलग कानूनी स्थिति

हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने Section 81(3) की attestation और Form-25 के affidavit की attestation को अलग-अलग माना।

Conduct of Elections Rules, 1961 के Rule 94-A के तहत Form-25 को चुनाव याचिकाकर्ता द्वारा हस्ताक्षरित और First Class Magistrate, Notary या Commissioner of Oaths के समक्ष affirm तथा attest किया जाना आवश्यक है।

इस मामले में मूल Form-25 रिकॉर्ड पर Commissioner of Affidavits के समक्ष affirmed पाया गया था। समस्या यह थी कि निर्वाचित उम्मीदवार को दी गई प्रति में उस attestation का स्पष्ट उल्लेख दिखाई नहीं दे रहा था।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह मूल Form-25 की दोबारा जांच करे और यह निर्धारित करे कि उसमें आवश्यक attestation मौजूद था या नहीं।

Attestation नहीं मिला तो भी पूरी याचिका खारिज नहीं होगी

सुप्रीम कोर्ट ने Shipra v. Shanti Lal Khoiwal और T.M. Jacob v. C. Poulose जैसे फैसलों की चर्चा करते हुए कानूनी स्थिति स्पष्ट की।

अदालत ने कहा कि यदि Form-25 की statutory requirement पूरी नहीं होती, तो इसका प्रभाव मुख्य रूप से corrupt practice के आरोपों पर पड़ेगा।

ऐसी स्थिति में पूरी election petition को Section 86 के तहत peremptorily dismiss करना उचित नहीं होगा।

पीठ ने स्पष्ट शब्दों में कहा:

“Section 83 का defect, Section 86 के तहत election petition की अनिवार्य dismissal का परिणाम नहीं है।”

इसका अर्थ है कि यदि corrupt practice से संबंधित affidavit में आवश्यक attestation नहीं है, तो उन आरोपों को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। लेकिन चुनाव को चुनौती देने वाले अन्य स्वतंत्र grounds पर हाईकोर्ट को merits में सुनवाई करनी होगी।

Missing pages की आपत्ति को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया

पेज 11, 16, 21 और 22 के कथित रूप से गायब होने की आपत्ति पर सुप्रीम कोर्ट ने अलग रुख अपनाया।

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पीठ ने कहा कि निर्वाचित उम्मीदवार summons की सेवा के बाद कई मौकों पर हाईकोर्ट के समक्ष उपस्थित हुआ था, लेकिन उसने पहले इस आपत्ति को नहीं उठाया। इसलिए अदालत ने इस दलील को बाद में उठाई गई आपत्ति माना और इस मुद्दे पर हाईकोर्ट के निष्कर्ष में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।

हाईकोर्ट का आदेश रद्द, चुनाव याचिका बहाल

सुप्रीम कोर्ट ने अंततः गुवाहाटी हाईकोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया और election petition को दोबारा हाईकोर्ट के रिकॉर्ड पर बहाल कर दिया।

पीठ ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि वह मूल Form-25 की जांच कर यह तय करे कि उसमें affirmation on oath की उचित attestation मौजूद है या नहीं।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश

यदि Form-25 duly attested है:
Election petition को merits पर आगे सुना जाएगा और corrupt practices से जुड़े आरोपों पर भी विचार किया जाएगा।

यदि आवश्यक attestation मौजूद नहीं है:
Corrupt practices के आरोपों को आगे बढ़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी, लेकिन चुनाव को चुनौती देने वाले अन्य स्वतंत्र grounds पर merits में सुनवाई जारी रहेगी।

इस तरह सुप्रीम कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट का आदेश रद्द कर दिया और चुनाव याचिका को बहाल कर दिया।

फैसले की कानूनी अहमियत

यह फैसला चुनावी मुकदमों में technical defects और substantive rights के बीच संतुलन को स्पष्ट करता है। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि चुनाव याचिकाओं में statutory requirements महत्वपूर्ण हैं, लेकिन हर procedural defect का परिणाम पूरी याचिका की dismissal नहीं होता।

विशेष रूप से, Form-25 में attestation की कमी corrupt practice allegations को प्रभावित कर सकती है, लेकिन इससे चुनाव को चुनौती देने वाले स्वतंत्र grounds स्वतः समाप्त नहीं हो जाते।

Case: Hafiz Rashid Ahmed Choudhury v. Kripanath Mallah
निर्णय: 24 अगस्त 2026
पीठ: जस्टिस जे.बी. पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन

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