‘विधायक इस्तीफा दे सकता है, लेकिन मतदाताओं के अधिकार का क्या?’- मद्रास हाईकोर्ट का अहम सवाल

Like to Share

मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव का मामला: चुनाव जीतने के बाद विधायक का इस्तीफा, फिर उसी सीट से दूसरी पार्टी के टिकट पर चुनाव: मद्रास हाईकोर्ट ने उठाए मतदाताओं के अधिकार पर सवाल

मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव जीतने के तुरंत बाद विधायक के इस्तीफे और उसी सीट से दूसरी पार्टी के टिकट पर उपचुनाव लड़ने की स्थिति पर सवाल उठाए। कोर्ट ने ECI से ऐसे मामलों के लिए दिशानिर्देशों पर विचार करने को कहा, लेकिन 6 अक्टूबर के उपचुनाव पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।

मद्रास हाईकोर्ट ने चुनाव जीतने के तुरंत बाद विधायक के इस्तीफा देने और उसी विधानसभा सीट से दूसरी पार्टी के चुनाव चिह्न पर दोबारा उपचुनाव लड़ने की स्थिति को लेकर मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए हैं।

जस्टिस एस.एम. सुब्रमण्यम और जस्टिस के. गोविंदराजन की डिवीजन बेंच ने 16 सितंबर को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए भारत निर्वाचन आयोग (ECI) से पूछा कि ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए क्या कोई दिशानिर्देश मौजूद हैं। अदालत ने आयोग से मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए आवश्यक कदमों पर विचार करने को कहा।

मदुरंतकम और धारापुरम उपचुनाव का मामला

मामला तमिलनाडु की मदुरंतकम (SC) और धारापुरम (SC) विधानसभा सीटों पर प्रस्तावित उपचुनाव से जुड़ा है। निर्वाचन आयोग ने दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान और 9 अक्टूबर को मतगणना निर्धारित की है।

इन सीटों पर उपचुनाव तत्कालीन AIADMK विधायकों के. मरगथम कुमारवेल और पी. सत्यबामा के इस्तीफे के बाद आवश्यक हुए। दोनों ने बाद में TVK में शामिल होकर इन्हीं विधानसभा क्षेत्रों से दोबारा चुनाव लड़ने के लिए नामांकन किया है।

‘विधायक इस्तीफा दे सकता है, लेकिन मतदाताओं के अधिकार का क्या?’

सुनवाई के दौरान बेंच ने इस स्थिति के संवैधानिक और लोकतांत्रिक पहलुओं पर सवाल उठाए। अदालत ने यह जानना चाहा कि यदि कोई विधायक चुनाव जीतने के कुछ ही समय बाद इस्तीफा देता है और फिर उसी इस्तीफे के कारण होने वाले उपचुनाव में दोबारा उम्मीदवार बनता है, तो ऐसी स्थिति में उस मतदाता के अधिकारों और पहले दिए गए जनादेश को किस तरह देखा जाना चाहिए।

Must Read -  क्या गैर-वैवाहिक बच्चे हिंदू कानूनों के तहत अपने माता-पिता की पैतृक संपत्ति पर अधिकार का दावा कर सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट ने 2011 से लंबित याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा

अदालत ने निर्वाचन आयोग से यह भी पूछा कि क्या ऐसी परिस्थिति के लिए कोई मौजूदा व्यवस्था या दिशानिर्देश हैं।

बेंच ने मौखिक रूप से यह भी टिप्पणी की कि वर्तमान कानून में ऐसी स्थिति को लेकर एक तरह का नियामकीय अंतर दिखाई देता है—विशेषकर तब, जब वही व्यक्ति उस उपचुनाव में फिर से उम्मीदवार बन रहा हो, जो उसके अपने इस्तीफे के कारण आवश्यक हुआ।

उपचुनाव पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार

हालांकि, हाईकोर्ट ने 6 अक्टूबर को प्रस्तावित उपचुनाव पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया।

अदालत ने कहा कि एक बार चुनाव प्रक्रिया शुरू हो जाने के बाद न्यायालय आम तौर पर उसमें हस्तक्षेप नहीं कर सकता। इसके साथ ही बेंच ने निर्वाचन आयोग को मामले में मतदाताओं के संवैधानिक अधिकारों की सुरक्षा से जुड़े पहलुओं पर विचार करने को कहा।

याचिकाकर्ता ने मांगी वित्तीय जवाबदेही

जनहित याचिका अधिवक्ता के. सुथन ने दायर की थी। याचिकाकर्ता की ओर से तर्क दिया गया कि यदि कोई निर्वाचित प्रतिनिधि बिना किसी कानूनी रूप से मान्य बाध्यकारी परिस्थिति के चुनाव के तुरंत बाद इस्तीफा देता है और उसके कारण उपचुनाव कराना पड़ता है, तो उससे होने वाले सार्वजनिक खर्च को लेकर जवाबदेही तय करने की व्यवस्था होनी चाहिए।

याचिका में कई उपाय सुझाए गए हैं—

  • ऐसे मामलों में ‘Election Expenditure Security’ की व्यवस्था;
  • उपचुनाव पर होने वाले सार्वजनिक खर्च की भरपाई के लिए वित्तीय तंत्र;
  • स्वैच्छिक और समय से पहले इस्तीफा देने वाले निर्वाचित प्रतिनिधियों के लिए निर्धारित अवधि तक दोबारा चुनाव लड़ने पर ‘Cooling-off Period’ की संभावना;
  • ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए आवश्यक कानूनी और नियामकीय उपाय।
Must Read -  सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश पर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली याचिका पर सुनवाई, महासचिव को जवाब दाखिल करने का निर्देश-

याचिकाकर्ता ने सुझाव दिया कि उपचुनाव लड़ने के लिए नामांकन दाखिल करने से पहले ऐसी वित्तीय सुरक्षा जमा कराने को शर्त बनाया जा सकता है। (IndMedia)

अब नजर निर्वाचन आयोग की भूमिका पर

हाईकोर्ट की सुनवाई का प्रमुख सवाल फिलहाल यह है कि निर्वाचित प्रतिनिधि के इस्तीफे के अधिकार और मतदाता द्वारा दिए गए जनादेश के संरक्षण के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए।

अदालत ने इस मामले में तत्काल कोई नया प्रतिबंध लागू नहीं किया है। इसके बजाय निर्वाचन आयोग से ऐसी असामान्य परिस्थितियों से निपटने के लिए मौजूदा दिशानिर्देशों और संभावित नियामकीय उपायों पर विचार करने को कहा गया है।

Tags:
#MadrasHighCourt #ElectionCommission #ByElection #TamilNaduPolitics #Madurantakam #Dharapuram #MLAResignation #VotersRights #ConstitutionalRights #ElectoralReforms #मद्रासहाईकोर्ट #निर्वाचनआयोग #उपचुनाव #तमिलनाडु #विधायकइस्तीफा #मतदाताअधिकार #संवैधानिकअधिकार #चुनावसुधार

Leave a Comment