रिटायर कर्मचारियों से वसूली पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, यूपी सरकार से जवाब तलब

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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर यूपी के प्रमुख सचिव (गृह) और वित्त नियंत्रक से जवाब मांगा। मामला रिटायर कर्मचारियों से अधिक वेतन वसूली से जुड़ा है।


🔴 सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की अनदेखी पर हाई कोर्ट नाराज

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सेवानिवृत्त कर्मचारियों से अधिक वेतन भुगतान की वसूली के मामलों में सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन न होने पर कड़ी नाराजगी जताई है।

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के प्रमुख सचिव (गृह) और लखनऊ पुलिस मुख्यालय के वित्त नियंत्रक से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर जवाब मांगा है।


⚖️ कोर्ट ने पूछा—अब तक क्या कदम उठाए?

न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया की एकलपीठ ने अधिकारियों से पूछा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा सेवानिवृत्ति के बाद अधिक वेतन की वसूली पर रोक संबंधी आदेशों को लागू करने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं।

कोर्ट ने संकेत दिया कि शीर्ष अदालत के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर पालन नहीं हो रहा है।


📜 गिरधारी लाल की याचिका पर सुनवाई

यह आदेश गिरधारी लाल द्वारा दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया।

याची की ओर से दलील दी गई कि सेवानिवृत्ति के बाद उनके खिलाफ “अधिक वेतन भुगतान” का हवाला देकर वसूली की गई और उनके सेवानिवृत्ति लाभों का भुगतान रोक दिया गया।


🧾 सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर नहीं किया विचार

याची के अधिवक्ता ने बताया कि 24 जनवरी 2024 को दिए गए प्रत्यावेदन के साथ सुप्रीम कोर्ट के फैसले की प्रति भी अधिकारियों को सौंपी गई थी।

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इसके बावजूद वित्त नियंत्रक ने उस पर विचार किए बिना भुगतान से इनकार कर दिया।


⚠️ “आदेश अवैध और सुप्रीम कोर्ट की अवमानना”

हाई कोर्ट ने कहा कि वित्त नियंत्रक द्वारा पारित आदेश न केवल अवैध प्रतीत होता है, बल्कि यह सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की अवहेलना भी है।

अदालत ने टिप्पणी की कि रोजाना ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जो प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाते हैं।


📊 सुशील कुमार सिंघल केस का हवाला

कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के सुशील कुमार सिंघल मामले का उल्लेख किया, जिसमें 16 जनवरी 2007 के शासनादेश के तहत सेवानिवृत्ति लाभों से अधिक वेतन की वसूली पर रोक लगाई गई थी।

इसके बावजूद विभागीय अधिकारी लगातार ऐसे आदेश जारी कर रहे हैं।


🚨 प्रशासनिक अधिकारियों पर सवाल

अदालत ने कहा कि बार-बार ऐसे मामलों का अदालत में आना इस बात का संकेत है कि प्रशासनिक अधिकारी शीर्ष अदालत के आदेशों का गंभीरता से पालन नहीं कर रहे।

यह स्थिति न्यायिक आदेशों की प्रभावशीलता पर भी सवाल खड़े करती है।


📅 अगली सुनवाई 25 मई को

हाई कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 25 मई तय की है।

तब तक प्रमुख सचिव (गृह) और वित्त नियंत्रक को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुपालन के लिए क्या कदम उठाए गए हैं।


🌐 रिटायर कर्मचारियों के अधिकारों पर महत्वपूर्ण टिप्पणी

यह मामला सेवानिवृत्त कर्मचारियों के आर्थिक अधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

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अदालत ने स्पष्ट संकेत दिया है कि विभागीय गलती का बोझ रिटायर कर्मचारियों पर नहीं डाला जा सकता।


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