हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए कामबंद आंदोलन में शामिल सभी वकीलों को तत्काल काम पर लौटने का दिया निर्देश

मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय ने स्वत: संज्ञान (सुओ मोटो) लेते हुए काम बंद आंदोलन में शामिल सभी वकीलों को तत्काल काम पर लौटने का निर्देश दिया है। हाईकोर्ट का यह निर्देश शुक्रवार को आया। गौरतलब है कि अदालत के एक आदेश के विरोध में वकीलों ने बृहस्पतिवार से प्रदेश भर में तीन दिन तक काम … Read more

सेवा न्यायशास्त्र: दैनिक वेतनभोगियों के नियमितीकरण के लिए प्रारंभिक नियुक्ति सक्षम प्राधिकारी द्वारा की जानी चाहिए- सुप्रीम कोर्ट

सर्वोच्च न्यायालय ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की खंडपीठ के फैसले को बरकरार रखा और कहा कि दैनिक दर वाला कर्मचारी नियमितीकरण की मांग तभी कर सकता है जब वह एक सक्षम प्राधिकारी द्वारा नियुक्त किया गया हो और स्वीकृत पद के लिए काम कर रहा हो। न्यायमूर्ति एस रवींद्र भट और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया … Read more

धारा 498-A इंडियन पीनल कोड IPC में ‘वैध विवाह’ शब्द का कोई संकेत नहीं : हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने एक मामले के सुनवाई के दौरान कहा कि धारा 498-A इंडियन पीनल कोड IPC में ‘वैध विवाह’ शब्द का कोई संकेत नहीं है। न्यायमूर्ति नंदिता दुबे की पीठ इंडियन पीनल कोड IPC की धारा 498-A के तहत दर्ज प्राथमिकी को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस मामले … Read more

‘मासूम लोगों से पैसे लूटने वाले पाखंडी’ : मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने जबरन वसूली मामले में पुजारी की पत्नी को अग्रिम जमानत देने से किया इनकार

मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के इंदौर खंडपीठ ने जबरन वसूली और आपराधिक विश्वासघात के एक मामले में एक पुजारी की पत्नी को अग्रिम जमानत देने से इनकार कर दिया। आवेदन को खारिज करते हुए, न्यायमूर्ति अनिल वर्मा ने धर्म के नाम पर लोगों के पैसे लूटने की प्रथा पर दुख जताया। हालाँकि, वह और आवेदक … Read more

भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही समाप्त नहीं होगी यदि भूमि अधिग्रहण एक्ट 2013 के लागू होने पर अवार्ड नहीं दिया गया – सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया

सुप्रीम कोर्ट ने एक ही मुद्दे से जुड़े भूमि अधिग्रहण से जुड़े तीन अलग-अलग मामलों का निस्तारण किया है। कोर्ट ने दोहराया है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन अधिनियम, 2013 में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार के प्रारंभ के अनुसार यदि अधिनिर्णय नहीं दिया जाता है तो भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही समाप्त नहीं … Read more

हिन्दू मैरिज एक्ट की धारा 13बी(2) छह महीने की कूलिंग अवधि निदेशिका, अनिवार्य नहीं: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट

मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय की ग्वालियर बेंच ने हाल ही में सुनवाई करते हुए कहा कि हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 बी (2) के तहत अर्जी दाखिल करने और अनुमति देने के बीच छह महीने की कूलिंग अवधि की आवश्यकता निदेशिका (डायरेक्ट्री) है, न कि अनिवार्यता । कोर्ट उस याचिका पर विचार कर रहा … Read more

बलात्कारी ‘4 साल की पीड़िता’ को जिंदा छोड़ने के लिए “काफी दयालु” था, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने उम्रकैद की सजा को किया कम

मप्र उच्च न्यायालय ने हाल ही में बलात्कार के एक मामले में उम्र कैद से 20 साल की सजा को कम कर दिया है, जिसमें दोषी ने 4 साल की बच्ची के साथ बलात्कार किया था मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने तरह के एक फैसले में बलात्कार के दोषी की उम्रकैद की सजा को … Read more

न्यायिक इतिहास में पहली बार HC परिसर में वकीलों ने शव रख किया भारी हंगामा, HC के जज द्वारा अनुचित टिप्पणी किए जाने से एडवोकेट की आत्महत्या पर रोष-

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के जबलपुर बेंच Jabalpur High Court में अधिवक्ता अनुराग साहू की आत्महत्या को लेकर उनके साथी वकीलों ने हाई कोर्ट परिसर में में शव रखकर जमकर हंगामा किया। इस दौरान हाई कोर्ट परिसर में वकीलों की भारी भीड़ जमा रही। जबलपुर हाईकोर्ट के वकील अनुराग साहू Advocate Anurag Sahu ने सुसाइड … Read more

यदि आरोपी चार्जशीट दाखिल करने के लिए PS से नोटिस प्राप्त करने के बाद ट्रायल के समक्ष पेश होता है, तो CrPC Sec 439 के तहत उसकी जमानत याचिका सुनवाई योग्य : HC

Madhya Pradesh high Court ने हाल ही में दोहराया कि CrPC Sec 439 के तहत उसका आवेदन सुनवाई योग्य है और इसे इस तकनीकी पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए कि उसे पुलिस द्वारा कभी गिरफ्तार नहीं किया गया था। मध्य प्रदेश उच्च न्यायलय के जबल पुर बेंच Madhya Pradesh High Court Jabalpur Bench ने … Read more

सुप्रीम कोर्ट ने IPC U/S 307 की सजा को खारिज करते हुए कहा: अदालतें अभियुक्त के बचाव को सरसरी तौर पर स्वीकार/अस्वीकार नहीं कर सकतीं –

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि निचली अदालतों को किसी आरोपी व्यक्ति के बचाव पर सावधानी से विचार करना चाहिए और आगे कहा कि इस तरह के बचाव की स्वीकृति या अस्वीकृति सरसरी तौर पर नहीं की जानी चाहिए। शीर्ष अदालत ने कहा- “…आरोपियों के बचाव पर विचार करना नीचे की अदालतों का गंभीर कर्तव्य … Read more